'राम कहलाने की चाह, लेकिन भूमिका धृतराष्ट्र की', सांसद मनीष जायसवाल पर विधायक प्रदीप प्रसाद का तीखा हमला
हजारीबाग में क्रिकेट विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है, जहां विधायक प्रदीप प्रसाद ने सांसद मनीष जायसवाल पर तीखा हमला बोला है। ...और पढ़ें

हजारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद। (जागरण)
HighLights
विधायक प्रदीप प्रसाद ने सांसद मनीष जायसवाल पर तीखा हमला।
क्रिकेट विवाद में सांसद की भूमिका को 'धृतराष्ट्र' बताया।
एचडीसीए की कार्यशैली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए।
संवाद सहयोगी, हजारीबाग। हजारीबाग में क्रिकेट विवाद अब पूरी तरह राजनीतिक रंग लेता दिख रहा है। गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में हजारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद ने सांसद मनीष जायसवाल पर इशारों-इशारों में तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 'धृतराष्ट्र की भूमिका निभाने वाला' बताया।
विधायक ने कहा कि कुछ लोग स्वयं को राम कहलाना चाहते हैं, लेकिन उनकी भूमिका धृतराष्ट्र जैसी दिखाई देती है। उन्होंने साफ कहा कि हजारीबाग के विकास, खिलाड़ियों के सम्मान और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए यदि उन्हें उदंड कहा जाता है, तो वे एक नहीं बल्कि हजार बार भी ऐसी उदंडता करने को तैयार हैं।
प्रेस वार्ता के दौरान विधायक प्रदीप प्रसाद ने हजारीबाग जिला क्रिकेट एसोसिएशन (एचडीसीए) की कार्यशैली, सदस्यता प्रक्रिया, खिलाड़ियों की उपेक्षा और स्टेडियम संचालन को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि जनता की आवाज उठाना, आत्मसम्मान की रक्षा करना और खेल व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग करना कोई अपराध नहीं है।
नाम का किया गया इस्तेमाल
विधायक ने कहा कि पूरे विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब टाटा स्टील के साथ आयोजित दोस्ताना क्रिकेट मैच में बिना उनकी जानकारी और सहमति के उनके नाम का इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब उनके नाम का उपयोग किया गया तो उन्हें इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई और इसके पीछे की मंशा क्या थी। उनका कहना था कि उन्होंने केवल इतना पूछा कि किसी जनप्रतिनिधि के नाम का उपयोग बिना अनुमति कैसे किया जा सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस विषय पर सवाल उठाया तो उनके विरोध को अनैतिक और उद्दंड करार दिया गया। विधायक ने कहा कि अपने आत्मसम्मान की रक्षा के प्रयास को जानबूझकर गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।
उन्होंने दावा किया कि विरोध दर्ज कराने के बाद एचडीसीए के सचिव, कार्यकारी अध्यक्ष और कार्यकारिणी सदस्य स्वयं उनके पास आए और अपनी गलती स्वीकार की, लेकिन उसके तुरंत बाद सांसद द्वारा प्रेस वार्ता किया जाना कई सवाल खड़े करता है।
प्रदीप प्रसाद ने कहा कि उनका विरोध केवल एचडीसीए सचिव की कार्यशैली को लेकर था, लेकिन सांसद स्वयं बचाव में उतर आए। उन्होंने कहा कि चेयरपर्सन होने का हवाला देकर जिस तरह से बचाव किया गया, उससे यह स्पष्ट होता है कि संगठन पर कुछ चुनिंदा लोगों का प्रभाव हावी है।
खबरें और भी
विधायक ने यह भी कहा कि एचडीसीए सचिव द्वारा उन्हें सूचना देने का दावा पूरी तरह भ्रामक है, क्योंकि उन्हें संबंधित वॉट्सएप समूह में तक शामिल नहीं किया गया था।
किसी की निजी जागीर नहीं है हजारीबाग क्रिकेट एसोसिएशन
उन्होंने कहा कि हजारीबाग क्रिकेट एसोसिएशन किसी की निजी जागीर नहीं हो सकती और स्टेडियम किसी व्यक्ति विशेष की संपत्ति नहीं, बल्कि हजारीबाग की जनता की धरोहर है।
एचडीसीए की सदस्यता प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विधायक ने कहा कि वर्ष 1968 से संगठन अस्तित्व में है, लेकिन सदस्य संख्या आज भी लगभग 102 तक सीमित है। स्टेडियम के नामकरण को लेकर भी विधायक ने नाराजगी जताई।
उन्होंने कहा कि हजारीबाग क्रिकेट को खड़ा करने में स्वर्गीय विभूति सिंह और बाजू दा जैसे लोगों का अतुलनीय योगदान रहा है। संघर्ष के दिनों में ऐसे लोगों ने अपने स्कूटर पर मैट ढोकर क्रिकेट को जीवित रखा, लेकिन आज उनके योगदान को भुला दिया गया।
प्रेस वार्ता के दौरान विधायक ने कहा कि यदि उनमें खेल भावना की कमी होती तो वे किसी भी हाल में मैच का आयोजन नहीं होने देते। उन्होंने कहा कि वे कल भी लक्ष्मण थे, आज भी लक्ष्मण हैं और आगे भी रहेंगे।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।