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    रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार का इस्तीफा, सीआईडी जांच से नाराजगी; एकेडमिक डीन डीके सिन्हा को बनाया गया प्रभारी निदेशक

    Updated: Thu, 25 Jun 2026 06:51 PM (IST)

    रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार ने स्वास्थ्य मंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। सीआईडी जांच में बिना अनुमति पूछताछ से परेशान होकर उ ...और पढ़ें

    रिम्स निदेशक ने दिया इस्तीफा, एकेडमिक डीन को बनाया गया प्रभारी निदेशक।

    रिम्स निदेशक ने दिया इस्तीफा, एकेडमिक डीन को बनाया गया प्रभारी निदेशक।

    HighLights

    1. रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार ने पद से इस्तीफा दिया।

    2. सीआईडी की पूछताछ के बाद लिया यह निर्णय।

    3. एकेडमिक डीन डॉ. डीके सिन्हा बने प्रभारी निदेशक।

    जागरण संवाददाता, रांची। रिम्स निदेशक डाॅ. राजकुमार ने गुरुवार को अपना इस्तीफा स्वास्थ्य मंत्री सह रिम्स शासी परिषद के अध्यक्ष डाॅ. इरफान अंसारी को सौंप दिया, जिसे शाम तक मंजूर कर दिया गया। इसके बाद अब रिम्स के एकेडमिक डीन डाॅ. डीके सिन्हा को निदेशक पद का प्रभार दिया गया।

    निदेशक ने कहा कि आज तक ऐसा नहीं हुआ कि बिना अनुमति के कोई उनसे इतने घंटों तक पूछताछ कर सके। बिना कारण सीआईडी उनके कार्यालय में आकर उनसे इतनी पूछताछ की। उनसे कई लोगों को काफी समस्या है, इसलिए उन्होंने अपना इस्तीफा दिया। उन्होंने बताया कि उनके साथ उनके पुत्र ऋषभ कुमार ने भी रिम्स छोड़ दिया।

    मालूम हो कि बुधवार को अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) की दो अलग-अलग टीमों ने रिम्स पहुंचकर दो संवेदनशील मामलों की गहन जांच की थी। एक टीम ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मेडिकल पाठ्यक्रम में दाखिले के मामले की पड़ताल की, जबकि दूसरी टीम ने संस्थान में सफाई व्यवस्था से जुड़े करोड़ों रुपये के टेंडर में कथित अनियमितताओं की जांच की।

    सीआईडी की दोनों टीमों में पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) स्तर के चार अधिकारी शामिल थे। टीमों ने रिम्स के निदेशक, डीन, चिकित्सा अधीक्षक और अन्य संबंधित अधिकारियों से घंटों विस्तृत पूछताछ की थी और विभिन्न अभिलेखों की जांच की। जिसके बाद ही रिम्स के इन अधिकारियों की संलिप्तता को लेकर सवाल उठने लगे थे।

    रिम्स निदेशक को पहले ही स्वास्थ्य मंत्री ने बिना नोटिस जारी किए बरखास्त कर दिया था। जिसके बाद उन्होंने इस मामले को न्यायालय में चुनौती दी थी और वहां से उन्हें राहत मिली थी।

    इसके बाद से लगातार स्वास्थ्य विभाग व मंत्रालय के साथ इनके संबंध बिखरने लगे थे और जीबी की बैठक में भी इन्हें हटाने का कई बार एजेंडा रखा गया लेकिन इस बीच न्यायालय की ओर से सेवानिवृत न्यायाधीश के बैठक में उपस्थित रहने की वजह से इस मामले पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका था।

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    बता दें कि हाई कोर्ट ने डॉ राजकुमार के बेटे की नियुक्ति को भी सही माना था। बुधवार को सीआईडी की दो टीमों ने रिम्स कैंपस में उनसे पूछताछ की थी। तत्कालीन कारण इसे ही बताया जा रहा है। कई दस्तावेजों को जब्त करने की भी सूचना आई थी। 

    पहले भी विवादों में रहा निदेशक का कार्यकाल

    डाॅ. राजकुमार और स्वास्थ्य विभाग के बीच टकराव कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. इरफान अंसारी ने उन्हें पद से हटाने का आदेश जारी किया था। हालांकि उस निर्णय को डाॅ. राजकुमार ने न्यायालय में चुनौती दी थी और अदालत से राहत मिलने के बाद वे अपने पद पर बने रहे। इसके बाद से स्वास्थ्य विभाग और निदेशक के बीच संबंध लगातार तनावपूर्ण बने रहे।

    रिम्स शासी परिषद (जीबी) की बैठकों में कई बार उन्हें हटाने का प्रस्ताव एजेंडे में शामिल किया गया। हालांकि न्यायालय द्वारा नियुक्त सेवानिवृत्त न्यायाधीश की उपस्थिति और कानूनी जटिलताओं के कारण इस दिशा में कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका।

    रिम्स प्रशासन में फिर बढ़ी अनिश्चितता

    रिम्स राज्य का सबसे बड़ा चिकित्सा एवं शिक्षण संस्थान है। ऐसे समय में जब संस्थान कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं, नियुक्तियों और शैक्षणिक गतिविधियों से गुजर रहा है, निदेशक का अचानक इस्तीफा प्रशासनिक स्थिरता को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। अब स्वास्थ्य विभाग की ओर से जल्द ही स्थायी निदेशक की नियुक्ति को लेकर निर्णय लिया जा सकता है।

    इन विवादों का केंद्र रहे निदेशक

    • फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर एमबीबीएस में नामांकन का मामला।
    • सफाई टेंडर में कथित अनियमितताओं की जांच।
    • स्वास्थ्य विभाग और निदेशक के बीच लंबे समय से चल रहा टकराव।
    • निदेशक को लगातार जीबी बैठक में हटाने के प्रयास।
    • संस्थान के प्रशासनिक निर्णयों को लेकर लगातार विवाद।
    • निदेशक पुत्र को नियमों के विपरीत उन्हें पदभार देने का विवाद।

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