मध्य प्रदेश का वो ऐतिहासिक किला, जहां के राजा ने जादू से किया था रानी को कैद; आल्हा-ऊदल से जुड़ी है कहानी
मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में स्थित मल्हारगढ़ किला 12वीं शताब्दी में राजा ज्वाला सिंह द्वारा निर्मित एक ऐतिहासिक धरोहर है। ...और पढ़ें

मल्हारगढ़ किले की कहानी (Picture Courtesy: Instagram)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में ऐसे कई किले मौजूद हैं, जो इस देश के इतिहास की गवाही देते हैं। इन्हीं में मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित मल्हारगढ़ का किला भी शामिल है।
ये प्राचीन किला अपनी वास्तुकला के लिए तो जाना ही जाता है, साथ ही इस किले की आल्हा-उदल से भी जुड़ी एक दिलचस्प कहानी है। आइए जानें मल्हारगढ़ किले का इतिहास और आल्हा और उनकी पत्नी रानी मछला से जुड़ी दिलचस्प कहानी।
मल्हारगढ़ किले का इतिहास
माना जाता है कि बेतवा नदी के किनारे स्थित इस किले का निर्माण 12वीं शताब्दी में राजा ज्वाला सिंह करवाया था। इस किले के चारों ओर बनी मजबूत पत्थरों की दीवारें और बेतवा नदी के कारण यह किला अभेद्य माना जाता था। किले के अंदर सैन्य बैरक, तोपें रखने की जगह और जलाशय मौजूद हैं। हालांकि, सही रखरखाव की कमी में आज में इस ऐतिहासिक धरोहर के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हो रहे हैं।
इस किले के अंदर बना मछला कुंड, जिसका इतिहास काफी दिलचस्प है, रखराव की कमी के कारण बुरी हालत में और इसकी दीवारें ढह रही हैं। इस किले में आज भी कई बड़े तोप देखने को मिलते हैं। हालांकि, स्थानीय चोरियों की वजह से महल में मौजूद कई तोपें अब गायब हो चुकी हैं।
आल्हा की पत्नी रानी मछला को किया गया था कैद
मल्हारगढ़ से जुड़ी एक कहानी काफी प्रचलित है। इस कहानी के मुताबिक, रानी मछला अपनी सहेलियों के साथ बाग में झूला झूल रही थीं। उसी समय वहां से पथरीगढ़ के राजा ज्वाला सिंह शिकार खेलते हुए गुजरे। राजा ज्वाला सिंह रानी मछला की खूबसूरती देखकर उन पर मोहित हो गए और उन्हें हासिल करने की योजना बनाने लगे।
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कहा जाता है कि राजा ज्वाला सिंह ने जादुई शक्तियों से रानी मछला को सोते हुए उनके बिस्तर समेत अदृश्य कर दिया और मल्हारगढ़ के किले में ले आए।
ज्वाला सिंह ने रानी मछला को मल्हारगढ़ के अंदर एक पानी का कुंड में बंदी बनाकर रखा और उन्हें अपनी रानी बनने के लिए मनाने लगा, लेकिन रानी मछला नहीं मानी। कहा जाता है कि जिस कुंड में ज्वाला सिंह ने रानी मछला को बंदी बनाकर रखा था, वहीं कुंड आज मछला कुंड के नाम से जाना जाता है।
मल्हारगढ़ की जंग और रानी की आजादी
जब आल्हा-ऊदल को रानी मछला के अपहरण की खबर मिली, तो आल्हा और उनके वीर भाई ऊदल ने अपनी विशाल सेना के साथ मल्हारगढ़ पर चढ़ाई शुरू कर दी। राजा ज्वाला सिंह और आल्हा-ऊदल के बीच घमासान युद्ध हुआ, जिसमें ज्वाला सिंह की हार हुई।
कहा जाता है कि ये युद्ध इतना भयानक था कि बेतवा नदी का पानी लाल हो गया था। इस युद्ध में आल्हा-ऊदल के हाथों ज्वाला सिंह की हार हुई और वे रानी मछला को मुक्त करवाकर वापस अपने राज्य ले गए।