आरएसएस के राकेश लाल ने विजयदशमी पर स्वयंसेवकों को समाज सेवा के लिए किया प्रेरित
आरएसएस के क्षेत्र सामाजिक सदभाव संयोजक राकेश लाल ने विजयदशमी उत्सव पर कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष के बाद समाज जागरण का कार्य और तेज करना होगा।
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आरएसएस के राकेश लाल ने विजयदशमी पर स्वयंसेवकों को समाज सेवा के लिए किया प्रेरित । फोटो जागरण
HighLights
संघ के शताब्दी वर्ष के बाद समाज जागरण का कार्य तेज करें।
स्वयंसेवक निस्वार्थ भाव से समाज और देश की रक्षा करें।
सामूहिक शक्ति, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना मजबूत करें।
जागरण संवाददाता, रांची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के समापन के बाद अब समाज जागरण का कार्य और तेज करना होगा। संघ का काम पूरा नहीं हुआ है, बल्कि अब इसकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। समाज की रक्षा और देश के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए स्वयंसेवकों को निस्वार्थ भाव से लगातार कार्य करने की जरूरत है। यह बातें आरएसएस के क्षेत्र सामाजिक सदभाव संयोजक राकेश लाल ने विजयदशमी उत्सव के अवसर पर अपने संबोधन में कही।
कार्यक्रम का आयोजन रविवार को रांची के कांके रोड स्थित गांधीनगर में किया गया था। मौके पर महानगर संघचालक पवन मंत्री भी उपस्थित थे। इसके साथ ही रविवार को रांची महानगर में एचईसी सहित दर्जनों स्थानों पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। राकेश लाल ने कहा कि समाज में सामूहिक शक्ति, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना का भाव मजबूत करने की आवश्यकता है।
संघ की स्थापना 1925 में हुई थी। शताब्दी वर्ष के दौरान बस्तियों, मोहल्लों और नगरों में हिंदू सम्मेलन, सामाजिक सद्भाव कार्यक्रम, प्रमुख जन गोष्ठी और युवाओं के साथ संवाद आयोजित किए गए। अब संघ 101वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। इन कार्यक्रमों से मिले अनुभवों को आगे बढ़ाते हुए समाज में जागरण की निरंतरता बनाए रखनी होगी।
सामूहिक शक्ति से समाज मजबूत बनता है
राकेश लाल ने मां दुर्गा के स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि सामूहिक शक्ति से ही समाज मजबूत बनता है। मां दुर्गा विभिन्न देवताओं की शक्तियों के समन्वय का प्रतीक हैं। शक्ति का संचय जरूरी है, लेकिन उसका प्रयोग संयम और सही उद्देश्य के लिए होना चाहिए। संवाद के रास्ते खुले रखने और परिस्थितियों के अनुसार विवेकपूर्ण व्यवहार करने की भी आवश्यकता है।
उन्होंने समाज में फैलने वाली अफवाहों के प्रति सतर्क रहने की अपील की। कहा कि किसी भी सूचना पर बिना जांचे-परखे प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और प्रेस की विश्वसनीयता महत्वपूर्ण है। समाज को तथ्यों के आधार पर विषयों को समझना चाहिए और अराजकता फैलाने वाली गतिविधियों से सावधान रहना चाहिए।
संघ के पंच परिवर्तन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्यों के पालन और स्वदेशी जीवनशैली को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए समाज से नशामुक्त वातावरण बनाने का आह्वान किया।
