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    झारखंड के ट्रेजरी घोटाले में बड़ा खुलासा, आरोपी सौरभ सिंह के पास मिली डेढ़ करोड़ की FD

    Updated: Tue, 14 Apr 2026 09:40 AM (IST)

    हजारीबाग के 28 करोड़ रुपये के कोषागार घोटाले की जांच में नए खुलासे हुए हैं। आरोपी सौरभ सिंह के पास डेढ़ करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट मिली है, जिसकी ...और पढ़ें

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    झारखंड ट्रेजडी घोटाला। फाइल फोटो

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    संवाद सहयोगी, हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले में चर्चित 28 करोड़ रुपये के कोषागार घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं।

    ताजा जांच में आरोपित एक भाई सौरभ सिंह के पास करीब डेढ़ करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) मिलने से पूरे मामले में हड़कंप मच गया है।

    जांच एजेंसियां अब इस रकम के स्रोत और उससे जुड़े मनी ट्रेल की गहराई से जांच कर रही हैं, ताकि घोटाले के पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

    सूत्रों के अनुसार, जांच टीम बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और संदिग्ध निवेशों की पड़ताल कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घोटाले की रकम किन माध्यमों से इधर-उधर की गई और किन-किन लोगों तक पहुंची।

    सौरभ सिंह के नाम पर मिली एफडी को इस घोटाले की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है, जिससे कई और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

    संपत्ति को किया जाएगा सीज

    इधर, मामले के मुख्य आरोपी शंभू कुमार (पिता स्व. नंदकिशोर चौधरी) और अमीर बानो (पति सैयद बाकर मेहदी) को खास महल पदाधिकारी द्वारा जारी नोटिस का अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।

    प्रशासन ने दोनों को 15 अप्रैल तक अंतिम अवसर दिया है। तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में प्रशासन सख्त कदम उठाने की तैयारी में है।

    प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि दोनों आरोपियों की ओर से जवाब नहीं आता है, तो संबंधित संपत्तियों को सीज किया जा सकता है। इसके तहत मकान के चारों ओर चाहरदीवारी बनाकर उसे प्रशासनिक नियंत्रण में लेने की कार्रवाई की जाएगी।

    इससे साफ है कि प्रशासन अब इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है। जांच के दौरान शंभू कुमार की संपत्ति को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    शक की सुई गहराई

    जानकारी के मुताबिक, सदर प्रखंड के सारले स्थित भवानी चौक पर लगभग 15 लाख रुपये में जमीन खरीदकर बिना विधिवत लीज हस्तांतरण के चार मंजिला इमारत खड़ी कर दी गई। इतनी कम कीमत में जमीन की खरीद और उस पर बहुमंजिला भवन का निर्माण संदेह को और गहरा कर रहा है।

    स्थानीय लोगों और जानकारों का मानना है कि इस मामले में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं, जिसकी परतें अब धीरे-धीरे खुल रही हैं। जांच एजेंसियां अब हर पहलू को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई कर रही हैं, ताकि किसी भी दोषी को बख्शा न जाए।

    सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में जांच और तेज की जाएगी तथा इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भी पहचान हो सकती है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई तय है।

    इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट हो गया है कि कोषागार घोटाला केवल सीमित लोगों तक ही नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसका खुलासा जल्द ही हो सकता है।

     

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