'मुझे गधा-चींटी कहें...', लेह पहुंचने पर स्वागत समारोह में 'शेर आया' के नारे पर बोले सोनम वांगचुक
जोधपुर जेल से रिहा होकर लेह पहुंचे सोनम वांगचुक ने अपने स्वागत समारोह में खुद को 'गधा' या 'चींटी' कहलाना पसंद किया। ...और पढ़ें
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अपनी बात रखते सोनम वांगचुक। फाइल फोटो
राज्य ब्यूरो, जम्मू। जोधपुर सेंटल जेल से रिहा होने के बाद लेह पहुंचे पर्यावरणविद्ध सोनम वांगचुक ने कहा है कि वह खुद को गधा या चींटी कहलाना पंसद करेंगे। रविवार को लेह पहुंचने पर एनडीएस स्टेडियम में उनके स्वागत समारोह में जब शेर आया शेर आया के नारे लगे तो वांगचुक ने कहा कि उन्हें गधा आया, गधा आया कहा जाए।
वांगचुक ने कहा कि मैं खुद को गधा या चींटी कहलाना अधिक पसंद करुंगा। करीब छह महीने के बाद हिरासत से रिहाकर लेह पहुंचे वांगचुक का भारी भीड़ ने स्वागत किया।
बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि शेर आया शेर आया के नारों से मुझे बहुत दुख होता हैं, मैं गधे की ज्यादा इज्जत करता हूं। शेर खाता है, डराता, चोट पहुंचाता है।
गधे से ज्यादा कोई सुलझा नहीं
मैंने गधे से ज्यादा सुलझा किसी को भी नहीं देखा। वह सबकी कटुता, कड़वाहट ले लेता है। ओरों के काम आता है व हमला भी नहीं करता, इसलिए मैने कहा कि मुझे कहें गधा आया गधा आया कहा जाए।
वांगचुक ने कहा कि लोग मुझे चींटी कहें। चींटी वे अपनी कौम, समाज, गांव के लिए जान दे देती हैं, वह अपनी लिए कुछ नही करती हैं, सबकुछ अपनी कालोनी के लिए करती हैं। पलक झपकते जान दे देती हैं।
उन्होंने कहा कि देश के लिए सेना की लद्दाख स्काउट्स के जवान भी हमेश जान दे देते आए हैं। उसी तरह से हम भी देश के लिए काम करेंगे। उन्होंने कहा कि सीखना है तो लद्दाख स्काउट्स के जवानों व चीटियों से सीखो।
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