मुगलों का 'हरम' हो या राजपूतों का 'रनिवास’: पुराने जमाने में क्यों रानियों के लिए बनाए जाते थे अलग महल?
पुराने समय में राजाओं के महलों में रानियों के लिए अलग हिस्सा या महल होता था। इसके पीछे सुरक्षा के अलावा और भी कई वजहें हुआ करती थीं। ...और पढ़ें

रानियों का हिस्सा महल में अलग क्यों होता था? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अगर इतिहास के पन्ने पलटकर देखे जाएं, तो पुराने राजाओं के महलों में एक बेहद खास बात देखने को मिलती है। उस दौर में रानियों और राजपरिवार की महिलाओं के लिए महल में एक अलग हिस्सा या अलग महल बना होता था। मुगल काल में इसे हरम या जनाना महल कहा जाता था, जबकि राजपूत दूसरे राजवंशों में इसे अंतःपुर या रनिवास के नाम से जाना जाता था।
ऐसे में सवाल आता है कि आखिर रानियों के लिए महल में अलग हिस्सा या एक अलग महल बनाने की क्या जरूरत थी? दरअसल, इसके पीछे राजनीति के साथ-साथ कई सामाजिक और सांस्कृतिक कारण भी छिपे थे। आइए जानें इन वजहों के बारे में।
रानियों की सुरक्षा
पुराने समय में रानियों और राजपरिवार की महिलाओं की सुरक्षा राजा के सम्मान और आबरू से जुड़ी होती थी। महल के मुख्य हिस्से में मंत्री, दूत, सेनापति और विदेशी मेहमानों का आना-जाना लगा रहता था। इसके कारण रानियों की सुरक्षा में कोई चूक न हो जाए और उनकी प्राइवेसी में कोई खलल न पड़े।
इसलिए उनके लिए महल का अलग हिस्सा या दूसरा महल बनाया जाता था। रानियों के महल को किले का सबसे सुरक्षित हिस्सा माना जाता था, जहां किसी भी बाहरी पुरुष का आना मना था। इस नियम को तोड़ने पर मृत्युदंड जैसे सजा भी दी जाती थी।
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पर्दा प्रथा और सामाजिक नियम
उस दौर में शाही परिवार की महिलाएं आम जनता या बाहरी पुरुषों के सामने बिना पर्दा के नहीं आ सकती थीं। इसलिए अलग महल होने से उन्हें पूरी प्राइवेसी मिलती थी और वो बिना पर्दा किए अपने महल में आराम से रह सकती थीं। साथ ही, वो अपने हिसाब से बिना किसी संकोच के अपनी सहेलियों, बच्चों या महल की दूसरी महिलाओं के साथ वक्त बिता सकती थीं।
रानियों की बड़ी संख्या
पुराने समय में राजनीतिक समझौतों के कारण राजा एक से ज्यादा विवाह किया करते थे। ऐसे में कई बार राजाओं की दर्जनों या उससे भी ज्यादा रानियां होती थीं। इतनी बड़ी संख्या में रानियों और उनकी दासियों के रहने के इंतजाम के लिए महल का अलग हिस्सा या अलग महल ही बनाया जाता था, ताकि महल के अंदर की व्यवस्था ठीक से होती रहे। रानियों के इस महल या हिस्से को मुख्य रानी संभालती थीं।
लग्जरी और सुविधाओं का केंद्र
रानियों के महल सिर्फ रहने की जगह नहीं होते थे। इन महलों की वास्तुकला देखने लायक होती थी, जो राजा की शान को दर्शाते थे। इन महलों के अंदर रानियों के मनोरंजन के लिए खूबसूरत बगीचे, फव्वारे, स्नानघर और नृत्य के लिए खास कमरे बने होते थे। इन महलों में रानियां बिना किसी रोक-टोक के खुलकर अपने त्योहार मना सकती थीं और संगीत आदि का आनंद ले सकती थीं।