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'मेरा बाबू लौट आया...' दिल्ली हादसे में बाल-बाल बचा नितिश घर पहुंचा; पोते को देख फफक पड़ीं दादी, जानें कैसे बची जान

By Anchal SinghEdited By: Dallu Slathia
Published: Fri, 11 Sep 2026 03:23 PM (IST)

दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने के बाद मौत को मात देकर 19 वर्षीय नितिश चिब जम्मू स्थित अपने ...और पढ़ें

परिवार के साथ  19 वर्षीय नितिश चिब।

परिवार के साथ  19 वर्षीय नितिश चिब।

HighLights

  1. नितिश चिब दिल्ली इमारत हादसे में चमत्कारिक रूप से बचे।

  2. डेढ़ घंटे मलबे में फंसे रहने के बाद सुरक्षित निकाले गए।

  3. जम्मू पहुंचने पर दादी और परिवार ने खुशी के आंसू बहाए।

अंचल सिंह, जम्मू। काल के मुंह से जिंदगी छीनकर जब 19 वर्षीय नितिश चिब ने जब अपने घर की दहलीज पर कदम रखा, तो आंगन में पसरा चार दिनों का सन्नाटा सिसकियों और आंसुओं के सैलाब में बदल गया। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए दर्दनाक इमारत हादसे के बाद मौत को मात देकर लौटे नितिश को सीने से लगाकर 90 वर्षीय दादी निर्जला देवी जब फफक-फफक कर रो पड़ीं, तो वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा पसीज गया।

कांपते हाथों से पोते का चेहरा छूते हुए दादी बस यही बुदबुदा रही थीं - ‘मेरा बाबू लौट आया।’ दादी के इन आंसुओं ने बीते चार दिनों के खौफ और आंसुओं के सारे गम धो डाले। वहीं नितिश इसे दूसरा जन्म करार दे रहे हैं और उनके दोस्त नीरज बाबा जोकि गंभीर हालत एम्स में भर्ती हैं, के सकुशल हाेने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। नितिश ने बताया कि दोनों दोस्त एक साथ बैठे हुए थे जब इमारत ताश के पत्तों की तरह गिर गई थी।

मलबे में डेढ़ घंटे तक मौत से जंग

दिल्ली यूनिवर्सिटी में बीकाम प्रोग्राम के छात्र नितिश चिब रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे सत्य निकेतन में गिरी पांच मंजिला इमारत के मलबे में दब गए थे। करीब डेढ़ घंटे तक मलबे के नीचे सांसे थामे जिंदगी और मौत से लड़ते रहे नितिश को सीनियर्स और एनडीआरएफ कर्मियों ने कुदरत के करिश्मे की तरह सुरक्षित बाहर निकाला।

रविवार से बुधवार तक परिवार का हर सदस्य जिस असहनीय पीड़ा और अनहोनी की आशंका से गुजर रहा था, वह वीरवार सुबह 7:10 बजे जम्मू रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के रुकते ही खत्म हो गई। नितिश अपनी मां सीमा देवी और बहन पल्लवी के साथ जम्मू पहुंचे।

दहलीज पर कदम रखते ही छू लिए दादी के पांव

घर पहुंचते ही नितिश ने सबसे पहले दादी के चरण स्पर्श किए। पोते को जीवित और सही-सलामत देखकर दादी निर्जला देवी की आंखों से खुशी और राहत के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। मां सीमा देवी और पिता पवन सिंह अपने कलेजे के टुकड़े को बार-बार निहार कर ईश्वर का आभार व्यक्त कर रहे थे।

कुदरत के करिश्मे को देखने उमड़ा हुजूम

हादसे की खबर के बाद से ही घर में दुआओं का दौर जारी था। नितिश के सुरक्षित लौटने पर ताया परवीन सिंह चिब व ताई गुलशन देवी, ताया शशि पाल सिंह चिब व ताई सीमा देवी, तथा ताया नीलम सिंह व ताई अनु देवी सहित पूरे परिवार की आंखें नम थीं।

दिनभर रिश्तेदारों, पड़ोसियों और स्थानीय लोगों का नितिश का कुशलक्षेम जानने के लिए तांता लगा रहा। हर कोई बस यही कह रहा था कि यह किसी चमत्कार से कम नहीं कि मौत के इतने करीब जाकर भी नितिश नई जिंदगी लेकर अपने परिवार के बीच सुरक्षित लौट आया।