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    मझगांव में जंगली हाथियों का तांडव, अंबाईमोर्चा में शौच के लिए निकले दंपति पर किया जानलेवा हमला, बाल-बाल बचे

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 09:30 PM (IST)

    मझगांव प्रखंड में जंगली हाथियों का आतंक बढ़ गया है। ओडिशा से आए हाथियों के झुंड ने अंबाईमोर्चा गांव में एक दंपति पर हमला कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है, जिससे लोगों में डर का माहौल है। वे सुरक्षा और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

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    शनिवार को हाथी के हमले में घायल हुई महिला।

    संवाद सूत्र, मझगांव। मझगांव प्रखंड में इन दिनों जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। ओडिशा के सिमलीपाल जंगल से हर वर्ष पांच दर्जन से अधिक हाथियों का झुंड इस इलाके में प्रवेश करता है, जिससे ग्रामीणों का जीवन भय और अनिश्चितता के बीच गुजर रहा है। 
     
    हाथी खेतों में लगी फसलों को नष्ट कर रहे हैं, वहीं हर साल कई लोगों की जान भी जा रही है। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग की ओर से प्रभावी रोकथाम के लिए आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। 
     
    शनिवार की सुबह हुई घटना ने लोगों का भय और बढ़ा दिया। अधिकारी पंचायत के अंबाईमोर्चा गांव में झाड़ के भीतर छिपे एक जंगली हाथी ने शौच से लौट रही सहचरी देवी (45) पर अचानक हमला कर दिया। 
     
    सुबह लगभग 5:30 बजे हुए इस हमले में हाथी ने सहचरी देवी को जमीन पर पटक दिया, जिससे उनके दाहिने पैर और सिर में गंभीर चोटें आईं। उनकी चीख सुनकर उनके पति कालीपद राउत (55) तत्काल मौके पर पहुंचे और पत्नी को बचाने की कोशिश की, लेकिन हाथी ने उन पर भी हमला कर दिया। 
     
    कालीपद राउत के घुटने में चोट आई और दोनों बेहोश होकर वहीं गिर पड़े। हमले के बाद हाथी जंगल की ओर वापस लौट गया। थोड़ी देर बाद ग्रामीणों ने दोनों को देखा और उन्हें तुरंत मझगांव रेफरल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों की टीम उनका उपचार कर रही है। 
     
    चिकित्सा अधिकारियों के अनुसार सहचरी देवी की स्थिति गंभीर बनी हुई है और उन्हें लगातार निगरानी में रखा गया है। ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों का आतंक वर्षों से जारी है। 
     
    रात में हाथियों के झुंड गांवों में दाखिल हो जाते हैं और घरों, फसलों तथा अनाज भंडार को नुकसान पहुंचाते हैं। कई परिवारों ने सुरक्षा के डर से रातें घर छोड़कर खेतों या रिश्तेदारों के यहां बितानी शुरू कर दी हैं। 
     
    ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग की उदासीनता के कारण स्थिति और खराब होती जा रही है। न तो हाथियों की ट्रैकिंग की उचित व्यवस्था है, न ही गांवों में अलर्ट सिस्टम। 
     
    लोगों ने मांग की है कि हाथियों की गतिविधि की नियमित निगरानी की जाए। गांवों में चेतावनी तंत्र लगाया जाए और प्रभावित परिवारों को मुआवजा एवं सुरक्षा प्रदान की जाए। 



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