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    कश्मीर में नया नेटवर्क तैयार करने की थी साजिश, आतंकी हमजा बुरहान की मौत के बाद ISI के बड़े प्लान का पर्दाफाश

    Updated: Tue, 26 May 2026 10:30 PM (IST)

    POK में आतंकी हमजा बुरहान की हत्या पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के कश्मीर में स्थानीय आतंकी नेटवर्क तैयार करने के मंसूबों के लिए बड़ा झटका है। ...और पढ़ें

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    POK में आतंकी हमजा बुरहान की हुई हत्या (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. हमजा बुरहान की हत्या ISI के मंसूबों पर बड़ा झटका

    2. ISI उसे कश्मीर जिहाद का नया चेहरा बनाना चाहता था

    3. हिजबुल और अल-बदर के कैडर को जोड़ने की थी साजिश

    नवीन नवाज, श्रीनगर। हमजा बुरहान की गत सप्ताह गुलाम जम्मू कश्मीर (PAK) में हत्या न सिर्फ अल-बदर मुजाहिदीन के लिए बल्कि कश्मीर में फिर से स्थानीय आतंकियों का नेटवर्क तैयार करने के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के मंसूबों के लिए भी एक बड़ा झटका है।

    पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई हमजा बुरहान जिसका असली नाम अर्जमंद गुलजार है, को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाते हुए उसे कश्मीर जिहाद का नया चेहरा पेश करने की कोशिश कर रही थी। उसके जरिए कश्मीर मे हिजबुल मुजाहिदीन और अल-बदर के कैडर को संयुक्त रूप से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने का षड्यंत्र था ताकि कश्मीर में आतंकी हिंसा को पूरी तरह से स्थानीय स्तर की आतंकी हिंसा साबित किया जा सके।

    दक्षिण कश्मीर में जिला पुलवामा के खरबतपोरा का रहने वाला अर्जमंद गुलजार करीब सात वर्ष से पाकिस्तान में था। गत सप्ताह गुलाम जम्मू कश्मीर में ओजरा, मुजफ्फराबाद के पास एक हमले में वह मारा गया। वह अल-बदर मुजाहिदीन की कमान कौंसिल में तीसरे नंबर पर था।

    हमजा बुरहान पाकिस्तान के लिए बड़ा हथियार

    आतंकी बुरहान के मारे जाने और पांच अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद जिस तरह से कश्मीर में आतंकी नेटवर्क का सफाया करते हुए भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय जगत में आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को बेनकाब किया है, उस हालात में अर्जमंद गुलजार उर्फ हमजा बुरहान पाकिस्तान के लिए एक बडृ़ा हथियार था, क्योंकि वह युवा था और एमबीबीएस की पढ़ाई बीच में छोड़ जिहादी बना था। इसके अलावा वह दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में ही नहीं सेंट्रल कश्मीर के बडगाम और उत्तरी कश्मीर में अपना अच्छा खासा नेटवर्क रखत था।

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    जम्मू-कश्मीर में आतंकरोधी अभियानों में शामिल एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, उपलब्ध सूचनाओं के मुताबिक पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने बीते पांच-छह वर्ष में गुलाम जम्मू कश्मीर में जिन कश्मीरी आतंकियों को सबसे ज्यादा अहमियत और सुविधाएं प्रदान की हैं, उनमें अर्जमंद गुलजार उर्फ हमजा बुरहान का नाम सबसे आगे है। उसका प्रोटोकाल हिजबुल मुजाहिदीन के सैयद सल्लाहुदीन से ज्यादा था।

    हमजा बुरहान की मदद से आतंक फैलाने की साजिश

    आईएसआई कोशिश कर रही थी कि हमजा बुरहान के माध्यम से कश्मीर में हिजबुल मुजाहिदीन और अल-बदर मुजाहिदीन के कैडर को आपस में जोड़ आतंकी हिंसा में तेजी लाई जाए। आईएसआई की कोशिश थी कि जिन इलाकों में हिजब का सक्रिय कैडर खत्म हो चुका है, वहां उसका ओवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क अल-बदर मुजाहिदीन के लिए काम करे।

    इसके अलावा हिजबुल मुजाहिदीन को फिर से ताकतवर दिखाने और उसका दबदबा बनाने के लिए अल-बदर के कैडर द्वारा की जाने वाली वारदातों की जिम्मेदारी हिजबुल मुजाहिदीन ले, क्योंकि दक्षिण कश्मीर में और बडगाम में पहले भी इन दोनों आतंकी संगठनों का कैडर आपस में मिलकर हिंसक गतिविधियों को अंजाम देता रहा है या फिर कई बार हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों ने हिजब छोड़ अल-बदर मुजाहिदीन का दामन थामा है।

    2019 में मारा गया आतंकी अबू अलकामा

    जनवरी 2019 में मारा गया अल-बदर का आतंकी जीनत उल इस्लाम उर्फ अबु अलकामा पहले हिजबुल मुजाहिदीन में ही था। वह वर्ष 2018 में हिजबुल मुजाहिदीन व अल-बदर के बीच हुए एक समझाैते के तहत अल-बदर में शामिल हुआ था।

    उन्होंने बताया कि विगत कुछ वर्षाें में टीआरएफ,पीएएफएफ,कश्मीर टाइगर्स, कश्मीर रजिस्टेंस फोर्स,गजनवी फोस , लश्कर ए मुस्तफा जैसे कई छाया संगठनों को आईएसआई ने जन्म दिया है,लेकिन यह सभी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश या फिर तहरीकुल मुजाहिदीन से संबधित हैं। इनके सभी प्रमुख हैंडलर पाकिस्तानी ही हैं। ऐसे में हमजा बुरहान का लाभ पकािस्तानी खुफिय एजेंसी आईएसआई को होता और इसके अलावा वह युवा था

    जिसके सहारे पर कश्मीर में आतंकियों की नयी पौध तैयार करने में भी मददगार साबित हो रहा था। इसके अलावा उसे कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों के पाकिस्तान स्थित साझा मंच यूनाइटेड जिहाद कौंसिल, जिसका चेयरमैन सैयद सल्लाहुदीन है, का अगला चेहरा भी बनाने की तैयारी थी।

    सैयद सल्लाहुद्दीन अब बूढ़ा हो चुका है और वह पहले की तरह से आतंकी कैंपोें के संचालन में सक्रिय नहीं है, वह सिर्फ अब बैठकों और नए कैडर के लिए भाषणवाजी तक सीमित है। उसके बाद हमजा बुरहान ही एक ऐसा नया चेहरा था,जिसे लेकर सभी पुराने आतंकी कमांडर राजी थे।

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