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रांची में स्वाइन फ्लू का अटैक: 3 बच्चे अस्पताल में भर्ती, 5 महीने का नवजात वेंटिलेटर पर

Updated: Fri, 28 Aug 2026 09:36 PM (IST)

रांची में स्वाइन फ्लू (H1N1) का संक्रमण छोटे बच्चों में गंभीर रूप ले रहा है, रानी अस्पताल में तीन बच्चे ...और पढ़ें

रांची में स्वाइन फ्लू का अटैक: 3 बच्चे अस्पताल में भर्ती, 5 महीने का नवजात वेंटिलेटर पर (AI Generated Image)

रांची में स्वाइन फ्लू का अटैक: 3 बच्चे अस्पताल में भर्ती, 5 महीने का नवजात वेंटिलेटर पर (AI Generated Image)

HighLights

  1. रानी अस्पताल में स्वाइन फ्लू से तीन बच्चे भर्ती।

  2. पांच माह का नवजात वेंटिलेटर पर, स्थिति गंभीर।

  3. रिम्स, सदर अस्पताल अलर्ट पर, स्वास्थ्य विभाग सतर्क।

जागरण संवाददाता, रांची। राजधानी में स्वाइन फ्लू (एच1एन1) संक्रमण अब छोटे बच्चों में भी गंभीर रूप लेता दिख रहा है। रानी अस्पताल में स्वाइन फ्लू से संक्रमित तीन बच्चों को भर्ती किया गया है। इनमें भागलपुर का पांच माह का नवजात शामिल है, जिसकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है।

वहीं, रांची के रहने वाले सात माह और आठ माह के दो अन्य बच्चों का भी अस्पताल में इलाज चल रहा है। फिलहाल दोनों की स्थिति नियंत्रित है। रानी अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि तीनों बच्चों को पहले निमोनिया की शिकायत थी।

उपचार के दौरान जांच में स्वाइन फ्लू संक्रमण की पुष्टि हुई, जिसके बाद उन्हें निगरानी में रखकर इलाज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों में संक्रमण के साथ निमोनिया होने पर स्थिति तेजी से गंभीर हो सकती है। ऐसे में लगातार चिकित्सकीय निगरानी जरूरी है।

ओपीडी में फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीज बढ़े:

अस्पताल में इस मौसम में स्वाइन फ्लू के मरीज लगातार पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार ओपीडी में आने वाले बड़ी संख्या में मरीजों में इंफ्लूएंजा जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। जिन मरीजों की जांच कराई जा रही है, उनमें करीब 80 प्रतिशत रिपोर्ट पाजिटिव मिलने की बात अस्पताल प्रबंधन की ओर से बताई गई है।

हालांकि, चिकित्सकों का कहना है कि हर फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीज की एच1एन1 जांच जरूरी नहीं होती। मरीज की उम्र, लक्षणों की गंभीरता, जोखिम और चिकित्सकीय स्थिति के आधार पर जांच की जरूरत तय की जाती है।

डॉ. राजेश के अनुसार शुरुआती लक्षणों में घबराने की जरूरत नहीं है। अधिकांश मरीजों में लक्षण के आधार पर उपचार किया जाता है। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक शुरू नहीं करनी चाहिए, क्योंकि एच1एन1 वायरल संक्रमण है और एंटीबायोटिक वायरस पर प्रभावी नहीं होती। बुखार और शरीर में दर्द जैसे लक्षणों में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पैरासिटामोल तथा पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ दिया जाता है।

रिम्स-सदर भी अलर्ट, इलाज की तैयारी पूरी:

स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए रिम्स और सदर अस्पताल को अलर्ट मोड पर रखा गया है। रिम्स में पहले ही संक्रमित मरीजों के लिए अलग व्यवस्था की जा चुकी है। कॉटेज के ग्राउंड फ्लोर को स्वाइन फ्लू मरीजों के लिए आरक्षित किया गया है।

इसके अलावा आइसोलेशन वार्ड में भी बेड उपलब्ध रखे गए हैं। फिलहाल वहां स्वाइन फ्लू का कोई मरीज भर्ती नहीं है। सदर अस्पताल में भी गंभीर मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक व्यवस्था रखने की तैयारी की गई है।

दूसरे राज्यों से लौटे मरीजों पर विशेष नजर:

स्वाइन फ्लू के मामलों की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने विशेषकर दूसरे राज्यों और शहरों से आने वाले मरीजों को लेकर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग ने सभी सिविल सर्जनों के साथ ऑनलाइन बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की।

बैठक में बताया गया कि संक्रमित पाए गए कई मरीज हाल में दूसरे राज्यों या शहरों की यात्रा कर झारखंड लौटे हैं। एक संक्रमित मरीज का निजी अस्पताल में भी इलाज चल रहा है। एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर कोविड काल के दौरान अपनाए जाने वाले आवश्यक सावधानी उपायों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

रांची के सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद ने बताया कि विभाग की ओर से अभी कोई अलग आधिकारिक एडवाइजरी जारी नहीं की गई है, लेकिन स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है और गंभीर मरीजों की जांच की जा रही है।

बच्चों में इन संकेतों को नजरअंदाज न करें:

स्वाइन फ्लू में अचानक बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर व मांसपेशियों में दर्द, अत्यधिक थकान और कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं। बच्चों में उल्टी-दस्त भी हो सकते हैं।

सांस लेने में परेशानी, सांस तेज चलना, लगातार तेज बुखार, अत्यधिक सुस्ती, पानी या दूध नहीं पी पाना, होंठ या चेहरा नीला पड़ना तथा हालत तेजी से बिगड़ना गंभीर संकेत हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर बच्चे को तत्काल चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत होती है।