जम्मू-कश्मीर में मादक पदार्थों की लत के खतरे से निपटने के लिए नीति आयोग करेगी सहायता, क्या है पूरा प्लान?
नीति आयोग जम्मू-कश्मीर में मादक पदार्थों की लत से निपटने के लिए सहायता करेगा। आयोग, केंद्र शासित प्रदेश में नशीली दवाओं के दुरुपयोग को कम करने के लिए प्रशासन के साथ मिलकर रोकथाम, उपचार और पुनर्वास जैसे पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करेगा।

जम्मू-कश्मीर के लिए एक विस्तृत कार्य योजना बनाई जाएगी जिससे इस खतरे को कम किया जा सके।
राज्य ब्यूरो, जागरण, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में बढ़ते मादक पदार्थों की लत के खतरे से निपटने के लिए नीति आयोग जम्मू-कश्मीर की सहायता करेगा।
विशेषज्ञों की एक समर्पित टीम केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन को एक व्यापक कार्य योजना तैयार करने में सहायता करेगी। यह आश्वासन नीति आयोग के सदस्य डा. वीके पाल ने मुख्य सचिव अटल डुल्लू को दिया।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में अधिकारियों व स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ एक सलाह सत्र में डा. पाल ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन के सक्रिय दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने उपचार से आगे बढ़कर समग्र पुनर्वास और सामुदायिक लामबंदी पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सराहा।
उन्होंने कहा कि परामर्श और पुनर्वास पर ज़ोर देने वाला प्रस्तावित माडल समग्र रणनीति में अधिक उत्साह और स्थायित्व लाता है जिससे यह नवीन और व्यापक बनती है। उन्होंने मादक द्रव्यों के सेवन प्रबंधन के हिमाचल प्रदेश माडल से भी जानकारी साझा की जिसमें राष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा समर्थित एक संरचित उपचार नेटवर्क ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं।
ठीक हुए व्यक्तियों के व्यवस्थित पुनर्वास पर दिया जोर
उन्होंने इस माडल का विस्तार से अध्ययन करने और आवश्यक संशोधनों के साथ इसके ढांचे को जम्मू-कश्मीर की विशिष्ट आवश्यकताओं और सामाजिक सांस्कृतिक संदर्भ के अनुरूप ढालने का सुझाव दिया। उन्होंने प्रस्तावित कार्य रणनीति में सूचना, संचार, रोगी सेवाओं में वृद्धि, संरचित उपचार प्रोटोकाल और ठीक हुए व्यक्तियों के व्यवस्थित पुनर्वास पर जोर दिया।
इससे पहले मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने डा. पाल से मादक द्रव्यों के सेवन से निपटने के लिए एक व्यापक, प्रभावी और स्थायी रणनीति विकसित करने के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन मांगा। इस मौके पर एम्स नई दिल्ली और पीजीआइ चंडीगढ़ के प्रमुख राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों के अलावा जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ अधिकारी और स्वास्थ्य प्रशासक भी शामिल हुए।
बहुआयामी रणनीति के बारे में भी विस्तार से बताया
बैठक का संचालन स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव ने किया और इसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध निदेशक, स्किम्स के निदेशक, मेडिकल कालेजों के प्रिंसिपल और जीएमसी श्रीनगर तथा जीएमसी जम्मू के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुखों ने भाग लिया।
मुख्य सचिव ने केंद्र शासित प्रदेश में नशीली दवाओं के दुरुपयोग की समस्या की गंभीरता को बताया और विभिन्न एजेंसियों द्वारा की जा रही पहलों, संस्थागत तंत्रों और समन्वित प्रयासों पर जानकारी दी। उन्होंने प्रशासन द्वारा अपनाई गई बहुआयामी रणनीति के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने कहा कि यह रणनीति सख्त प्रवर्तन, सूचना, शिक्षा और संचार अभियान, परामर्श, उपचार और पुनर्वास के पांच प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। इसका उद्देश्य पीड़ितों के तत्काल हस्तक्षेप और दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ दोनों को सुनिश्चित करना है।
नेटवर्क को मजबूत करने पर विशेषज्ञ सुझाव मांगे
मुख्य सचिव ने डा. पाल से शैक्षणिक संस्थानों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, और स्थानीय समुदायों सहित जमीनी स्तर तक परामर्शदाताओं के नेटवर्क को मजबूत करने पर विशेषज्ञ सुझाव मांगे। उन्होंने एक अधिक सुदृढ़ पुनर्वास ढांचा विकसित करने के महत्व पर बल दिया जो एक प्रभावी निगरानी तंत्र द्वारा समर्थित हो ताकि लत की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
एम्स और पीजीआइ के विशेषज्ञों ने नैदानिक उपचार प्रोटोकाल, परामर्श पद्धतियों और मादक द्रव्यों के सेवन संबंधी विकारों के प्रबंधन में सर्वोत्तम प्रथाओं पर बहुमूल्य जानकारी भी साझा की।
इससे पहले स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सचिव डा. सैयद आबिद राशिद शाह ने केंद्र शासित प्रदेश में नशीली दवाओं की लत की चुनौती से निपटने के लिए मौजूदा ढांचे, नीतियों, बुनियादी ढांचे और मानव संसाधन क्षमता के बारे में जानकारी दी।

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