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    चक्रधरपुर मंडल में ट्रेनों की 'रफ़्तार' पर ब्रेक: 8 घंटे तक लेट रहीं ट्रेनें, भीषण गर्मी के बीच स्टेशनों पर फंसे यात्री

    Updated: Mon, 20 Apr 2026 11:17 PM (IST)

    चक्रधरपुर रेल मंडल में ट्रेनों की लेटलतीफी से यात्री परेशान हैं। टाटानगर स्टेशन पर कई ट्रेनें घंटों देरी से पहुंचीं, जिससे यात्रियों को गर्मी में भारी ...और पढ़ें

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    प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। चक्रधरपुर रेल मंडल से होकर गुजरने वाली ट्रेनों की लेटलतीफी थमने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार को टाटानगर स्टेशन से होकर गुजरने वाली लगभग सभी प्रमुख ट्रेनें अपने निर्धारित समय से घंटों विलंब से चलीं। 
     
    इस अव्यवस्था और भीषण गर्मी के कारण यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सबसे बुरा हाल लंबी दूरी की ट्रेनों का रहा, जो 3 से 8 घंटे की देरी से पहुंचीं।
     

    सांतरागाछी-आनंद विहार 8 घंटे लेट 

    सोमवार को सबसे अधिक प्रभावित ट्रेन नंबर 22857 सांतरागाछी-आनंद विहार टर्मिनल रही, जो अपने निर्धारित समय से 8 घंटे की देरी से टाटानगर पहुंची। दोपहर 01:15 बजे पहुंचने वाली यह ट्रेन रात 09:16 बजे स्टेशन पहुंची। 
     
    इसी तरह जन शताब्दी एक्सप्रेस भी यात्रियों के सब्र की परीक्षा लेती रही और 5 घंटे 35 मिनट विलंब से चली। लेवल क्रॉसिंग, ट्रैक मरम्मत और अन्य तकनीकी कारणों से प्रभावित प्रमुख ट्रेनों की सूची इस प्रकार है:
    •     08611 सांतरागाछी-अजमेर स्पेशल: 6 घंटे 13 मिनट लेट।
    •     18478 कलिंग उत्कल एक्सप्रेस: 4 घंटे 10 मिनट की देरी।
    •     12129 आजाद हिंद एक्सप्रेस: 3 घंटे 50 मिनट विलंब।
    •     22905 ओखा-शालीमार साप्ताहिक सुपरफास्ट: 3 घंटे 38 मिनट लेट।
    •     12809 मुंबई मेल: 2 घंटे 56 मिनट की देरी।
    •     18110 इतवारी-टाटानगर एक्सप्रेस: 2 घंटे 42 मिनट लेट। 
    इनके अलावा स्टील एक्सप्रेस, वंदे भारत, ज्ञानेश्वरी और क्रिया योग एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें भी 20 मिनट से लेकर डेढ़ घंटे तक विलंब से चलीं।
     

    स्टेशनों पर यात्री बेहाल 

    ट्रेनों के समय पर न चलने के कारण टाटानगर स्टेशन के वेटिंग हॉल और प्लेटफॉर्मों पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भीषण गर्मी और उमस के बीच घंटों इंतजार करने के कारण बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक परेशान दिखे। यात्रियों का कहना है कि ट्रेनों के समय को लेकर स्पष्ट जानकारी न मिलने से उनकी आगे की यात्रा की प्लानिंग भी चौपट हो गई है।