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भारत में स्ट्रोक के बढ़ते मामलों पर डॉक्टरों की चेतावनी, 56% मौतों के लिए High BP और 12% में तंबाकू जिम्मेदार

Published: Thu, 29 Oct 2026 09:17 AM (IST)

भारत में स्ट्रोक के बढ़ते खतरे को कम करने के लिए विशेषज्ञों ने तंबाकू की लत छुड़ाने और उच्च रक्तचाप ...और पढ़ें

स्ट्रोक का खतरा घटाने के लिए तंबाकू की लत छुड़ाना जरूरी (Image Source: AI-Generated)

स्ट्रोक का खतरा घटाने के लिए तंबाकू की लत छुड़ाना जरूरी (Image Source: AI-Generated)

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पीटीआई, नई दिल्ली। भारत में स्ट्रोक यानी मस्तिष्काघात के बढ़ते खतरे को कम करने के लिए तंबाकू की लत छुड़ाने और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। विशेषज्ञों ने विश्व स्ट्रोक दिवस से पहले कहा कि केवल जागरूकता अभियान चलाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए लोगों को तंबाकू छोड़ने में लगातार मदद और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करानी होंगी।

स्ट्रोक से होने वाली मौतों में तंबाकू की बड़ी भूमिका

ग्लोबल बर्डन आफ डिजीज के आंकड़ों के 2024 के विश्लेषण के अनुसार, भारत में स्ट्रोक से होने वाली मौतों में 12 प्रतिशत के लिए तंबाकू का सेवन जिम्मेदार था, जबकि 56 प्रतिशत मौतों का संबंध उच्च सिस्टोलिक रक्तचाप से था। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, भारत में हर साल तंबाकू के सेवन से करीब 13.5 लाख लोगों की मौत होती है। देश में सिगरेट के अलावा बीड़ी, खैनी, गुटखा और जर्दा जैसे उत्पादों का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। नोएडा के मेदांता सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के न्यूरोसर्जरी एवं न्यूरोसाइंसेज विभाग के निदेशक डॉ. यशपाल सिंह बुंदेला ने कहा कि निकोटीन की लत के कारण लोगों के लिए तंबाकू छोड़ना मुश्किल हो सकता है। इसलिए परामर्श, निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी और अन्य प्रमाणित उपचारों की सुविधा बढ़ानी चाहिए।

युवाओं में भी बढ़ रहा स्ट्रोक का खतरा

मेट्रो ग्रुप आफ हास्पिटल्स की वरिष्ठ न्यूरोलाजिस्ट डॉ. सोनिया लाल गुप्ता ने कहा कि स्ट्रोक अब केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गया है। अनियंत्रित ब्लड प्रेशर, मधुमेह, मोटापा, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और लक्षणों को पहचानने में देरी से इसका खतरा बढ़ सकता है। स्ट्रोक तब होता है, जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में खून की आपूर्ति रुक जाती है या मस्तिष्क में रक्तस्राव होने लगता है। पर्याप्त रक्त नहीं मिलने पर कुछ ही मिनटों में मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है।

लक्षण दिखें तो तुरंत लें चिकित्सा सहायता

विशेषज्ञों के अनुसार, चेहरे का अचानक टेढ़ा होना, एक हाथ में कमजोरी, बोलने में परेशानी, संतुलन बिगड़ना और अचानक दिखाई देने में दिक्कत होना स्ट्रोक के प्रमुख संकेत हैं। इन्हें सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सीके बिड़ला अस्पताल, पंजाबी बाग के श्वसन रोग विभाग के निदेशक डॉ. विकास मित्तल ने कहा कि तंबाकू नियंत्रण के प्रभावी तरीकों पर खुले और वैज्ञानिक आधार पर चर्चा होनी चाहिए। जापान के 2026 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, वहां 15-64 वर्ष के लोगों में सिगरेट का इस्तेमाल 2017 के 20.7 प्रतिशत से घटकर 2025 में 12.3 प्रतिशत रह गया।

हालांकि, गर्म तंबाकू उत्पादों का उपयोग 5.3 प्रतिशत से बढ़कर 11.7 प्रतिशत हो गया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि इन आंकड़ों से यह साबित नहीं होता कि गर्म तंबाकू उत्पादों के बढ़ते इस्तेमाल से सिगरेट का सेवन घटा या स्ट्रोक का खतरा कम हुआ।

बचाव के लिए जरूरी हैं नियमित जांच और सही इलाज

एम्स-दिल्ली के न्यूरोलाजी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. अवध किशोर पंडित ने कहा कि तंबाकू छोड़ने के साथ ब्लड प्रेशर और मधुमेह को नियंत्रित करना भी जरूरी है। नियमित जांच, डाक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेने से स्ट्रोक का खतरा कम हो सकता है। विशेषज्ञों ने तंबाकू की शुरुआत रोकने, युवाओं को जागरूक करने और लत छोड़ने वालों को लगातार सहायता देने पर जोर दिया।

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