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झारखंड में थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी स्टॉक सीमा तय, त्योहारी सीजन में बढ़ सकती है मिठाइयों की कीमत

Updated: Sun, 23 Aug 2026 09:50 PM (GMT+05:30)

झारखंड में थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी स्टॉक की सीमा 15 दिन की खपत तक तय की गई है, जो 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगी। इस आदेश से मिठाई की कीमतें 20-25% बढ़ने की आशंका है, जिससे त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को परेशानी हो सकती है।

त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को परेशानी हो सकती है।

त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को परेशानी हो सकती है।

राज्य ब्यूरो, रांची। भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की ओर से विगत 20 अगस्त को जारी आधिकारिक आदेश के बाद झारखंड के खाद्य आपूर्ति विभाग ने भी इससे संबंधित आदेश सभी जिलों के उपायुक्तों को भेज दिया है। पहली बार यह आदेश थोक विक्रेताओं की स्टाक क्षमता पर नहीं, बल्कि बल्क कंज्यूमर्स पर लागू की गई है।

जारी निर्देश के अनुसार, ऐसे उपभोक्ता जो हर महीने औसतन 10 मीट्रिक टन या उससे अधिक चीनी की खपत करते हैं (मिठाई निर्माता, फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री, साफ्ट ड्रिंक निर्माता आदि) को अधिकतम 15 दिनों की खपत के बराबर ही चीनी का स्टाक रखने का निर्देश दिया गया है। यह आदेश एक सितंबर से लेकर 30 नवंबर तक की तिथि तक लागू रहेगा।

त्योहारी मौसम में मिठास का संकट

झारखंड में त्योहारी मौसम संकटों के साथ आया है। सावन को लेकर जहां एक ओर लोगों में व्यापक उत्साह है वहीं दूसरी ओर मिठाई बनाने को लेकर चीनी का संकट छोटे-बड़े उपभोक्ताओं को व्यापक तौर पर प्रभावित कर रहा है।

चीनी संकट के कारण मिठाइयों की कीमत 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है। झारखंड में सावन के कारण बड़े पैमाने पर लोग मिठाइयों, खासकर पेड़ा और अन्य सूखे मेवे की मिठाइयां इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए चीनी की बढ़ी हुई कीमतों के कारण उपभोक्ताओं को परेशानी भी हो रही है।

केंद्र सरकार से निर्देश प्राप्त होने के बाद राज्य सरकार ने भी अपने स्तर से व्यवसायियों के लिए निर्देश जारी कर दिया है। पहली बार यह निर्देश थोक व्यापारियों से इतर थोक उपभोक्ताओं के लिए लाया गया है। इसका असर व्यापारियों पर पड़ना शुरू हो गया है और इससे उपभोक्ताओं की परेशानियों में इजाफा होता दिख रहा है।

झारखंड समेत पूरे देश में चीनी की कीमतें बढ़ने के मुख्य कारण कम घरेलू उत्पादन, मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान, त्योहारी मांग में तेजी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई की कमी है। जहां तक चीनी का सवाल है खुदरा बाजार में दाम बढ़कर 55 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी है।

बताते हैं कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख राज्यों में बारिश की कमी और फसल रोगों के कारण गन्ने का उत्पादन कम हुआ है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की सप्लाई कम होने से कीमतें बढ़ी है।

आपूर्ति में कमी की आशंका से बाजार में जमाखोरी बढ़ी है। अब कई लोग चीनी की बढ़ी हुई कीमतों को इथेनाल के निर्माण से जोड़कर देख रहे हैं जिसका खंडन स्वय सरकार कर चुकी है। इसके बावजूद चीनी की कीमतें नियंत्रित नहीं हो पा रही हैं।

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