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    गांव-गांव चूड़ियां बेचने वाली नुरैशा खातून बनी उद्यमी, आज हर महीने कमा रहीं 40-50 हजार रुपये

    Updated: Wed, 06 May 2026 04:13 PM (IST)

    नूरैशा खातून, जो पहले गांव-गांव चूड़ियां बेचती थीं, अब पलामू की एक सफल उद्यमी बन गई हैं। सखी मंडल से जुड़कर और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर, उन्होंने अ ...और पढ़ें

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    अपने दुकान पर चूड़ी बेचती नूरैशा

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    संक्षेप में पढ़ें

    राजीव रंजन, नीलांबर-पीतांबरपुर (पलामू)। कभी सिर पर टोकरी रखकर गांव-गांव और घर-घर जाकर महिलाओं को चूड़ी पहनाकर गुजर-बसर करने वाली प्रखंड की नूरैशा खातून आज एक सफल उद्यमी बन चुकी हैं। मेहनत, लगन और सरकारी योजनाओं के सही उपयोग से उन्होंने अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी है।

    अब वे न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं। नूरैशा पहले दिनभर गांवों में घूमकर चूड़ी बेचती थीं। मेहनत के बावजूद आमदनी सीमित रहती थी, जिससे परिवार का खर्च चलाना मुश्किल होता था। आर्थिक तंगी के बीच भी उन्होंने हार नहीं मानी और आगे बढ़ने का रास्ता तलाशती रहीं।

    सखी मंडल से जुड़ने के बाद बदली जिंदगी

    उनकी जिंदगी में बदलाव तब आया, जब वे झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) के तहत संचालित चमेली सखी मंडल से जुड़ीं। सखी मंडल से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक सहयोग के साथ-साथ व्यवसाय शुरू करने का प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिला।

    इसी सहयोग के बल पर नूरैशा ने अपनी खुद की चूड़ी की दुकान शुरू की। धीरे-धीरे उनकी दुकान इलाके में पहचान बनाने लगी और ग्राहक खुद उनके पास आने लगे। आज उनकी दुकान अच्छी तरह स्थापित हो चुकी है। नूरैशा बताती हैं कि पहले जहां दिनभर की मेहनत के बाद मामूली आमदनी होती थी, वहीं अब वे हर माह 40 से 50 हजार रुपये तक कमा रही हैं।

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    इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी बेहतर हो रही है। उनके पति भी इस कार्य में हाथ बंटाते हैं। आज नूरैशा की सफलता आसपास की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। वे अन्य महिलाओं को भी सखी मंडल से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं, ताकि वे भी आत्मनिर्भर बन सकें।

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    जेएसएलपीएस के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का काम किया जा रहा है। सही मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग मिलने पर महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो सकती हैं। नूरैशा खातून इसका बेहतरीन उदाहरण हैं।

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    अनीता सी केरकेट्टा, डीपीएम, जेएसएलपीएस, पलामू