वैष्णो देवी यात्रा: पुराना रास्ता या नया मार्ग? पढ़ें चढ़ाई करने लिए कौन सा रूट है सबसे बेहतर
यह लेख वैष्णो देवी धाम की यात्रा के लिए पारंपरिक और हिमकोटी मार्गों की तुलना करता है, जिससे श्रद्धालुओं को ...और पढ़ें
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वैष्णो देवी जाने के लिए कौन सा रूट सबसे बेहतर (फाइल फोटो)
HighLights
पारंपरिक मार्ग पर अधिक सुविधाएं और भीड़-भाड़ रहती है
हिमकोटी मार्ग शांत, चौड़ा और प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर है
नवंबर महीना वैष्णो देवी यात्रा के लिए सबसे अनुकूल है
डिजिटल डेस्क, जम्मू। नवरात्र समाप्त हो चुके हैं और अब वैष्णो देवी धाम पर भी भीड़-भाड़ कम है। नवरात्र के तुरंत बाद श्रद्धालुओं की संख्या में गिरावट भी आई है। ऐसे में यदि आप भी यात्रा का प्लान कर रहे हैं तो नवंबर महीना वैष्णो देवी धाम जाने के लिए काफी अनकूल है।
न ज्यादा सर्दी, न बरसात और ना ही गर्मी का झंझट... इसी क्रम में इस आर्टिकल के माध्यम से आज हम आपको बताएंगे कि धाम जाने के लिए कौन सा मार्ग आपके लिए उचित रहेगा।
रोजाना माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु कटड़ा पहुंचते हैं। इस बीच दर्शनी ड्योढ़ी से श्रद्धालुओं को दो रास्ते यात्रा तय करने के लिए मिलते हैं। एक- पारंपरिक मार्ग और दूसरा- नया मार्ग (हिमकोटी मार्ग)।
पारंपरिक मार्ग की खासियत
पारंपरिक मार्ग की खासियत है कि यह रास्ता दर्शनी ड्योढ़ी से बाणगंगा, चरणपादुका, अर्धकुंवारी और सांझी छत होते हुए भवन तक जाता है। इस रास्ते में अधिक दुकानें, भोजनालय और सुविधाएं उपलब्ध हैं।
अर्धकुंवारी गुफा के दर्शन इस मार्ग से आसानी से किए जा सकते हैं। ऐसे में यदि आप पहली बार जा रहे हैं तो यह रास्ता बिल्कुल उचित है। लेकिन इस रास्ते पर भीड़-भाड़ अधिक रहती है। घोड़े-पालकी और पिट्ठू की आवाजाही भी इसी मार्ग से होती है।
नया हिमकोटी मार्ग
हिमकोटी मार्ग, बाणगंगा से पहले ही शुरू हो जाता है। इस रास्ते की खासियत है कि यह पारंपरिक मार्ग की अपेक्षा चौड़ा और शांत है। यहां घोड़ों और पालकियों की आवाजाही भी नहीं होती है।
मनोहर दृश्य भी इसी रास्ते में सबसे ज्यादा आते हैं। यदि आप वैष्णो देवी धाम पहले जा चुके हैं तो इस बार हिमकोटी मार्ग से यात्रा तय करना एक नया अनुभव बन सकता है।
हालांकि, पारंपरिक मार्ग की तुलना में यह मार्ग थोड़ा लंबा है। साथ ही इस मार्ग पर अर्धकुंवारी गुफा नहीं पड़ती। पुराने मार्ग की तुलना में दुकानें और सुविधाएं भी कम हैं।
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