बंगाल चुनाव 2026 से पहले पूर्व मेदिनीपुर में 1.27 करोड़ रुपये नकद जब्त, दो वाहनों से मिली राशि
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले पूर्व मेदिनीपुर में नाका चेकिंग के दौरान 1 करोड़ 27 लाख रुपये नकद जब्त किए गए। यह राशि दो वाहनों से मिली। ...और पढ़ें

बंगाल पुलिस कर रही है मामले की जांच। (फोटो : जागरण)
जागरण संवाददाता, खड़गपुर/जमशेदपुर। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान से महज कुछ दिन पहले पूर्व मेदिनीपुर जिले में पुलिस की नाका चेकिंग के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की गई है।
कुल 1 करोड़ 27 लाख रुपये की राशि दो अलग-अलग वाहनों से जब्त की गई, जिससे चुनावी खर्च और संभावित वोटर प्रभावित करने की कोशिशों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, रविवार को जिले में स्थापित नाके पर दो वाहनों की तलाशी ली गई। एक कार से 1 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए, जबकि एक बस से 23 लाख रुपये मिले।
कार से बरामद राशि को तमलुक घाटाल कोऑपरेटिव बैंक से संबंधित बताया जा रहा है। पुलिस अब इसकी सत्यता की जांच कर रही है कि क्या यह बैंक की आधिकारिक राशि है या फिर चुनावी उद्देश्य से ले जाई जा रही थी।
जांच में जुटी पुलिस, संदिग्ध परिस्थितियां
पुलिस ने दोनों वाहनों को रोका और सवारों से पूछताछ शुरू कर दी है। बस से बरामद 23 लाख रुपये पर भी गहन जांच चल रही है।
अभी तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अधिकारियों ने कहा कि पूरे मामले की गहन छानबीन की जा रही है।
यह घटना इसलिए ज्यादा संदिग्ध मानी जा रही है क्योंकि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का पहला चरण 23 अप्रैल को है।
चुनाव आयोग पहले ही राज्य में नकदी, शराब, ड्रग्स और अन्य प्रलोभनों की जब्ती को लेकर सतर्क है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव से पहले पूरे बंगाल में सैकड़ों करोड़ रुपये की नकदी और अन्य सामग्री जब्त की जा चुकी है।
चुनावी माहौल में सख्ती
चुनाव आयोग की फ्लाइंग स्क्वॉड और स्टैटिक सर्विलांस टीमों ने राज्य में मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के सख्त पालन के लिए अभियान तेज कर रखा है।
ऐसे में नाका चेकिंग के दौरान इतनी बड़ी नकदी की बरामदगी सामान्य बैंक ट्रांजेक्शन नहीं लग रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह राशि मतदाताओं को प्रभावित करने या चुनावी खर्च के लिए इस्तेमाल होने वाली हो सकती है।
पुलिस ने बरामद नकदी को सुरक्षित रख लिया है और संबंधित बैंक अधिकारियों से भी संपर्क किया जा रहा है।
आगे की जांच में यदि बैंक से जुड़ाव साबित होता है तो मामला अलग दिशा ले सकता है, वरना यह चुनावी अनियमितता का स्पष्ट मामला माना जाएगा।
इस खबर पर पुलिस और चुनाव आयोग की ओर से अभी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। यह घटना चुनावी राजनीति में नकदी के प्रभाव को एक बार फिर उजागर करती है।
क्या यह सिर्फ बैंक का सामान्य ट्रांसफर था या चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश? जांच का इंतजार है।
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