हॉकी विश्व कप 2026 से टीम इंडिया के बाहर होने के बाद पूर्व दिग्गजों का फूटा गुस्सा, सेलेक्शन को लेकर उठाए सवाल
भारतीय पुरुष हॉकी टीम के विश्व कप 2026 से बाहर होने के बाद पूर्व दिग्गजों ने चयन नीति और युवा खिलाड़ियों को मौका न देने पर सवाल उठाए हैं।

भारतीय हॉकी टीम

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
पीटीआई, एम्सटेलवीन। विश्व कप में 51 साल बाद पदक जीतने का सपना लेकर गई भारतीय पुरुष ह\की टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने में भी नाकाम रहने के बाद पूर्व दिग्गजों ने युवा खिलाड़ियों को मौका नहीं देने और उसी कोर ग्रुप के साथ लगातार खेलने पर सवाल उठाए हैं।
अर्जेंटीना से 3 -5 से हारने के बाद भारत की सेमीफाइनल की उम्मीदें भी खत्म हो गई और इससे वे कमजोरियां भी उजागर हुई जो पेरिस ओलंपिक के बाद से लगातार चली आ रही थी। पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि धीमी शुरुआत, मौके गंवाने और डिफेंस में चूक से आगे यह समस्या और बड़ी है और इसका हल काफी पहले निकाला जाना चाहिए था।
स्विटजरलैंड में बूट कैंप
भारतीय टीम विश्व कप से पहले स्विटजरलैंड में मानसिक दृढ़ता बढ़ाने के लिये बूट कैंप में गई लेकिन टूर्नामेंट में दबाव का सामना नहीं कर सकी। ड्रैग फ्लिकर और कप्तान हरमनप्रीत सिंह पर अधिक निर्भरता का खामियाजा भुगतना पड़ा जबकि वह पूरी तरह फिट नहीं थे। मनप्रीत सिंह और मनदीप सिंह जैसे सीनियर अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके।
पी आर श्रीजेश ने उठाए सवाल
पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद संन्यास लेने वाले गोलकीपर पी आर श्रीजेश ने जूनियर खिलाड़ियों को समय पर मौके नहीं दिए जाने का हवाला देते हुए कहा कि सीनियर खिलाड़ियों के जाने के बाद उनकी जगह कौन लेगा। क्या हमने दूसरी जमात तैयार की है। लॉस एंजिलिस ओलंपिक में दो ही साल बचे हैं और उससे पहले करीब तीस अंतरराष्ट्रीय मैच ही होंगे। क्या ओलंपिक के लिए इससे खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि विश्व कप की टीम में भी भी वही कोर खिलाड़ी हैं जबकि मनमीत सिंह, आमिर अली, रोशन कुजूर, तालेम प्रियब्रत, रोहित, अर्शदीप जैसे कई प्रतिभाशाली जूनियर इंतजार ही कर रहे हैं।
पूर्व ओलंपियन जगबीर सिंह ने भी साधा निशाना
पूर्व ओलंपियन जगबीर सिंह ने कहा कि चयन के कुछ फैसले बेहतर हो सकते थे। उन्होंने कहा कि जूनियर खिलाड़ियों को सही समय पर मौके मिलने चाहिये और चयन के कुछ फैसले बेहतर हो सकते थे। तैयारी ओलंपिक से ओलंपिक की होनी चाहिए। कोचिंग स्टाफ ने अनुभव को ही तरजीह दी जो काम नहीं आया। भारत के पास यह सर्वश्रेष्ठ मौका था लेकिन प्रदर्शन में निरंतरता नहीं दिखी। हर दस मिनट में डिफेंस चरमरा रहा था।
पूर्व कप्तान वासुदेवन भास्करन ने टीम को घेरा
ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता कप्तान रहे वासुदेवन भास्करन ने कहा कि मैने पिछले चार साल में किसी भारतीय फॉरवर्ड को अच्छा खेलते नहीं देखा। बैक पास कहां थे, गोल पर कितने हमले किए और फुल प्रेस जाने के समय मिडफील्ड पूरा खाली छोड़ दिया।
