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सिर्फ आधा घंटा टहलना काफी नहीं! जानिए कैसे आपकी रोजमर्रा की लाइफस्टाइल बढ़ा रही है ब्रेन स्ट्रोक का रिस्क

By Dr. Neha PanditaEdited By: Swati Sharma
Published: Tue, 27 Oct 2026 12:58 PM (IST)

कामकाज और नींद की कमी जैसी रोजमर्रा की आदतें ब्रेन स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा सकती हैं।

रोजमर्रा की आदतें तो नहीं बढ़ा रहीं स्ट्रोक का खतरा? (Picture Courtesy: Freepik)

रोजमर्रा की आदतें तो नहीं बढ़ा रहीं स्ट्रोक का खतरा? (Picture Courtesy: Freepik)

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कामकाज के चक्कर में अक्सर हम अपनी सेहत का ध्यान रखना भूल जाते हैं। सुबह जल्दी-जल्दी नाश्ता करना, घंटों बैठकर ऑफिस में काम करना और फिर थककर घर लौटना। आजकल ज्यादातर लोगों का रूटीन ऐसा ही है। रात को भी काम के मैसेज और अधूरे काम के चक्कर में लोग अपनी नींद को भी कुर्बान करने में नहीं हिचकिचाते। 

आमतौर पर लोग इस रूटीन को ब्रेन स्ट्रोक के खतरे से जोड़कर नहीं देखते, लेकिन ये आदतें लंबे समय में स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ावा दे सकती हैं, जिनमें ब्रेन स्ट्रोक भी शामिल है। 

कब होता है ब्रेन स्ट्रोक?

स्ट्रोक तब होता है, जब दिमाग के किसी हिस्से में खून पहुंचना बंद हो जाए, उससे में रुकावट आने लगे या दिमाग की कोई नस फट जाए। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, स्मोकिंग, कोलेस्ट्रॉल बढ़ना इसके अहम रिस्क फैक्टर्स हैं। हमारी रोजमर्रा की आदतें इन जोखिमों को प्रभावित कर सकती हैं, जिसका हमें कई बार एहसास भी नहीं होता।  

दिनभर बैठकर बीतता है समय

ऑफिस आने-जाने में समय बिताना, लैपटॉप के सामने घंटों बैठे रहना, डेस्क पर ही खाना खाना, फिर घर लौटकर आराम करना। ऐसे में टहलने या एक्सरसाइज करने तक का समय नहीं मिलता। लगातार फिजिकल इनएक्टिविटी की कमी वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक हेल्थ के बिगड़ने की वजह बन सकती है। इससे टाइप-2 डाइबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

हाई ब्लड प्रेशर की वजह से ब्लड वेसल्स पर लगातार दबाव पड़ता है और समय के साथ दिमाग की नसों को नुकसान पहुंचता है। इससे दिमाग का ब्लड फ्लो रुकने या नस फटने का खतरा बढ़ जाता है। 

इसमें सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि हाई ब्लड प्रेशर के अक्सर कोई साफ लक्षण दिखाई नहीं देते। कोई व्यक्ति खुद को पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर सकता है, जबकि उसका बीपी लंबे समय से बढ़ा हुआ है। 

काम के कारण नींद से समझौता

कई लोग रात को भी ऑफिस के कामों में उलझे रहते हैं या कल का प्रेजेंटेशन पूरा करने के लिए रात को देर तक जागते हैं और सोने का समय कम होने लगता है। लगातार नींद पूरी न होना ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिक हेल्थ को प्रभावित करता है। इसके अलावा, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया पर भी ध्यान देना जरूरी है। इससे सोते समय बार-बार सांस रुकने की समस्या पैदा होती है।  

स्ट्रेस के कारण हमारी लाइफस्टाइल प्रभावित होती है। कुछ लोग स्ट्रेस के कारण स्मोक करने लगते हैं, बाहर का खाना ज्यादा खाते हैं या एक्सरसाइज करना छोड़ देते हैं। इन सभी वजहों से ये पक्का नहीं होता कि व्यक्ति को स्ट्रोक आएगा ही, लेकिन इनकी वजह से रिस्क जरूर बढ़ जाता है। 

रोजाना टहलना काफी नहीं

कई लोगों को लगता है कि अगर वो रोज आधे घंटे पैदल चलते हैं, तो बाकी अनहेल्दी आदतों का असर उन पर नहीं होगा। हालांकि, ये सच नहीं है। रोजाना फिजिकल एक्सरसाइज करना फायदेमंद है, लेकिन ये हाई ब्लड प्रेश, स्मोकिंग और डायबिटीज के प्रभावों को पूरी तरह खत्म नहीं करता।

सही रूटीन से करें बचाव

दिमाग को स्वस्थ्य रखने के लिए रातोंरात पूरी लाइफस्टाइल बदलना जरूरी नहीं है। थोड़ी-थोड़ी देर पर वॉक करने, पूरी नींद लेने और हेल्दी खाना खाने से शुरुआत की जा सकती है। स्मोकिंग से बचें और नियमित समय पर अपना हेल्थ चेकअप जरूर करवाएं। ब्लड प्रेशर की नियमित जांच कब करवानी चाहिए, ये आपकी उम्र, व्यक्तिगत जोखिमों और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है। 

स्ट्रोक के लक्षण पहचानें

स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानना भी उतना ही जरूरी है। चेहरे का अचानक एक ओर झुकना, शरीर के एक तरफ कमजोरी या सुन्नपन, बोलने में परेशानी, अचानक नजर में बदलाव या बैलेंस बिगड़ना स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत मेडिकल हेल्प लेना जरूरी है। 

(डॉ. नेहा पंडिता, सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट एवं यूनिट हेड, क्लिनिकल लीड- पार्किंसन डिजीज एवं मूवमेंट डिसऑर्डर्स, फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा)