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ऑर्केस्ट्रा डांस नहीं, ये लोक नृत्य है बिहार की असली पहचान! सिर पर जलता हुआ मटका लेकर 'झिझिया' करती हैं महिलाएं

Published: Wed, 14 Oct 2026 11:56 AM (IST)Updated: Thu, 15 Oct 2026 12:48 PM (IST)

झिझिया बिहार का मशहूर लोक नृत्य है, जिसे महिलाएं नवरात्र के अवसर पर करती हैं।

बहुत दिलचस्प है झिझिया की कहानी (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बिहार का डांस सिर्फ ऑर्केस्ट्रा तक सीमित नहीं है। यहां को लोक नृत्यों में झिझिया भी शामिल है। झिझिया नृत्य नवरात्र के दौरान किया जाता है, लेकिन इसका मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं होता। 

झिझिया बिहार के मिथिलांचल से निकला लोक नृत्य है, जिसका इतिहास सदियों पुराना माना जाता है। इस नृत्य को मां दुर्गा की आराधना और तंत्र साधना से भी जोड़कर देखा जाता है। आइए जानें झिझिया नृत्य क्यों किया जाता है और इसका इतिहास क्या है।    

क्या है झिझिया नृत्य का इतिहास?

झिझिया का संबंध बिहार की लोक आस्था से जुड़ा है। माना जाता है कि इस नृत्य की शुरुआत 8वीं या 9वीं सदी में हुई थी और मां दुर्गा और ब्रह्म बाबा को समर्पित है। इस नृत्य को महिलाएं अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए करती हैं, ताकि किसी की बुरी नजर उनसे दूर रहे। इतना ही नहीं, इस नृत्य को काले जादू से बचने के लिए भी किया जाता है। इस नृत्य को परिवार की सुरक्षा के लिए किया जाता है। 

क्या है झिझिया की खासियत?

झिझिया दूसरे नृत्यों से काफी अलग है। इस नृत्य को सिर्फ महिलाएं ही करती हैं। इसमें पुरुष शामिल नहीं होते। साथ ही, इसमें छेद वाले मटके का खास महत्व होता है। झिझिया की खासियत है कि महिला अपने सिर पर बहुत सारे छेद वाला मटका रखती है, जिसमें दीया जलता है।

अगर कोई डायन मटके के छेदों को गिन ले, तो नर्तक की मृत्यु हो सकती है। इसलिए मटके में बहुत सारे छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं, ताकि कोई इसे गिन न पाए। इस नृत्य के लिए पारंपरिक लोकगीत गाए जाते हैं, जिनकी धुन काफी मजेदार होती है और महिलाएं इन पर शानदार नृत्य करती हैं। 

कैसे किया जाता है ये नृत्य?

झिझिया अकेले नहीं, बल्कि समूह में किया जाता है। महिलाएं एक साथ शाम को इकट्ठा होती हैं और झिझिया नृत्य करती हैं। नर्तकियां पारंपरिक तरीके से साड़ी पहनती हैं, जिसका पल्ला आगे की तरफ रखा जाता है और खूबसूरत गहनें पहनती हैं। 

इस नृत्य के लिए घड़े में कई छेद किए जाते हैं और उन्हें सजाया जाता है, जिसे सिर पर रखकर नर्तकियां नृत्य करती हैं। महिलाएं झिझिया गीतों और वाद्य यंत्रों की धुन पर घूमते हुए नृत्य करती हैं और इस मटके को सिर पर बैलेंस करती हैं।