Trending

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    अब धान के बाद खाली नहीं रहेंगे खेत! झारखंड के 22 जिलों में 'पल्स मिशन', अरहर-उड़द और मसूर पर सरकार देगी नकद राशि

    Updated: Wed, 27 May 2026 10:30 PM (IST)

    झारखंड सरकार ने दलहन आत्मनिर्भरता मिशन शुरू किया है, जिसके तहत किसानों को दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इस पांच वर्षीय मिशन का ...और पढ़ें

    preferred source google
    News Article Hero Image

    झारखंड में दलहन उत्पादन को बढ़ावा, किसानों को मिलेगी प्रोत्साहन राशि और प्रशिक्षण।

    HighLights

    1. किसानों को दलहन उत्पादन पर मिलेगी प्रोत्साहन राशि।

    2. पांच वर्षीय मिशन का लक्ष्य उत्पादकता और आय बढ़ाना।

    3. परती भूमि का उपयोग कर दलहन खेती को बढ़ावा।

    मनोज सिंह, रांची। दलहन आत्मनिर्भरता मिशन (अरहर, उड़द और मसूर) को लेकर कृषि विभाग ने कार्य शुरू कर दिया है। पांच साल तक चलने वाले इस मिशन का उद्देश्य दलहन उत्पादन, उत्पादकता और किसानों की आय को बढ़ाना है।

    राज्य के कई जिलों को इस योजना में शामिल किया गया है। पल्स मिशन के तहत क्लस्टर-आधारित कार्य किया जाएगा, जिसमें कम से कम 10 हेक्टेयर के क्लस्टर बनाए जाएंगे। झारखंड के चिह्नित जिलों में अरहर, उड़द, मसूर, चना और अन्य दलहनों के उत्पादन पर जोर दिया जाएगा। सरकार की ओर से दलहन बीज उत्पादक किसानों को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

    अरहर के लिए 4.5 हजार प्रति क्विंटल, उड़द और मसूर के लिए तीन हजार प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि दी जानी है। यहां से मिले प्रमाणित बीजों को किसानों को दिया जाएगा, ताकि उत्पादन क्षेत्र को बढ़ाया जा सके। राज्य में लगभग 12 लाख हेक्टेयर तक दलहन की खेती किए जाने की संभावना है।

    झारखंड के इन जिलों में होगा मिशन का क्रियान्वयन

    झारखंड में 22 जिलों को दलहन उत्पादन के लिए चिह्नित किया गया है।

    • अरहर: बोकारो, चतरा, देवघर, धनबाद, गिरिडीह, गुमला, हजारीबाग, जामताड़ा, रांची, साहिबगंज, पलामू, गढ़वा।
    • उड़द : गोड्डा, लोहरदगा, बोकारो, चतरा, देवघर, धनबाद, दुमका, रांची, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला, लातेहार।
    • मसूर: बोकारो, देवघर, दुमका, गढ़वा, गोड्डा, गुमला, कोडरमा, सिमडेगा, साहिबगंज, रांची।
    • चना : सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा, चतरा, गुमला, लातेहार, लोहरदगा।
    • अन्य दलहन: रांची, लातेहार, गुमला, खूंटी, रामगढ़, देवघर, कोडरमा, गिरिडीह।

    आठ लाख टन होता है दलहन का उत्पादन

    राज्य में अभी आठ लाख टन दलहन का उत्पादन होता है, जिसमें दो लाख टन अरहर और दो लाख टन चना का उत्पादन होता है। चार लाख टन में उरद, मूंग, मटर सहित अन्य दलहन का उत्पादन होता है।

    राज्य में दलहन की उत्पादकता विश्व में सबसे ज्यादा है। यहां 1069 किलो प्रति हेक्टेयर उत्पादन होता है। जबकि राष्ट्रीय औसत 881 किलो प्रति हेक्टेयर उत्पादन है। अगले चार वर्षों तक अरहर, उड़द और मसूर की प्रतिशत खरीद सरकार करेगी।

    खबरें और भी

    5.7 लाख हेक्टेयर परती खेत में होगा उत्पादन

    झारखंड में 5.75 लाख हेक्टेयर परती भूमि का उपयोग दलहन उत्पादन के लिए किया जाएगा। रबी सीजन में उड़द, मसूर और चना आसानी से उगाए जा सकते हैं। अरहर की खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य के 12 से अधिक जिलों को कवर किया गया है।

    राज्य में धान की खेती के बाद किसान अपने खेत को परती छोड़ देते हैं, लेकिन इस मिशन के तहत उन खेतों में दलहन की फसल लगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दलहन के खेती के लिए किसानों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    इस में छोटे एवं सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी। एक किसान अधिकतम पांच हेक्टेयर तक ही प्रोत्साहन राशि की सहायता ले सकता है जो किसानों के बैंक खाते में भेजे जाएंगे।

    राज्य में खेती की स्थिति

    राज्य लगभग 25 लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती की जाती है।

    • धान : लगभग 16–18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती
    • दलहन : लगभग आठ लाख हेक्टेयर (दोनों सीजन में)
    • तिलहन : लगभग 1.5–2 लाख हेक्टेयर
    • श्रीअन्न : लगभग एक लाख हेक्टेयर से कम क्षेत्र में खेती होती है, जिसमें रागी, कोदो, बाजरा आदि शामिल हैं।

    झारखंड देश में दलहन के उत्पादन में सातवां स्थान रखता है। यहां पर दलहन की उत्पादकता सबसे ज्यादा है। अच्छे और प्रमाणित बीज से राज्य में दलहन के उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है।
    -प्रदीप कुमार हजारी, पूर्व विशेष सचिव सह पूर्व सलाहकार, कृषि विभाग