क्या आपका बच्चा भी बात-बात पर हाथ उठाता है? एक्सपर्ट से जानें ये बुरी आदत छुड़ाने के 5 आसान तरीके
एक नन्हा और मासूम सा नजर आने वाला बच्चा अपने से बड़े या छोटे भाई-बहनों या दोस्तों पर हाथ उठाता है तो ये छोटे-छोटे ट्रिक्स आपकी मदद कर सकते हैं। ...और पढ़ें
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छोटे बच्चों की मारने-पीटने की आदत कैसे छुड़ाएं (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। छोटे बच्चों को देखकर हर किसी का मन होता है उसे गोद में लेकर प्यार करें, लेकिन कुछ बच्चे इस दौरान बाल खींचने लगते हैं या हाथों से मारते हैं। वैसे इस तरह का बिहेवियर ज्यादातर बच्चों में देखा जाता है, लेकिन कुछ बच्चों में यह व्यवहार काफी ज्यादा देखने को मिलता है।
बच्चे की इस हरकत से पेरेंट्स के साथ-साथ आस-पास के लोग भी असहज महसूस करने लगते हैं। इस तरह के बिहेवियर को कैसे कंट्रोल किया जा सकता है बता रही हैं चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट नम्रता सिंह।
क्या हैं इसके कारण
- इमोशनल डेवलपमेंट न होना: छोटे बच्चों में इमोशनल डेवलपमेंट नहीं होता, जिसकी वजह से वो समझ ही नहीं पाते कि उनके एक्ट से किसी को तकलीफ हो रही है।
- गेम मानता है: बच्चे के मारने पर जब किसी को चोट लगती है या तकलीफ होती है तो उसे यह गेम की तरह लगता है और वो इसे बार-बार दोहराता है।
- नींद की कमी या भूख: कई बार ऐसा भी देखा गया है कि बच्चे की नींद पूरी ना होने या भूखे होने पर भी बच्चा चिड़चिड़ाहट में बाल खींचता है या हाथ-पैर चलाता है।
- सोशल न होना: जो बच्चे अक्सर अकेले रहते हैं या लोगों से ज्यादा घुलते-मिलते नहीं, उनमें भी इस तरह का बिहेवियर देखा जाता है। न्यूक्लियर फैमिली में रहने वाले बच्चे लोगों से मिलने-जुलने पर असहज या असुरक्षित महसूस करते हैं।
- नकल उतारते हैं: यदि बच्चों के ग्रुप में कोई एक बच्चा ज्यादा हाथ-पैर चलाता है तो दूसरे बच्चे भी उसके इस व्यवहार को कॉपी करते हैं।
- हाइपरएक्टिविटी: कुछ बच्चों में हाइपरएक्टिविटी के लक्षण पाए जाते हैं। ऐसे बच्चों में भी मारने या चीजों को फेंकने की आदत देखी जाती है।
इस तरह करें मैनेज
- सबसे पहले बच्चे से दूर हट जाएं और उसे कुछ देर के लिए अकेला छोड़ दें।
- उसे ऐसी जगह पर ले जाएं, जहां उसका माइंड डायवर्ट हो सके।
- उन्हें पार्क ले जाएं और दूसरे बच्चों के साथ घुलने-मिलने या खेलने के लिए प्रोत्साहित करें।
- कुछ ऐसे गेम्स या एक्टिविटी में उन्हें शामिल करने की कोशिश करें जिसमें उनके हाथ-पैर ज्यादा मूव करते हों जैसे क्रिकेट, फुटबॉल खेलना, कराटे, ड्रम बजाना।
- बच्चे के सोने-जगने का एक तय रूटीन बनाएं और उसे ही फॉलो करें।
दांत निकलने की स्थिति में भी ऐसा होता है
बच्चों में इस उम्र में मिल्क टूथ आने की प्रक्रिया शुरू होती है, जिसकी वजह से उनके व्यवहार में चिड़चिड़ाहट या आक्रामकता देखी जा सकती है। इस स्थिति में किसी पीडाट्रिशियन या बच्चों के डॉक्टर को दिखाएं।
अगर जारी रहे यह आदत
डॉक्टर को दिखाने के बाद भी बच्चों में हाथ-पैर चलाने या बाल खींचने की आदत बनी रहती है तो किसी चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट से सलाह लें।
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