"मैंने गलत तो नहीं कहा?" अगर बातचीत के बाद घंटों सोचते हैं, तो ओवरथिंकिंग के 4 संकेतों पर दें ध्यान
जब हर छोटी बात आपके दिमाग में चौबीसों घंटे घूमने लगे, तो समझ जाइए कि आप 'ओवरथिंकिंग' के जाल में फंस चुके हैं। ...और पढ़ें

क्या आप जरूरत से ज्यादा सोचते हैं? ये संकेत बताते हैं कि आप ओवरथिंकर हो सकते हैं (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में छोटी-मोटी बातों पर चिंता करना एक आम बात है, लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब कोई एक ही बात आपके दिमाग में कैसेट की तरह बार-बार बजने लगे।
अगर आप हर स्थिति का बिना वजह बार-बार विश्लेषण करते रहते हैं, तो आपको सावधान होने की जरूरत है। आपकी यह आदत मानसिक तनाव और थकावट का एक बहुत बड़ा कारण बन सकती है। आइए, दिल्ली के पीएसआरआई अस्पताल की कंसल्टेंट साइकोलॉजिस्ट, अर्पिता कोहली से इस बारे में डिटेल में समझते हैं।

(Image Source: AI-Generated)
बीती बातों में उलझे रहना
क्या आपके साथ कभी ऐसा होता है कि किसी से बातचीत खत्म होने के बाद आप घंटों यह सोचते रहते हैं कि "क्या मैंने सही बात कही थी?" या "सामने वाले ने मेरे बारे में क्या सोचा होगा?" अगर आप अपनी छोटी-छोटी गलतियों को भी आसानी से नहीं भूल पाते और हमेशा पुराने अनुभवों या भविष्य की चिंताओं के भंवर में फंसे रहते हैं, तो यह ओवरथिंकिंग की साफ शुरुआत है।
हमेशा सबसे बुरे की कल्पना करना
ओवरथिंकिंग का एक बहुत बड़ा लक्षण है, हर छोटी बात में सबसे खराब स्थिति की कल्पना करना। उदाहरण के लिए, अगर किसी ने आपका फोन नहीं उठाया या आपके मैसेज का जवाब देने में थोड़ी देर कर दी, तो दिमाग किसी अनहोनी या समस्या के बारे में सोचने लगता है। लगातार उपजने वाली यह बेवजह की चिंता आपके मन में भारी बेचैनी पैदा कर सकती है।
फैसले लेने में हिचकिचाहट
जो लोग जरूरत से ज्यादा सोचते हैं, उन्हें निर्णय लेने में काफी परेशानी होती है। क्या आप भी छोटे-छोटे फैसले लेने में बहुत ज्यादा समय लगाते हैं? क्या आप बार-बार अपना फैसला बदलते हैं और हमेशा "अगर ऐसा हो गया तो क्या होगा?" जैसी उधेड़बुन में उलझे रहते हैं? ये आदतें आपके आत्मविश्वास पर बहुत बुरा असर डाल सकती हैं।
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नींद और सेहत पर असर
जरूरत से ज्यादा सोचने की यह आदत सिर्फ आपकी मानसिक शांति ही नहीं छीनती, बल्कि यह आपकी रातों की नींद और आपके मूड को भी खराब कर सकती है। रात को बिस्तर पर लेटने के बाद भी दिमाग का लगातार दौड़ते रहना, एक ही बात को पकड़ कर बैठे रहना और मानसिक रूप से बेहद थका हुआ महसूस करना, यह बताता है कि ओवरथिंकिंग आपके रोजमर्रा के जीवन को नुकसान पहुंचा रही है।
क्या है इसका समाधान?
अर्पिता कोहली के अनुसार, किसी विषय पर गहराई से विचार करना हमेशा बुरा नहीं होता है, लेकिन जब यही आदत आपकी जिंदगी में तनाव बढ़ाए और आपके रोज के कामों में रुकावट डालने लगे, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस परेशानी से बाहर आने के लिए अपनी सोच को संतुलित करने का प्रयास करें, 'माइंडफुलनेस' अपनाएं और अगर जरूरत पड़े तो किसी मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेने में हिचकिचाएं नहीं।
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