हवा में अचानक बॉलिंग या बैटिंग क्यों करने लगते हैं लड़के? मजेदार है इस आदत के पीछे की साइकोलॉजी
आपने देखा होगा कुछ लड़के अचानक बैटिंग या बॉलिंग करने की एक्टिंग करने लगते हैं। उनकी इस आदत के पीछे ...और पढ़ें

हवा में क्रिकेट खेलने की साइकोलॉजी (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हम भारतीयों के लिए क्रिकेट सिर्फ एक खेल नहीं है, बल्कि इमोशन है, खासकर लड़कों के लिए। यहां कि गलियों से लेकर पार्क और स्टेडियम्स तक में, लड़के क्रिकेट खेलते हुए जरूर मिल जाएंगे। अक्सर आपने अपने किसी दोस्त या भाई को देखा होगा कि वो अचानक हवा में बिना बॉल के बॉलिंग एक्शन या बिना बैट के बैटिंग एक्शन करते हुए देखा होगा।
उस समय न तो कोई मैच चल रहा होता है और न ही उनके हाथ में कोई बैट या बॉल होता है। फिर भी अचानक वो क्रिकेट खेलने जैसा एक्शन करने लगते हैं। देखने में ये थोड़ा अजीब जरूर लगता है, लेकिन असल में इसके पीछे साइकोलॉजी छिपी है। आइए जानें इसके पीछे के कारण।
मेंटल सिमुलेशन
इंसान का दिमाग का काफी उलझा हुआ होता है। जब हम किसी चीज को बार-बार करते हैं या उसमें बहुत रुचि रखते हैं, तो दिमाग उस एक्सपीरिएंस को बार-बार दोहराना चाहता है। इसे मेंटल सिमुलेशन कहते हैं। बिना बैट या बॉल के भी, कोई लड़का खेलने का एक्शन करता है, तो उसका दिमाग असल में उस खेल के एक्शन को सिमुलेट कर रहा होता है। दिमाग फैमिलियर एक्शन को दोहराकर एक थ्रिल और खुशी महसूस करता है, जो उसे असल में क्रिकेट खेलने से मिलती है।
बोरियत मिटाने का तरीका
खाली समय में जब हमारे पास कुछ करने या सोचने को नहीं होता, तो दिमाग बोरियत से बचने के तरीके ढूंढ़ने लगता है। ऐसे में दिमाग उन आदतों को याद करता है, जो उसे पसंद हो और आसान लगती हो। चलते-चलते अचानक बॉलिंग या बैटिंग का एक्शन करना दिमाग को बोरियत से बचाने का एक तरीका है। इन एक्शन से दिमाग को एक तरह का डोपामिन हिट मिलता है।
मसल मेमोरी
जो लोग अक्सर क्रिकेट खेलते हैं या रोज प्रैक्टिस करते हैं, उनके न्यूरो-मस्कुलर सिस्टम में वह एक्शन छप जाता है। इसे मसल मेमोरी कहते हैं। जब कोई काम बार-बार किया जाता है, तो शरीर को उसे दोहराने के लिए सोचने की जरूरत नहीं पड़ती। इसलिए कई लड़के, जो क्रिकेट में काफी रुचि रखते हैं और अक्सर खेलते भी हैं, अचानक चलते-फिरते बॉलिंग या बैटिंग जैसा एक्शन करते हैं। ये वो सोच समझकर नहीं करते, बल्कि उनकी मसल मेमोरी अचानक ट्रिगर होती है।
इमोशनल कनेक्शन
क्रिकेट कई लड़कों के लिए स्ट्रेस दूर करने का जरिया होता है। दिनभर के काम या पढ़ाई के बीच, ये काल्पनिक परफेक्ट स्विंग बॉल फेंकना या हवा में छक्का मारना, उन्हें थोड़ी देर के लिए रिलैक्स महसूस करवाता है। इसलिए ये इमैजिनरी क्रिकेट मैच उनके लिए स्ट्रेस बस्टर का काम करता है।
