शहनाई बजने का समय आ गया! 9 अगस्त से शुरू हो रहा शादियों का सीजन, देखें अगस्त से दिसंबर के शुभ मुहूर्त
Marriage Date August-December: गुरु तारा 9 अगस्त को उदय होगा, जिससे विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। ज्योतिषाचार्य के ...और पढ़ें
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9 अगस्त को गुरु उदय, फिर गूंजेंगी शहनाइयां (फाइल फोटो)
HighLights
गुरु तारा 9 अगस्त को उदय होगा, शुभ मुहूर्त शुरू।
अगस्त से दिसंबर तक विवाह के लिए कई शुभ तिथियां।
12 से 29 अक्टूबर तक शुक्र अस्त, विवाह वर्जित।
जागरण संवाददाता, जम्मू : पिछले कुछ सप्ताह से जिन परिवारों में विवाह की तैयारियां शुभ मुहूर्त के इंतजार में थमी हुई थीं। उनके लिए राहत की खबर है। भारतीय ज्योतिष परंपरा के अनुसार 9 अगस्त, शनिवार को गुरु का उदय होगा और इसके साथ ही विवाह सहित अनेक मांगलिक कार्यों के लिए शुभ समय का आरंभ हो जाएगा।
श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं ज्योतिषाचार्य महंत रोहित शास्त्री के अनुसार गुरु 15 जुलाई को पश्चिम दिशा में अस्त हुआ था और अब 9 अगस्त को रात्रि 9.54 बजे पूर्व दिशा में उदित होगा। भारतीय ज्योतिष में इसे तारा चढ़ना कहा जाता है और यही वह क्षण होता है। जिसके बाद विवाह, गृहप्रवेश, यज्ञोपवीत, मुंडन तथा अन्य शुभ संस्कारों के द्वार फिर से खुल जाते हैं।
गुरु और शुक्र समृद्धि के प्रतीक
महंत शास्त्री बताते हैं कि भारतीय संस्कृति में गुरु और शुक्र केवल ग्रह नहीं, बल्कि शुभता, ज्ञान, समृद्धि और दांपत्य जीवन के प्रतीक माने गए हैं। यही कारण है कि इनके अस्त रहने की अवधि में विवाह और अन्य प्रमुख मांगलिक संस्कारों को स्थगित रखा जाता है। हालांकि इस दौरान सगाई, मंगनी जैसे कार्यक्रम शुभ मुहूर्त में किए जा सकते हैं और इनमें किसी प्रकार का दोष नहीं माना जाता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि तारा डूबना और तारा चढ़ना कोई लोक मान्यता मात्र नहीं, बल्कि ग्रहों के दृष्टिगोचर और अदृश्य होने की खगोलीय स्थिति है। जैसे सूर्य उदय और अस्त होता है। उसी प्रकार ग्रह भी कुछ समय के लिए दृष्टि से ओझल होकर पुनः दिखाई देते हैं।
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अगस्त से दिसंबर तक विवाह के शुभ अवसर
देवशयन, चातुर्मास के उपरांत जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में विवाह के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं।
अगस्त : 13, 18, 20, 22, 23, 24, 25, 29 और 30।
सितंबर: 3, 4, 5, 12, 13, 14 और 21।
नवंबर: 2, 3, 10, 11, 12, 13, 21, 22, 23, 25 और 26।
दिसंबर : 2, 3, 4, 5, 11 और 12।
12 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक शुक्र अस्त रहेगा
महंत शास्त्री ने बताया कि 12 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक शुक्र अस्त रहेगा। इस अवधि में भी विवाह एवं अन्य प्रमुख मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं। उन्होंने कहा कि केवल शुभ तिथि देख लेना पर्याप्त नहीं है। विवाह के लिए वार, नक्षत्र, योग, करण, लग्न तथा वर-वधू की कुंडली का समुचित विचार आवश्यक होता है। शास्त्रसम्मत मुहूर्त में संपन्न विवाह दांपत्य जीवन में सुख, समृद्धि और सामंजस्य का आधार बनता है।
उन्होंने अभिभावकों और विवाह योग्य युवक-युवतियों से समय रहते योग्य विद्वान से परामर्श लेकर शुभ मुहूर्त का चयन करने की अपील की, ताकि विवाह संस्कार परंपरा और विधि-विधान के अनुरूप संपन्न हो सके।