भारत में पहली बार कब और कहां बना था केक? 140 साल पुरानी है केरल की इस मशहूर बेकरी की कहानी
भारत में सबसे पहला बार केक केरल के थालास्सेरी में बेक किया गया था। इस केक को माम्बल्ली बापू ने अपनी खास रेसिपी से बेक किया था। ...और पढ़ें
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कहां बेक हुआ था भारत का पहला केक? (Picture Courtesy: Freepik)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। किसी का जन्मदिन हो, क्रिसमस या ऑफिस में किसी का फेयरवेल, केक इस सेलिब्रेशन का हिस्सा जरूर बनता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में सबसे पहली बार केक कब और कहां बनाया गया था? भारत में सबसे पहली बार केक बनने की कहानी बेहद दिलचस्प है और 19वीं शताब्दी से जुड़ी है, जब केरल के थालास्सेरी में देश का पहला केक बेक किया गया था।
सबसे दिलचस्प बात है कि जिस बेकरी ने भारत का सबसे पहला केक बेक किया था, वह आज भी लोगों के दिलों पर राज कर रही है और केक प्रेमियों का पसंदीदा ठिकाना बनी हुई है। आइए जानें भारत में सबसे पहला केक बेक होने की कहानी।
कैसे हुई इस पहले केक की शुरुआत?
यह बात साल 1883 के क्रिसमस के समय की है। उस दौर में एशिया के सबसे बड़े ब्रिटिश दालचीनी बागान को संभालने वाला एक अंग्रेज व्यक्ति इंग्लैंड से अपने साथ एक प्लम केक लेकर आया। वह थालास्सेरी के एक लोकल बेकर माम्बल्ली बापू के पास पहुंचा, जो उस समय बेहतरीन किस्म के बिस्कुट और रस्क बनाने के लिए मशहूर थे।
उस शख्स ने उनसे पूछा कि क्या वो क्रिसमस के लिए ऐसा ही केक बना सकते हैं? उन्होंने माम्बल्ली बापू को केक बनाने की पूरी प्रक्रिया समझाई और साथ ही किशमिश, कोको और खजूर जैसी कुछ जरूरी सामग्रियां भी दी। इसके साथ ही, उन्होंने केक में डालने के लिए फ्रांस की मशहूर ब्रैंडी का इस्तेमाल करने की सलाह भी दी थी।
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जब केक में घुला देसी और पारंपरिक स्वाद
माम्बल्ली बापू ने विदेशी ब्रैंडी का इस्तेमाल करने के बजाय इसमें एक देसी ट्विस्ट देने का फैसला किया। उन्होंने मालाबार तट के सबसे बेहतरीन और चुनिंदा मसालों को इकट्ठा किया। इसके साथ ही, केक को एक खास भारतीय स्वाद देने के लिए उन्होंने सेब और कादाझिपलम से बनी एक स्थानीय शराब का इस्तेमाल किया।
जब यह केक बनकर तैयार हुआ और उस अंग्रेज को यह केक इतना शानदार लगा कि उन्होंने क्रिसमस से ठीक पहले एक दर्जन और केक बनाने का ऑर्डर दे दिया। यह बेकरी और कोई नहीं, बल्कि मशहूर माम्बल्लीस रॉयल बिस्किट फैक्टरी है। इस कामयाबी के साथ ही भारत के केक इतिहास में इस बेकरी का नाम हमेशा-हमेशा के लिए दर्ज हो गया।

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विश्व युद्ध और सेना तक पहुंचा बिस्कुट का स्वाद
समय के साथ इस बेकिंग व्यवसाय को आगे बढ़ाने वाली पीढ़ियों ने इसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। इस बेकरी के बिस्कुटों का स्वाद इतना लाजवाब था कि विश्व युद्धों के दौरान इन्हें इजिप्ट और अफ्रीका में तैनात भारतीय सैनिकों के लिए भी भेजा गया था।
इससे जुड़ी एक बेहद मशहूर कहानी भी है कि जनरल करियप्पा ने जब विदेश में इन बिस्कुटों को चखा, तो वे इसके दीवाने हो गए। भारत में अपने घर कूर्ग वापस लौटने पर उन्होंने खासतौर से अपने लोगों को इन बिस्कुटों को लाने के लिए भेजा था।
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