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निपाह वायरस को लेकर झारखंड में अलर्ट: सदर और रिम्स में बने आइसोलेशन वार्ड, 42 बेड रिजर्व

Updated: Wed, 14 Jan 2026 10:42 AM (IST)

पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से मौत के बाद झारखंड सरकार हाई अलर्ट पर है। स्वास्थ्य मंत्री ने सभी सिविल ...और पढ़ें

निपाह वायरस को लेकर झारखंड में अलर्ट। सांकेतिक फोटो

निपाह वायरस को लेकर झारखंड में अलर्ट। सांकेतिक फोटो

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जागरण संवाददाता, रांची। पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से दो लोगों की मौत के बाद झारखंड सरकार हाई अलर्ट पर आ गई है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने झारखंड के सभी जिलों के सिविल सर्जनों को अलर्ट मोड में रहने का सख्त निर्देश दिया है, जिसके पश्चात रांची के सरकारी अस्पताल में निपाह वायरस के बचाव में मरीज के लिए आइसोलेशन वार्ड बना हुआ है।

रांची के सदर अस्पताल में 20 आइसोलेशन बेड बने हैं। साथ ही आइसोलेशन वार्ड में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन की सप्लाई सुविधा है। वहीं, रिम्स की पीआरओ सेल्विया ने बताया कि रिम्स  (राजेंद्र इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस) अस्पताल में लिए इस वायरस के बचाव के लिए आइसोलेशन वार्ड तैयार हैं। जिनमें 22 आइसोलेशन बेड हैं।

रांची सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने लोगों से अपील की हैं, कि घबराहट न पालें, बल्कि सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि वायरस खतरनाक है, लेकिन मजबूत इम्युनिटी और सावधानी से इसे रोका जा सकता है।

राज्य स्वास्थ्य विभाग ने सभी अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड तैयार कर लिए हैं, जहां ऑक्सीजन सप्लाई और विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात हैं। वहीं खान-पान ने सावधानी बरते हुए बाहरी खाना खाने से बचें।

फलों के सेवन से पहले अच्छी तरह से धोकर खाए। खास तौर पर यह वायरस फ्रूट बैट (चमगादड़) से फैलता हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग खजूर खाने के शौकीन होते हैं। इस समय खजूर खाने से परहेज करें।

निपाह वायरस के प्रमुख लक्षण

निपाह वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे हैं, लेकिन कुछ खास संकेत चिंता बढ़ाते हैं। तेज बुखार, असहनीय सिरदर्द (मस्तिष्क प्रभाव के कारण), मांसपेशियों में दर्द, सांस लेने में तकलीफ (ऑक्सीजन लेवल घटना), गले में खराश और खांसी प्रमुख हैं।

बाद में इंसेफ्लाइटिस (मस्तिष्क सूजन), ब्रेन अटैक या कोमा हो सकता है। सिविल सर्जन ने जोर दिया कि सिरदर्द और सांस की दिक्कत ज्यादा होने पर तुरंत जांच कराएं।

क्या हैं निपाह वायरस

प्रभात कुमार ने बताया कि वायरस फ्रूट बैट (चमगादड़) के यूरिन या लार से फलों पर लगकर फैलता है। सूअर, घोड़ा, कुत्ता, बिल्ली जैसे जानवरों से भी संक्रमण का खतरा। मानव से मानव में खांसी-छींक से फैलता है।

बचाव के लिए मास्क, दूरी, स्वच्छता जरूरी। ट्रीटमेंट स्पेसिफिक नहीं, बल्कि सपोर्टिव - कोविड जैसा आक्सीजन, एंसेफलाइटिस (मस्तिष्क की सूजन है, जो अक्सर वायरल संक्रमण ) केयर। आरटी-पीसीआर (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पोलिमरेज़ चेन रिएक्शन) से जांच। उन्होंने सलाह दी हैं, इम्युनिटी बढ़ाएं- पौष्टिक भोजन, घर का खाना।

एक्सपर्ट

रिम्स के माइक्रोबायोलाजिस्ट डॉ. मनोज ने बताया कि इस वायरस का इलाज सावधानी है। खास तौर पर अपने शरीर की इम्युनिटी मजबूत रखें। इस वायरस का संक्रमण साधारण वायरल संक्रमण की तरह है, इसके अधिक प्रभाव से निपाह का संक्रमण बढता है, खास तौर पर जंगली इलाके में रहने वाले लोग जानवरों से दूसरी बनाए कर रखें।

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