मशीन खराब होने से पहले ही मिलेगा अलर्ट! टाटा स्टील और गूगल का 'डिजिटल दिमाग' ऐसे बदल रहा है काम का अंदाज
टाटा स्टील ने गूगल क्लाउड के साथ मिलकर 'यूनिफाइड एजेंटिक एआई' तकनीक लागू की है, जो एआई को इंसानों की तरह सोचने और निर्णय लेने में सक्षम बनाती है। Jhar ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
साधारण एआई और एजेंटिक एआई में क्या है अंतर?
जहां साधारण एआई आपको केवल जानकारी देता है, वहीं एजेंटिकएआई एक आभासी कर्मचारी (VirtualEmployee) की तरह कार्य करता है। इसे केवल एक लक्ष्य दिया जाता है और यह उस तक पहुंचने का रास्ता खुद तलाशता है। टाटा स्टील ने गूगल क्लाउड की मदद से ऐसे 300 से अधिक एआई एजेंट तैनात किए हैं।
इन एजेंट्स को मैनेज करने के लिए दो प्रमुख प्लेटफॉर्म बनाए गए हैं:
- जेन एआई (GenAI): जो डाटा का विश्लेषण करता है।
- टाटा स्टील डिजिटल असिस्टेंट (TDA): जो कर्मचारियों की दैनिक समस्याओं को हल करता है।
इंसानों की तरह देख, सुन और पढ़ सकता है यह सिस्टम
करोड़ों की बचत और 'जीरो' सर्वर खर्च
कारखानों में सुरक्षा और मशीनों की सेहत पर नजर
टाटा स्टील के लिए सुरक्षा सर्वोपरि है। इसके लिए दो विशेष एजेंट तैनात हैं:
- सेफ्टी आई-क्यू (Safety i-Q): यह कैमरों की लाइव फीड देखता है। अगर कोई मजदूर असुरक्षित क्षेत्र में जाता है या सुरक्षा नियमों (SOP) का उल्लंघन करता है, तो यह तुरंत अलर्ट भेजकर हादसा टाल देता है।
- एसेट स्फीयर (Asset Sphere): यह एजेंट मशीनों की नब्ज पहचानता है। मशीन खराब होने से बहुत पहले ही यह उसकी मरम्मत की सलाह दे देता है, जिससे उत्पादन नहीं रुकता और करोड़ों का नुकसान बच जाता है।
ग्राहक सेवा और बैक ऑफिस में रफ्तार
बैक ऑफिस के उबाऊ काम जैसे जीएसटी (GST) का हिसाब रखना, लंबे कॉन्ट्रैक्टपढ़ना और इनवॉइस पास करना अब ये एआई एजेंट सेकंडों में कर देते हैं। ग्राहकों की समस्याओं को सुलझाने के समय में 50 प्रतिशत की कमी आई है, क्योंकि एआई अब शिकायतों के साथ भेजी गई तस्वीरों को देखकर खुद ही समस्या की पहचान कर लेता है।
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