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DVC ने मैथन और पंचेत डैम के फाटक खोले, पश्चिम बंगाल में बाढ़ का अलर्ट

Published: Fri, 04 Sep 2026 10:16 AM (IST)

Damodar Valley Corporation: भारी बारिश के कारण डीवीसी ने मैथन और पंचेत बांधों से पानी छोड़ा, जिससे पश्चिम बंगाल में बाढ़ की चेतावनी जारी की गई है।

HighLights

  1. डीवीसी ने मैथन और पंचेत डैम से पानी छोड़ा।

  2. पश्चिम बंगाल के कई जिलों में बाढ़ की चेतावनी जारी।

  3. डीवीसी जलस्तर और पानी के बहाव पर रख रहा नजर।

संवाद सूत्र, मैथन (धनबाद)। भारी बारिश के कारण दामोदर घाटी निगम (DVC) के मैथन और पंचेत डैम के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई है। स्थिति नियंत्रित करने के लिए मैथन डैम से करीब 48 हजार और पंचेत डैम से करीब 50 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसके मद्देनजर पश्चिम बंगाल में बाढ़ की चेतावनी जारी की गई। 

झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा पर धनबाद जिले में मैथन और पंचेत बांध हैं। यहां से पानी छोड़े जाने पर पश्चिम बंगाल में जाता है। भारी बारिश के बीच मैथन और पंचेत जलाशयों से पानी छोड़ा जा रहा है। पानी छोड़े जाने के बाद पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, पश्चिम बर्द्धमान, बांकुड़ा, हुगली और हावड़ा जिलों में बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया है।

डीवीसी ने पश्चिम बंगाल और जिला प्रशासन को नदी किनारे के इलाकों में एहतियाती कदम उठाने को कहा है। अधिकारियों के अनुसार, झारखंड के तेनुघाट डैम से बढ़े जलप्रवाह और भारी बारिश के कारण जलाशयों पर दबाव बढ़ा। बारिश और जलप्रवाह की स्थिति के आधार पर पानी छोड़ने की मात्रा की समीक्षा की जाएगी।

डीवीसी से मिली जानकारी के अनुसार गुरुवार को मैथन डैम का जलस्तर 488 फीट और पंचेत डैम का 416 फीट दर्ज किया गया। पंचेत डैम में बुधवार को करीब 85 हजार क्यूसेक पानी का इनफ्लो था, जो गुरुवार को घटकर लगभग 75 हजार क्यूसेक रह गया।

मैथन डैम के छह गेट व चार गैलरी खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है। इस नजारे को देखने के लिए पर्यटक आने लगे हैं। तेनुघाट डैम से पानी छोड़े जाने के कारण पंचेत में पानी की आवक पर भी असर पड़ा है। दोनों डैमों के जलस्तर, इनफ्लो और आउटफ्लो पर डीवीसी तथा केंद्रीय जल आयोग के अधिकारी लगातार नजर बनाए हुए हैं।

कैचमेंट एरिया में भारी बारिश के बावजूद गाइड कर्व के अनुसार जलाशयों का संचालन किए जाने से फिलहाल निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है। डीवीसी अधिकारियों के अनुसार जलाशयों की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। पानी की आवक और जलस्तर में बदलाव के आधार पर आगे पानी छोड़ने का निर्णय लिया जाएगा।