गर्मी में केवल पानी पीना ही काफी नहीं: त्वचा और आंखों को डैमेज से बचाने के लिए आज ही बदलें ये आदतें
गर्मी के मौसम में अनेक चुनौतियों का एक साथ सामना करना पड़ता है। इन दिनों बाहर निकलते समय आंखों और त्चचा को धूप से बचना सबसे जरूरी है। ...और पढ़ें
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गर्मी में कैसे रखें आंखों और त्वचा का ख्याल? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। तेज गर्मी और धूप न केवल आपकी नींद छीनती है, बल्कि इससे त्वचा में संक्रमण का खतरा भी रहता है। चुभने वाली धूप व नमी त्वचा संक्रमण, एलर्जी की परेशानी और दिनचर्या को अस्तव्यस्त कर सकती है। समस्या आने से पहले ही सतर्कता बढ़ाएं तो बचाव का यह बेहतर तरीका हो सकता है।
खुद को हाइड्रेट रखने से बात नहीं बनने वाली। इसके साथ यह जरूरी है अपनी दिनचर्या में छोटीछोटी बातों का रखें ध्यान। ये भले परिचित या पुरानी जानकारियां लग सकती हैं, पर इनकी मदद से आप सुरक्षित रह सकते हैं।
विशेषकर घर के बच्चे, बुजुर्ग व बीमारी से पीड़ित लोगों को लेकर कोई लापरवाही न बरतें। जिनकी प्रतिरोधी क्षमता कमजोर होती है, आंखें या त्वचा से जुड़ी परेशानी होने का जोखिम ऐसे लोगों को अधिक रहता है।
मौसमी फल हैं भीतरी सनस्कीन
धूप से बचाव के लिए जरूरी है सनस्कीन लगाएं, पर क्या आप जानते हैं गर्मी के दुष्प्रभावों से बचाव के लिए मौसमी फल भी सनस्क्रीन की तरह अंदरुनी अंगों को सुरक्षित रखते हैं। इसका प्रभाव हमारी सेहत के साथ त्वचा और आंखों पर पड़ता है। इस मौसम में लोग आंवले का सेवन कम करते हैं, पर गर्मी में भी इसका प्रयोग उतना ही लाभकारी है।
इसमें विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है। इससे बीमारियों से लड़ने की क्षमता (प्रतिरोधी क्षमता) को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। इसके अलावा, मौसमी फलों जैसे, तरबूज, आम, जामुन आदि का प्रयोग भी धूप से बचाव करने में कारगर हैं जिन्हें भीतरी सनस्क्रीन कहा जा सकता है।
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ध्यान रहे पानी पीने के अलावा, खीरा, तरबूज, संतरा और स्ट्राबेरी जैसे अधिक पानी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना न भूलें। ये खाद्य पदार्थ न केवल आपके शरीर को हाइड्रेट करते हैं बल्कि आपकी त्वचा को आवश्यक पोषक तत्व भी प्रदान करते हैं। इससे आंखों को भी लाभ मिलता है। सूखेपन की समस्या से राहत मिलती है।
ताकि त्वचा रहे स्वस्थ व सुरक्षित
- अक्सर सनस्क्रीन लगाते समय कान, गर्दन और हाथों पर ध्यान नहीं दिया जाता। चेहरे की तरह ही इन पर भी धूप का प्रभाव होता है।
- सुबह 10 बजे से शाम चार बजे के बीच तेज धूप होती है। इस अवधि में बाहर निकलने से बचें या सुरक्षा उपायों के साथ निकलें।
- ऐसे माइश्चराइजर और सीरम चुनें, जिनमें हाइलूरोनिक एसिड, ग्लिसरीन और एलोवेरा जैसे नमी प्रदान करने वाले तत्व मौजूद हों। ये तत्व त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद करते हैं और उसे मुलायम और कोमल रखते हैं।
- घर या दफ्तर में ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करने से हवा में नमी बढ़ाने और त्वचा को अत्यधिक शुष्क होने से बचाने में मदद मिल सकती है।
- सीरम का प्रयोग करते हैं तो जेलआधारित फार्मूले चुनें। साथ ही ऐसे सीरम चुनें, जिनमें विटामिन सी जैसे एंटीआक्सीडेंट्स से युक्त हों।
- त्वचा तैलीय है या मुंहासों से परेशान हैं, तो रोमछिद्रों को बंद होने से बचाने के लिए जेलबेस्ड सनस्क्रीन का प्रयोग बेहतर विकल्प है।
सनस्क्रीन के प्रयोग से त्वचा रहेगी सुरक्षित
त्वचा शरीर का शरीर का सबसे बड़ा अंग है। यह धूल, मिट्टी, हानिकारक बैक्टीरिया आदि से बचाता है। पसीना बहाकर तापमान के नियंत्रण के कारण हम अधिक सर्दी या गर्मी से खुद का बचाव कर सकते हैं। धूप में संपर्क में आकर त्वचा विटामिन डी का निर्माण करती है पर यदि अपनी त्वचा उचित ध्यान न रखें तो तेज धूप व गर्मी इसकी सेहत की बड़ी चुनौती बन सकती है। प्रयास करें कि नियमित त्वचा की साफसफाई करें। बुजुर्ग और बच्चे साफसफाई में लापरवाही बरतते हैं। इसलिए उनमें संक्रमण व त्वचा संबंधी परेशानी अधिक देखी जाती है। चूंकि उनकी प्रतिरोधी क्षमता कमजोर होती है इसलिए उनके खानपान व सफाई का ध्यान जरूरी है।
रोजाना सनस्क्रीन लगाना जरूरी है। ऐसा नहीं है केवल धूप से बचाव के लिए यह है। इसे आप घर के भीतर भी लगाएं। यह स्क्रीन से निकलने वाले हानिकारक किरणों से भी रक्षा करते हैं। कई बार लोग एक बार अच्छे ब्रांड का सनस्क्रीन लगाकर यह मान लेते हैं कि वे अब सुरक्षित हैं। पर हमें हर तीन घंटे में सनस्क्रीन लगाना चाहिए। विटामिन सी युक्त महंगे फल न ले सकें तो एक आंवला रोज लेना भी बेहतर है।
-डॉ. दीपाली भारद्वाज, डर्मेटोलाजिस्ट, मैक्स अस्पताल, नई दिल्ली
खानपान में रहे विशेष ध्यान
- विटामिनसी से त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाने में मदद मिलती है। अपने आहार में इसका ध्यान रखें। स्ट्राबेरी, शिमला मिर्च और ब्रोकली जैसे खाद्य पदार्थों को शामिल करें।
- ओमेगा3 त्वचा को हाइड्रेटेड रखने और सूजन को कम करने में मदद करता हैं। यह वसायुक्त मछली (सैल्मन, मैकेरल), चिया सीड्स और अखरोट जैसे खाद्य पदार्थ में खूब होते हैं।
- एंटीआक्सीडेंट्स से भरपूर खाद्य पदार्थ लें। ये धूप के संपर्क में आने से होने वाले फ्री रेडिकल नुकसान से लड़ने में मदद करते हैं। ये ब्लूबेरी, पालक और टमाटर जैसे खाद्य पदार्थों में आपको मिल सकता है।
आंखों को मिले ठंडक, बनी रहे इसकी सेहत
- यदि आंखों में जलन महसूस हो रही है, थकान महसूस होती है तो ठंडे पानी में कपड़ा भिगों लें और उसे निचोड़कर कुछ देर आंखों पर रखें।
- साफ आरओ वॉटर से आंखों को धोएं। सामान्य पानी में अधिकांशतया संक्रमण का खतरा रहता है।
- ठंडे आइमास्क या खीरे का टुकड़ा प्रयोग भी अच्छा है।
- आई मेकअप का प्रयोग करने के बाद उसे अच्छी तरह साफ कर लें। अन्यथा इनसे भी आंखों में जलन या खुजली हो सकती है और आंखों में संक्रमण भी हो सकता है।
- रात को अच्छी नींद भी आंखों की सेहत के लिए आवश्यक है।
- एसी के सीधे और लंबे समय तक संपर्क में रहने से आंखों में मौजूद आंसू की परत सूख सकती है। इससे आंखों में अत्यधिक सूखापन, जलन और खुजली जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
- अपने आहार में एंटीआक्सीडेंट्स से भरपूर फल (खट्टे फल और बेरीज), पत्तेदार सब्जियां (केल और पालक) और कैरोटीनयड से भरपूर सब्जियां (गाजर और शकरकंद) शामिल करें। इससे गर्मियों में होने वाली आंखों की जलन और सूखापन कम करने में मदद मिलती है।
गर्मी में आंखों को सुरक्षित रखना जरूरी
इन दिनों आंखों में सूखापन की समस्या अधिक होती है। तेज यूवी किरणों के साथ प्रदूषण के कारण आंखों में संक्रमण का खतरा रहता है। घर से बाहर निकलते समय गागल्स का प्रयोग करें। यह गागल्स आकार में बड़ा हो और आंखों को पूरी तरह ढकने वाला हो। यदि आप तैराकी के लिए जा रहे हैं तो इसे पहनना न भूलें। बच्चे अक्सर इसकी अनदेखी करते हैं। आंखों को सीधी धूप से बचाने के लिए चौड़ी किनारी वाली टोपी या हैट लगाएं।
यदि आंखों में खुजली हो रही है या कोई समस्या है तो उन्हें हाथों मलना नहीं चाहिए, अन्यथा संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। कोई भी दवा या आइड्राप चिकित्सक से परामर्श के बाद ही लें। पंखें या एसी की हवा के सीधे संपर्क से भी आंखों को बचाकर रखें। धूप में अधिक देर रहने या स्क्रीन देखने से आंखों की थकान, उससे लगातार पानी आने की परेशानी हो रही है तो चिकित्सक से जल्दी परामर्श लें। उससे पूर्व ब्रेक लेने का नियम अपनाएं। यानी हर 20 मिनट पर 20 सेकंड का ब्रेक लें और 20 फीट दूर किसी चीज को देखें।
डॉ. रोहित सक्सेना, प्रोफेसर, राजेंद्र प्रसाद नेत्र विज्ञान केंद्र, एम्स, नई दिल्ली
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