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    जब गिटार को नहीं मिलती थी इज्जत... एक लड़के ने बिना गुरु के कैसे बदल दिया इतिहास?

    Updated: Sat, 21 Feb 2026 02:09 PM (IST)

    आंद्रेस सेगोविया को 'फादर ऑफ मॉडर्न क्लासिकल गिटार' कहा जाता है। उन्होंने बिना किसी गुरु के गिटार बजाना सीखा और इसे लोकप्रिय बनाया। ...और पढ़ें

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    आंद्रेस सेगोविया: बिना गुरु के गिटार को दिलाया क्लासिकल संगीत में सम्मान (Picture Credit- Facebook)

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। म्यूजिक की दुनिया में गिटार को एक खास सम्मान और प्यार दिया जाता है। अपनी मधुर धुन से लोगों का दिल जीतने वाले मॉर्डन गिटार को लोकप्रिय बनाने का पूरा क्रेडिट आंद्रेस सेगोविया को जाता है। उन्हें 'फादर ऑफ मॉडर्न क्लासिकल गिटार' कहा जाता है। 

    संगीत जगत में उनके इस महान योगदान के लिए स्पेन सरकार ने साल 1981 में उन्हें 'Marqués de Salobreña' की उपाधि से सम्मानित किया था, जो स्पेन का एक बहुत बड़ा और प्रतिष्ठित सम्मान है। आइए आज आंद्रेस की बर्थ एनीवर्सिरी पर जानते हैं म्यूजिक से उनके प्यार की पूरी कहानी- 

    बचपन से ही था गिटार से प्यार

    आंद्रेस का जन्म 21 फरवरी, 1893 को स्पेन के अंडालूसिया में हुआ था। उन्हें बचपन से ही संगीत से बहुत लगाव था। उस जमाने में गिटार को पियानो या वायलिन जितनी इज्जत नहीं मिलती थी; इसे सिर्फ आम मनोरंजन का साधन माना जाता था। 

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    (Picture Credit- Facebook)

    लेकिन सेगोविया ने गिटार को ही अपनी जिंदगी का लक्ष्य बना लिया था। हैरान करने वाली बात यह है कि उन्होंने गिटार बजाना किसी गुरु से नहीं, बल्कि अपनी मेहनत से खुद सीखा और इसके उस्ताद बन गए।

    छोटी उम्र में ही दिखाया हुनर

    गिटार के प्रति अपने प्यार और जुनून के दम पर उन्होंने बहुत कम उम्र में ही स्टेज पर परफॉर्मेंस देना शुरू कर दिया। अपने अनोखे अंदाज से उन्होंने लोगों के बीच तेजी से अपनी एक खास पहचान बना ली। 

    आंद्रेस ने पुराने महान संगीतकारों (जैसे बाख) की धुनों को गिटार के लिए ढाला और नए संगीतकारों को गिटार के लिए नई धुनें बनाने के लिए प्रेरित किया। उनके कारण ही गिटार को क्लासिकल म्यूजिक में जगह मिली।

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    (Picture Credit- Facebook)

    बच्चों को सिखाए गिटार के गुर

    20वीं सदी में जब रिकॉर्डिंग तकनीक नई-नई आई थी, तब उन्होंने अपनी कई शानदार रिकॉर्डिंग्स कीं। आज भी ये रिकॉर्डिंग्स गिटार सीखने वालों के लिए एक मिसाल मानी जाती हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने अमेरिका और यूरोप के कई बड़े स्कूलों में बच्चों को गिटार के गुर भी सिखाए। उनके सिखाए हुए कई बच्चों ने आगे चलकर दुनिया भर में बड़ा नाम कमाया।

    मिले ग्रैमी समेत कई बड़े सम्मान 

    सेगोविया ने दुनिया भर में सैकड़ों कॉन्सर्ट किए और गिटार को वो मुकाम दिलाया, जो पहले सिर्फ पियानो को हासिल था। उनके इस महान सफर के लिए उन्हें 1974 में 'सोनिंग पुरस्कार', 1985 में 'एर्न्स्ट वॉन सीमेंस संगीत पुरस्कार' और 1986 में संगीत की दुनिया का सबसे बड़ा सम्मान 'ग्रैमी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड' मिला।

    1987 में देहांत

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    (Picture Credit- Facebook)

    सेगोविया ने 1986 में कैलिफोर्निया में अपनी जिंदगी की आखिरी मास्टरक्लास दी और अपना आखिरी कार्यक्रम 4 अप्रैल 1987 को मियामी में किया। 2 जून 1987 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। वह भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन दुनिया का हर क्लासिकल गिटारिस्ट आज भी उनके सिखाए तरीकों और उनके संगीत से प्रेरणा लेता है।