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    'थ्री इडियट्स' वाली पैंगांग लेक से नुब्रा वैली तक: हिमाचल की भीड़ छोड़ें, इस गर्मी लद्दाख में मनाएं छुट्टियां

    Updated: Fri, 12 Jun 2026 08:28 PM (IST)

    गर्मियों में भीड़भाड़ से बचने के लिए लद्दाख एक बेहतरीन विकल्प है, जहां प्राकृतिक सुंदरता और बौद्ध संस्कृति का अनूठा संगम है। पैंगांग लेक, नुब्रा वैली ...और पढ़ें

    HighLights

    1. गर्मियों में भीड़ से बचने के लिए लद्दाख बेहतर विकल्प

    2. पैंगांग लेक, नुब्रा वैली और मठ यहां के प्रमुख आकर्षण

    3. प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और रोमांच का अनूठा संगम

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गर्मियों में हर कोई परिवार के साथ पहाड़ों की ठंडी वादियों में शांति से छुट्टियां बिताना चाहते हैं, लेकिन उत्तराखंड-हिमाचल में टूरिस्ट डेस्टिनेशंस पर भीड़, ट्रैफिक जाम और बढ़ती गर्मी के चलते छुट्टियां बिताना सजा से कम नहीं है। 

    ऐसे में हिमालय की गोद में बसा लद्दाख आपके लिए छुट्टियां बिताने के लिए बिल्कुल परफेक्ट डेस्टिनेशन हो सकता है। बौद्ध धर्म की महायान शाखा और तिब्बती संस्कृति से प्रभावित लद्दाख के पूरे क्षेत्र में बौद्ध धर्म रचा-बसा नजर आता है। यहां आपको बौद्ध मठ यानी मोनेस्ट्री, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-बड़े स्तूप और बौद्ध भिक्षु हर जगह नजर आएंगे। आइए आपको बताते हैं इस गर्मियों की छुट्टियों में घूमने के लिए क्यों बेस्ट हैं लद्दाख की वादियां- 

    नेचुरल ब्यूटी से भरा लद्दाख

    धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध होने के साथ ही लद्दाख प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत है। यह अत्यंत ऊंचाई वाला क्षेत्र कोल्ड डेजर्ट के नाम से भी जाना जाता है, जहां निचले पहाड़ों पर कोई वनस्पति नहीं होती, वहीं ज्यादा ऊंचाई पर आपको बर्फ से ढके हुए पहाड़ नजर आते हैं। अगर आप नेचर लवर हैं, तो आपके लिए लद्दाख किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहां आपको पहाड़ों के साथ ही नदियां, खूबसूरत झीलें और बर्फ से ढके दर्रे भी मिलेंगे, जो यहां के आपके सुखद अनुभव को कई गुना बढ़ा देंगे। इसके अलावा आप यहां की खूबसूरती में चार-चांद लगाती इन जगहों का भी दीदार कर सकते हैं- 

    पैंगांग त्सो लेक

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    पैंगांग लेक

    लेह से 150 किलोमीटर दूर और 13,862 फीट की ऊंचाई पर स्थित पैंगांग लेक खारे पानी की एक बेहद खूबसूरत झील है, जो धूप के हिसाब से अपना रंग नीला, हरा या भूरा बदलने के लिए जानी जाती है। 134 किलोमीटर लंबी इस झील का 40% हिस्सा भारत में और 60% चीन के नियंत्रण वाले तिब्बत में है। 

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    चांगला पास

    'थ्री इडियट्स' फिल्म से मशहूर हुई इस झील तक पहुंचने के लिए 17,590 फीट ऊंचे 'चांगला पास' से होकर गुजरना पड़ता है। बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच स्थित इस झील के पास रात बिताने के लिए टेंट की सुविधा उपलब्ध है, हालांकि यहां घूमने जाने के लिए लेह प्रशासन से 'इनर लाइन परमिट' लेना अनिवार्य होता है। 

    नुब्रा वैली

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    बैक्ट्रियन केमल सफारी, नुब्रा वैली

    लेह से 120 किलोमीटर उत्तर में स्थित नुब्रा वैली को लद्दाख का बागीचा भी कहा जाता है। यह बेहद सुंदर और ठंडी रेगिस्तानी घाटी है। नुब्रा वैली पहुंचने के लिए वाहन चलने योग्य दुनिया के सबसे ऊंचे दर्रों में से एक 18,380 फीट ऊंचे खारदूंगला पास से होकर जाना पड़ता है। यहां हुंडर रेत के टीलों के बीच दो कूबड़ों वाले बैक्ट्रियन ऊंट की सवारी एक अलग ही अनुभव देती है। 

    इसके अलावा प्राकृतिक गर्म पानी का झरना पनामिक हॉट स्प्रिंग, रिवर राफ्टिंग और ट्रेकिंग भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। साथ ही नुब्रा घाटी के मुख्य केंद्र डिस्कित मोनेस्ट्री में मैत्रेयी बुद्ध की 108 फीट ऊंची प्रतिमा है। यहां आप दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर के बेस कैंप में भी जा सकते हैं, यहां तक जाने की पर्यटकों अनुमति है।

    संगम

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    सिंधु और जंस्कार नदी संगम

    लेह से 35 किलोमीटर दूर लेह-श्रीनगर राजमार्ग पर निम्मू गांव के पास यह सिंधु और जंस्कार नदी का संगम है। सिंधु नदी का नीला पानी और जंस्कार नदी का मटमैला हरा पानी यहां मिलते साफ दिखाई देते हैं। सिंधु नदी तिब्बत में मानसरोवर के निकट कैलाश पर्वतमाला के बोखरचू ग्लेशियर से निकलकर लद्दाख में प्रवेश करती है और जंस्कार नदी से मिलकर आगे पाकिस्तान होते हुए अरब सागर में मिल जाती है। यह जगह रिवर राफ्टिंग के लिए देश के सबसे ऊंचे स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। 

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    हाईएस्ट रिवर राफ्टिंग प्वाइंट

    लेह से संगम जाने के रास्ते में गुरुद्वारा पत्थर साहिब और मैग्नेटिक हिल भी पड़ते हैं। गुरुद्वारा पत्थर साहिब पहले सिख गुरु गुरु नानक जी की यहां आने की स्मृति में बनाया गया है। मैग्नेटिक हिल समुद्र तल से 14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां एक जगह पर इंजन बंद करके वाहन खड़ा करने पर वाहन ढलान के बजाय ऊंचाई की ओर जाने लगता है।

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    मैग्नेटिक हिल

    थिक्से मोनेस्ट्री

    लद्दाख में कई प्राचीन बौद्ध मठ हैं। थिक्से मोनेस्ट्री लेह शहर से 19 किलोमीटर दूर है। तिब्बत के पोटला पैलेस जैसा 12 मंजिला का यह मठ मध्य लद्दाख का सबसे बड़ा मठ है। यहां 49 फीट ऊंची बुद्ध की प्रतिमा भी है। इनके अलावा, प्रमुख बौद्ध मठ हेमिस मोनेस्ट्री, स्पितुक मोनेस्ट्री, आल्ची मोनेस्ट्री, लामायुरु मोनेस्ट्री भी हैं।

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    थिक्से मोनेस्ट्री

    लेह पैलेस

    लेह में नामग्याल पहाड़ी की चोटी पर बना नौ मंजिला लेह पैलेस लद्दाख के शाही परिवार का महल था। लकड़ी, पत्थरों और मिट्टी से बने इस महल को 17वीं शताब्दी में राजा सेंगे नामग्याल ने तिब्बत के ल्हासा स्थित पोटला पैलेस की शैली में बनवाया था।

    19वीं शताब्दी के मध्य में डोगरा सेनाओं के आक्रमण के बाद शाही परिवार करीब 15 किलोमीटर दूर स्टोक पैलेस में रहने लगा था। तब से अब तक शाही परिवार के सदस्य स्टोक पैलेस में ही रहते हैं। लेह पैलेस पर्यटकों के लिए खुला है और हाल ही में यहां लाइट एंड साउंड शो की भी शुरुआत की गई है।

    हॉल ऑफ फेम

    लेह शहर में स्थित वॉर मेमोरियल को हॉल ऑफ फेम कहा जाता है। यहां युद्ध स्मारक के साथ ही एक संग्रहालय भी है। यह वार मेमोरियल पाकिस्तान और चीन के साथ हुए युद्धों में भारतीय सेना के शौर्य को समर्पित है और इन युद्धों में शहीद हुए जांबाज सैनिकों की याद में बनाया गया है। हॉल ऑफ फेम में एक ऑडियो-विजुअल शो भी होता है, जो देश के वीर सैनिकों के अदम्य साहस और वीरता को दर्शाता है।

    कैसे पहुंचें लेह

    लेह पहुंचने के लिए हवाई और सड़क, दोनों विकल्प मौजूद हैं। आप नई दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़ या श्रीनगर से सीधे 'कुशोक बकुला रिंपोछे एयरपोर्ट' (लेह) के लिए फ्लाइट ले सकते हैं। हालांकि, फ्लाइट से सीधे लेह पहुंचने पर ऑक्सीजन की कमी के कारण 'माउंटेन सिकनेस' (सिरदर्द, सांस फूलना) का खतरा रहता है, इसलिए पर्यटकों को पहले दिन सिर्फ आराम करने की सलाह दी जाती है। 

    सड़क मार्ग से जाने वाले यात्री बस या अपनी गाड़ी से मनाली या श्रीनगर के रास्ते लेह पहुंच सकते हैं; जिनमें श्रीनगर-कारगिल-लेह मार्ग को कम ऊंचाई के कारण अधिक सुरक्षित और आरामदायक माना जाता है। 

    टूरिस्ट फ्रेंडली बना लद्दाख 

    • पर्यटकों को दी जा रही नई सुविधाओं के चलते मई 2026 में 72,834 टूरिस्ट लद्दाख पहुंचे, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है!
    • पर्यटकों की सुविधा के लिए 1 अप्रैल से लेह आने वाली डेली फ्लाइट्स की संख्या 8 से बढ़ाकर सीधे 18 कर दी गई है।
    • 'लद्दाख बाइक वीक' के लिए खास समझौता हुआ है। साथ ही एडवेंचर, वाइल्डलाइफ, इको और एस्ट्रो-टूरिज्म (खगोल पर्यटन) पर जोर दिया जा रहा है।
    • टूरिस्ट्स के लिए आसान 'इंटीग्रेटेड रजिस्ट्रेशन सिस्टम', नए लद्दाखी 'स्मार्ट बस शेल्टर' और 'लद्दाख टूरिज्म पोर्टल' की शानदार शुरुआत हुई है।
    • होटलों और गेस्ट हाउसों को 'उद्योग' का दर्जा दिया गया है। अब टूर ऑपरेटर्स भी आपको खास पारंपरिक यूनिफॉर्म और ब्रांडेड गाड़ियों में बेहतरीन सर्विस देते नजर आएंगे।
    • बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी में सुधार का ही असर है कि विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी 15% की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है।

    लेखक- सौरभ श्रीवास्तव (दैनिक जागरण दिल्ली संस्करण के मेट्रो एडिटर हैं।)