मां का दूध सिर्फ पोषण नहीं, बच्चे के DNA को भी देता है नई ताकत; वैज्ञानिकों ने किया खुलासा
शोधकर्ताओं की एक टीम ने 3,421 बच्चों में डीएनए मिथाइलेशन की एपिजेनेटिक प्रक्रिया का विश्लेषण किया है। ...और पढ़ें

जो बच्चे शुरुआती तीन माह तक मां का दूध पीते हैं, उनके डीएनए में पाया जाता है एपिजेनेटिक मार्कर (Image Source: Freepik)
प्रेट्र, नई दिल्ली। स्तनपान शिशुओं के लिए सर्वोत्तम पोषण है, जो पहले छह महीनों तक आवश्यक एंटीबाडी और पोषक तत्व प्रदान करता है। यह संक्रमण, मोटापे और एलर्जी का खतरा कम करता है। साथ ही पाचन में आसान होता है और मानसिक विकास में मदद करता है।
यह भविष्य में डायबिटीज व अस्थमा जैसी खतरे को कम करता है। एक ब्लड सैंपल के विश्लेषण में पाया गया है कि जो बच्चे पहले तीन महीनों के लिए विशेष रूप से स्तनपान कराए गए हैं, उनके डीएनए में एपिजेनेटिक मार्कर होते हैं, जो रासायनिक परिवर्तन होते हैं, उनकी तुलना में जो बच्चे स्तनपान नहीं कराए गए। एपिजेनेटिक्स जीनों और पर्यावरण के मिलन बिंदु पर स्थित है, इन दोनों के बीच की परस्पर क्रिया से ही कोई अवलोकनीय व्यवहार उत्पन्न होता है।
इस अध्ययन के परिणाम यह दर्शाते हैं कि माता-पिता को बच्चों को स्तनपान का महत्व समझना चाहिए। यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, बल्कि मानसिक व भावनात्मक विकास के लिए भी लाभकारी है।

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बच्चों के डीएनए मिथाइलेशन मार्क्स पाए गए औसतन अधिक
स्पेन के बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फार ग्लोबल हेल्थ (आइएसग्लोबल) और यूके के एक्सेटर और ब्रिस्टल विश्वविद्यालयों के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने 3,421 बच्चों में डीएनए मिथाइलेशन की एपिजेनेटिक प्रक्रिया का विश्लेषण किया। टीम ने पाया कि जिन बच्चों को कम से कम तीन महीने तक विशेष रूप से स्तनपान कराया गया, उनके इम्यूनिटी और विकास प्रक्रियाओं से जुड़े जीन पर डीएनए मिथाइलेशन मार्क्स औसतन अधिक थे, उनकी तुलना में जो बच्चे स्तनपान नहीं कराए गए। यह अध्ययन जर्नल क्लिनिकल एपिजेनेटिक्स में प्रकाशित हुआ।
हालांकि, अध्ययन ने यह नहीं देखा कि क्या ये एपिजेनेटिक मार्क्स बच्चों की इम्यूनिटी या विकास को प्रभावित करते हैं। डीएनए मिथाइलेशन एक 'आफ स्विच' की तरह काम करता है और किसी जीन को खुद को व्यक्त करने से रोक देता है। इस प्रक्रिया को अन्य उद्देश्यों के अलावा भ्रूण के विकास और जीनोमिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण पाया गया है।
बच्चों के स्वास्थ्य पर अल्पकालिक और दीर्घकालिक लाभकारी प्रभाव
यूनिवर्सिटी आफ एक्सेटर के अध्ययनकी सह प्रमुख डोरेटा कारामास्की ने कहा कि हमारे नतीजों से पता चलता है कि जो बच्चे सिर्फ मां का दूध पीते हैं, उनमें उस अनुभव से जुड़े एपिजेनेटिक बदलाव होते हैं। इन मार्करों से प्रभावित होने वाले जीन, विकास और इम्युनिटी से जुड़ी प्रक्रियाओं में शामिल होते हैं, लेकिन हम अध्ययन के आधार पर यह नहीं कह सकते कि क्या यह उन बहुत ही जटिल प्रक्रियाओं को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

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शोधकर्ताओं ने कहा कि जबकि स्तनपान के बच्चों के स्वास्थ्य पर अल्पकालिक और दीर्घकालिक लाभकारी प्रभाव दिखाए गए हैं, जिसमें बेहतर संज्ञानात्मक विकास और इम्यून प्रोग्रामिंग शामिल है। इसके योगदान देने वाले जैविक तंत्र केवल आंशिक रूप से समझे गए हैं, जिसमें एपिजेनेटिक्स एक संभावित योगदानकर्ता के रूप में उभर रहा है। विश्लेषण ने प्रेग्नेंसी एंड चाइल्डहुड एपिजेनेटिक्स (पीएसीई) कंसोर्टियम के माध्यम से एकत्रित डेटा को देखा, जिसमें फ्रांस, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका जैसे देशों से 11 अध्ययन शामिल थे। स्तनपान के बारे में जानकारी जन्म से प्रश्नावली के माध्यम से एकत्र की गई थी।
नाभि के तार से लिए गए नमूनों के साथ तुलना की गई
डीएनए मिथाइलेशन मार्क्स का मापन उन नमूनों से किया गया जब बच्चे पांच से 12 वर्ष के थे और उन्हें नाभि के तार से लिए गए नमूनों के साथ तुलना की गई ताकि स्तनपान से पहले की स्थिति का आकलन किया जा सके। शोधकर्ताओं ने जांचा कि क्या स्तनपान के अनुभव से संबंधित कोई अंतर था। लेखकों ने लिखा कि स्तनपान का संबंध बचपन के रक्त में सीमित संख्या सीपीजी (साइटोसिन फास्फेट ग्वानिन ) स्थलों पर भिन्नात्मक डीएनएएम (डीएनए मिथाइलेशन) से था।
एक सीपीजी स्थल एक डीएनए क्षेत्र है, जहां एक साइटोसिन न्यूक्लियोटाइड के बाद एक गुआनिन न्यूक्लियोटाइड होता है और यह डीएनए मिथाइलेशन से एपिजेनेटिक जीन नियमन के लिए महत्वपूर्ण है । बचपन के ब्लड में छह सीपीजी स्थलों पर सकारात्मक संबंध पाए गए। इनमें से चार का संबंध स्तनपान की अवधि से था, तीन का संबंध उन बच्चों की तुलना में कभी स्तनपान नहीं किया।
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