पेड़ों की जिंदा जड़ों से बने पुल और शीशे जैसी साफ नदी, मेघालय की संस्कृति और खूबसूरती कर देगी हैरान
मेघालय, जिसे बादलों का घर कहा जाता है, अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और झरनों के लिए मशहूर है।

मेघालय की खूबसूरती कर देगी हैरान (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के नॉर्थ-ईस्ट में बसा मेघालय अपनी खूबसूरती और बारिश के लिए जाना जाता है। क्या आप जानते हैं मेघालय दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसका मतलब बादलों का घर होता है? घने जंगलों, घुमावदार पहाड़ियों और पानी के झरनों से घिरा ये राज्य बेहद खूबसूरत है।
इतना ही नहीं, मेघालय को दुनिया में सबसे ज्यादा बारिश वाले स्थानों में से एक गिना जाता है। मौसिनराम और चेरापूंजी ऐसे क्षेत्र हैं, जहां सबसे ज्यादा बारिश होती है। यहां की हरी-भरी वादियां और मौसम इन जगहों को किसी खूबसूरत सपने जैसा बनाती हैं। आइए जानें इस राज्य से जुड़ी कुछ खास बातें
प्राकृतिक और खूबसूरत जगहें
नोंगरियाट गांव में रबर के पेड़ों की जीवित जड़ों को जोड़कर बने पुल, जिन्हें लिविंग रूट ब्रिज कहा जाता है, स्थानीय जनजातियों की कला का बेहतरीन नमूना है। इसके अलावा, मेघालय की दावकी नदी का पानी इतना साफ है कि आपको इस नदी के अंदर तक साफ दिखाई देता है।
मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग को पूर्व का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है, जो अपने एलिफेंट फॉल्स, नोकहालीकाई फॉल्स और उमियाम झील के लिए जाना जाता है। यहां का मावलिननॉन्ग पूरे एशिया के सबसे साफ गांवों में से एक माना जाता है।
मेघालय की सांस्कृतिक झलक
मेघालय की संस्कृति वहां की जनजातियां, गारो, खासी और जयंतिया के रिवाजों और परंपराओं से मिलकर बनी है। खासी जनजाति यहां की सबसे बड़ी जनजाति मानी जाती है, जो संगीत और शाद सुक मायनसीम जैसे उत्सवों के लिए जानी जाती है। गारो जनजाति अपनी लोक कला, पारंपरिक नृत्यों और वांगला उत्सव के लिए पहचानी जाती है। वहीं जयंतिया जनजाति कृषि से जुड़े बेहदीनखलम त्योहार के लिए मशहूर है।
मेघालय की संस्कृति की बात करें, तो यहां के समाज में मातृसत्ता देखने को मिलती है। यानी परिवार का नाम, संपत्ति आदि माता के परिवार से पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती है।
मेघालय का खान-पान
मेघालय का खाना काफी सादा होता है, लेकिन काफी स्वादिष्ट होता है। चावल यहां के खाने का अहम हिस्सा है। जादेह खासी समुदाय की खास डिश है, जिसे चावल, मांस और स्थानीय मसालों के साथ पकाया जाता है। वहीं दोह खलेह उबले मांस, बारीक कटे प्याज और हरी मिर्च के साथ तैयार किया जाता है। फर्मेंटेड सोयाबीन, तिल और स्थानीय हर्ब्स से बनी तुंगरिम्बाई भी काफी स्वादिष्ट होती है।
मेघालय की हस्तशिल्प और कला
मेघालय के कारीगर बांस और बेत के काम में माहिर होते हैं। इनसे वे सुंदर चटाइयां, टोकरियां और डेकोरेशन का सामान बनाते हैं। इसके अलावा, गारो जनजाति के बुने हुए रंग-बिरंगी पारंपरिक वस्त्र जैसे डाकमांडा यहां की संस्कृति की पहचान हैं।
