Denmark से बंगाल को मिला हाथी ट्रैंक्विलाइजर का नया हथियार, झारखंड में गजराज प्रबंधन को भी मिलेगा सहारा
Elephant tranquilizer gun: पश्चिम बंगाल को डेनमार्क से हाथियों को शांत करने के लिए एक नया उपकरण मिला है। यह ट्रैंक्विलाइजर बंदूक बंगाल और झारखंड दोनों राज्यों में हाथी प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। झारखंड, जो अक्सर हाथी-मानव संघर्ष से जूझता है, इस तकनीक का उपयोग हाथियों को नियंत्रित करने और मानव बस्तियों में उनके प्रवेश को रोकने में कर सकेगा।

जागरण संवाददाता, धनबाद/दुर्गापुर। Denmark tranquilizer gun हाथियों को सुरक्षित रूप से नियंत्रित करने के लिए वन विभाग लंबे समय से ट्रैंक्विलाइजर गन का उपयोग करता आ रहा है, लेकिन अब तक इस्तेमाल होने वाली गन भारी होने के कारण अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए चुनौती बन जाती थी।
इस समस्या को दूर करने के लिए डेनमार्क से पांच अत्याधुनिक, हल्की और अधिक प्रभावी ट्रैंक्विलाइजर गन लाई गई हैं। इनमें से एक गन पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के बेलियातोर रेंज में पहुंचाई गई है, जिसे हाथी प्रभावित क्षेत्र माना जाता है।
नई गन के उपयोग और प्रशिक्षण के उद्देश्य से बेलियातोर के सबसे संवेदनशील इलाके में वन विभाग की ओर से एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इस प्रशिक्षण में अधिकारियों को बताया गया कि बेहोशी देने वाली गोली को ‘डार्ट’ कहा जाता है, जिसे पहले चेंबर में भरकर हाथ से निशाना साधकर चलाना पड़ता था।
इस प्रक्रिया में हाथ कांपने पर लक्ष्य से चूकने की आशंका रहती थी। लेकिन गैस-चालित डेनमार्क निर्मित नई ट्रैंक्विलाइजर गन हल्की होने के साथ अधिक दूरी तक सटीक निशाना साधने में सक्षम है। कार्यशाला के दौरान जंगल के भीतर ‘बुल्स-आई’ बनाकर अधिकारियों ने लक्ष्य साधने का अभ्यास किया।
इस मौके पर केंद्रीय चक्र के मुख्य वनपाल पी. राज और वन अधिकारी शेख फरीद ने गन का लाइव डेमो प्रस्तुत किया। प्रशिक्षण कार्यशाला साउथ वेस्टर्न सर्कल (पुरुलिया), साउथ ईस्टर्न सर्कल (बीरभूम), बर्द्धमान जिला और बांकुड़ा केंद्रीय चक्र की संयुक्त पहल पर आयोजित की गई, जिसमें वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
विशेषज्ञों ने बताया कि किस जानवर के लिए कौन-सी दवा उपयुक्त है, उसके लिए कितनी मात्रा इस्तेमाल होनी चाहिए और ट्रैंक्विलाइजर के बाद संभावित दुष्प्रभाव क्या हो सकते हैं-इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के बाद अधिकारियों को जंगल में व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया।
पड़ोसी राज्य झारखंड के लिए भी यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। झारखंड में हाथी समस्या लंबे समय से गंभीर बनी हुई है। आए दिन हाथी जंगल छोड़कर रिहायशी इलाकों में दाखिल हो जाते हैं, जिससे जान-माल का नुकसान होता है।
कई बार हाथियों को नियंत्रित करने के लिए झारखंड वन विभाग को बांकुड़ा के विशेषज्ञ कर्मचारियों, विशेषकर मशालची दस्ता, की सहायता लेनी पड़ती है। बांकुड़ा के ये कर्मचारी हाथी नियंत्रण में माहिर माने जाते हैं। ऐसे में अत्याधुनिक ट्रैंक्विलाइजर गन का वहां उपलब्ध होना झारखंड के लिए भी राहत की उम्मीद जगाता है।

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।