रंगोली की जगह स्टीकर और दीयों के बदले लाइट्स... जमाने के साथ आज कितना बदल गया है दीवाली मनाने का तरीका?
दीवाली मनाने के पारंपरिक तरीकों में समय के साथ काफी बदलाव आया है, जहां दीयों और हाथ से बनी रंगोली ...और पढ़ें

बचपन से आज तक कैसे बदल गया दीवाली मनाने का अंदाज? (Image Source: AI-Generated)
HighLights
दीयों की जगह अब प्लग-एंड-प्ले लाइट्स का चलन बढ़ा
रंगोली की जगह रेडीमेड स्टीकर, सफाई प्रोफेशनल ऐप्स से
मिठाई की जगह चॉकलेट, ऑनलाइन बधाई और शॉपिंग
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। त्योहारों की सुगबुगाहट शुरू होते ही दीवाली का उत्साह आज भी हर चेहरे पर नजर आने लगता है, लेकिन बचपन की दीवाली और आज की दीवाली में एक बड़ा फासला आ चुका है।
जी हां, रोशनी और खुशियों का यह पर्व आज भी हमारे दिलों के उतने ही करीब है, बस समय की कमी और भागदौड़ भरी जिंदगी ने इसे मनाने के तरीके में आधुनिकता का एक नया रंग घोल दिया है। आइए जानते हैं कैसे।

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दीयों की मेहनत की जगह 'प्लग-एंड-प्ले' वाले उजाले ने ली
एक वक्त था जब दीवाली से कई दिन पहले ही मिट्टी के दीयों को पानी में भिगोकर रखा जाता था। उन्हें धूप में सुखाना, उनमें रुई की बत्तियां लगाना और सरसों का तेल भरना पूरे परिवार का एक साझा काम होता था। आज उनकी जगह खुशबूदार कैंडल्स, फ्लोटिंग टी-लाइट्स और बिजली की रंग-बिरंगी झालरों ने ले ली है। अब बस एक प्लग लगाते ही पूरा घर जगमगा उठता है। मिट्टी के दीये आज भी आते हैं, लेकिन अक्सर उनका इस्तेमाल सिर्फ पूजा घर या शगुन के तौर पर ही सिमट कर रह गया है।
घंटों की रंगोली से चंद मिनटों के डिजाइनर स्टीकर तक
घर को सजाने का तरीका भी अब पूरी तरह से स्मार्ट और इंस्टेंट हो गया है। घंटों बैठकर अलग-अलग रंगों से आंगन में रंगोली उकेरने का सब्र अब कम ही देखने को मिलता है। इसकी जगह रेडीमेड रंगोली स्टीकर ने ले ली है। फर्श पर बस एक स्टीकर चिपकाया और चंद मिनटों में डिजाइनर रंगोली तैयार। दरवाजे के दोनों ओर रोली और सिंदूर से 'शुभ-लाभ' और 'स्वास्तिक' बनाने की पुरानी परंपरा को भी अब बाजार में मिलने वाले एक से बढ़कर एक डिजाइनर एक्रिलिक और वेलवेट स्टीकर्स ने बदल दिया है।
गुजिया की जगह चॉकलेट और मुलाकातों की जगह 'वॉट्सऐप'
सिर्फ सजावट ही नहीं, मिठास और मुलाकातों का दौर भी अब बदल चुका है। घर में बनने वाली गुजिया, बेसन के लड्डू और शक्करपारे की जगह अब बेकरी के फैंसी चॉकलेट बॉक्सेस ने ले ली है। पहले लोग रिश्तेदारों के घर जाकर दीवाली की बधाइयां और मिठाई देते थे, जबकि आज यह काम वॉट्सऐप के फॉरवर्ड मैसेजेस, स्टीकर्स और वीडियो कॉल के जरिए दूर से ही पूरा हो जाता है।

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घर की सफाई का जिम्मा अब 'प्रोफेशनल क्लीनिंग' के हाथ
पहले दीवाली से एक महीने पहले ही घरों में सफेदी और कोने-कोने की सफाई का अभियान शुरू हो जाता था, जिसमें पूरा परिवार एक साथ जुटता था। पुराने संदूक, पंखे और जालों को साफ करना एक बड़ा टास्क होता था। आज समय की कमी के चलते यह जिम्मेदारी मोबाइल में मौजूद 'प्रोफेशनल डीप क्लीनिंग ऐप्स' ने ले ली है। अब बस फोन पर बुकिंग की जाती है और एक्सपर्ट्स की टीम आकर कुछ ही घंटों में मशीनों से पूरे घर को चकाचक कर जाती है।
खचाखच भरे बाजारों की रौनक से 'ऑनलाइन सेल' के डिस्काउंट तक
दीवाली की खरीदारी का मतलब ही हुआ करता था- परिवार के साथ भीड़-भाड़ वाले बाजारों में जाना, दुकानदारों से मोलभाव करना और ढेरों झोले उठाकर थक-हारकर घर लौटना। अब इस रौनक की जगह ई-कॉमर्स वेबसाइट्स की 'फेस्टिव मेगा सेल' ने ले ली है। कपड़ों से लेकर घर के राशन और सजावट तक, सब कुछ घर बैठे ऑनलाइन ऑर्डर हो जाता है। अब त्योहार की खरीदारी का उत्साह बाजार की सड़कों से उठकर मोबाइल की स्क्रीन तक सिमट गया है।
सादे मेवों के डिब्बों की जगह 'ई-गिफ्ट कार्ड्स' और 'लग्जरी हैंपर्स'
पहले पड़ोसियों और रिश्तेदारों को स्टील के डिब्बों में काजू-बादाम या सादे गत्ते वाले डिब्बों में सोनपपड़ी देना एक आम रिवाज था। आज गिफ्टिंग का अंदाज भी पूरी तरह फैंसी और हाई-टेक हो गया है। अब लोग डिजाइनर बास्केट्स, इंपोर्टेड स्नैक्स वाले हैंपर्स और यहां तक कि ऑनलाइन 'ई-गिफ्ट वाउचर्स' भेजना ज्यादा पसंद करते हैं, ताकि जिसे गिफ्ट मिले, वह अपनी सहूलियत और पसंद के हिसाब से खुद खरीदारी कर सके।
वक्त के साथ बदलाव आना तय है और आज की तेज-तर्रार जिंदगी में यह शॉर्टकट दीवाली हमारी सहूलियत भी बन गई है।
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