जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कटड़ा हत्या मामले में पति व उसकी प्रेमिका को उम्रकैद की सजा बरकरार
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने कटड़ा हत्या मामले में पति और उसकी प्रेमिका की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। दोनों ने 2011 में एक गेस्ट हाउस में महिला की हत्या की थी। इसके अतिरिक्त, 34.25 लाख के चिट-फंड घोटाले में एक पुलिसकर्मी और नशीली दवाओं की तस्करी के आरोपी फार्मास्यूटिकल लाइसेंस धारक की जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई।

अदालत ने वित्तीय धोखाधड़ी और नशीली दवाओं के खतरे पर सख्त रुख अपनाया।
जेएनएफ, जम्मू। जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट ने कटड़ा के एक गेस्ट हाउस में हुई हत्या के मामले में मृत महिला के पति अरविंद वर्मा व उसकी प्रेमी को दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। वर्ष 2011 में कटड़ा के एक गेस्ट हाउस में एक महिला की गला रेता हुआ शव बरामद हुआ था।
जांच में पता चला कि महिला के पति अरविंद वर्मा का उसकी प्रेमी के साथ अवैध संबंध था और दोनों ने मिलकर महिला की हत्या की थी। दोनों ने कानपुर के एक होटल में मिलकर इस हत्या की साजिश रची थी।
इस मामले में ट्रायल काेर्ट ने 2018 में दोनों आरोपितों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी जिसे उन्होंने हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच में चुनौती दी। बेंच ने उनकी चुनौती को खारिज करते हुए उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है।
34.25 लाख के चिट-फंड घोटाले में जमानत अर्जी खारिज
जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट ने 34.25 लाख रुपये के चिट-फंड घोटाले के आरोपित पुलिसकर्मी की जमानत अर्जी काे खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि एक अनुशासित बल का सदस्य होने के बावजूद जिसने जनता को वित्तीय योजनाओं के माध्यम से धोखा दिया है, वह जमानत का हकदार नहीं है।
पुलिस विभाग में फालोअर के पद पर तैनात विजय खोखर पर आरोप है कि उसने एमएस माला एंटरप्राइजेज के नाम से एक नीलामी-आधारित चिट-फंड व्यवसाय चलाया और जमा राशि का गबन किया जिससे निवेशकों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
जमानत अर्जी खारिज
जम्मू-कश्मीर व लद्दाख हाईकोर्ट ने एक फार्मास्यूटिकल दवा लाइसेंस धारक गर्व भंबरी की जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिस पर एक अंतरराज्यीय नशीली दवाओं की तस्करी नेटवर्क में शामिल होने का आरोप है।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के केस के मुताबिक भंबरी ने वैध दवा निर्माण की आड़ में एक नशीली दवाओं की तस्करी नेटवर्क चलाया और प्रतिबंधित दवाओं की आपूर्ति की। जांच में पता चला है कि कई फार्मास्यूटिकल कंपनियां शेल कंपनियों के माध्यम से नशीली दवाओं की तस्करी में शामिल थीं।
हाईकोर्ट ने आरोपित की जमानत अर्जी को खारिज करते हुए कहा कि नशीली दवाओं की तस्करी के इस नेटवर्क का युवाओं पर घातक प्रभाव पड़ सकता है और जांच में प्रथम दृष्टया एक संगठित आपराधिक साजिश का पता चलता है।
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपित को जमानत देना उचित नहीं होगा, क्योंकि यह एक सुनियोजित आपराधिक साजिश है जो अवैध लाभ के लिए चलाई जा रही है।

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