कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों के लिए संकट बना कैनाइन डिस्टेंपर वायरस, NCTA ने जारी की एडवाइजरी
मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) बाघों के लिए गंभीर खतरा बन गया है, जिससे अब तक छह बाघों की मौत हो चुकी है। राष् ...और पढ़ें

कान्हा में बाघों पर संकट (प्रतीकात्मक चित्र)

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों के लिए कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) संकट बन गया है। इस वायरस से बाघिन और चार शावकों का पूरा कुनबा खत्म हो चुका है। एक अन्य बाघ की पिछले दिनों मौत हो गई। अब तक छह बाघों को अपना शिकार बना चुके कुत्तों से फैलने वाले इस वायरस ने कान्हा पार्क प्रबंधन की ही नहीं, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की चिंता भी बढ़ा दी है। अब इस वायरस का संक्रमण बाघों में फैलने से रोकने के लिए एनटीसीए ने एडवाइजरी जारी की है।
बता दें कि इस वायरस से बचाव के लिए प्रतिवर्ष जंगल व गांव के समीप विचरण करने वाले कुत्तों का टीकाकरण किया जाता रहा है। इसके बाद भी कान्हा में इस वायरस की चपेट में बाघों के आने से वन अमले की नाकामी सामने आ रही है।
बाघ रहवासों के आसपास टीकाकरण जरूरी
कारण यह है कि एनटीसीए की चेतावनी में अभयारण्यों और अन्य बाघ रहवासों के आसपास कुत्तों के टीकाकरण को आवश्यक बताया गया है। बाघ अभयारण्यों में और उसके आसपास सक्रिय और निष्क्रिय रोग निगरानी प्रणालियों को मजबूत करने के लिए कहा गया है, जिसमें जंगली मांसाहारी जीवों की नियमित स्वास्थ्य निगरानी भी शामिल है।
एनटीसीए ने राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों से अनुरोध किया है कि वे उपरोक्त उपायों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करें। उल्लेखनीय है कि जनवरी से लेकर अब तक साढ़े चार माह में मध्य प्रदेश में वैसे भी 33 बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें कई का शिकार किया गया।
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बाघों में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की रोकथाम के लिए उपाय किए गए हैं। एहतियात बरतते हुए कुत्तों को टाइगर रिजर्व सीमा से दूर रखने का प्रयास कर रहे हैं। कुत्तों का टीकाकरण भी कराने पर जोर है। अन्य टाइगर रिजर्व में भी सतर्कता बरती जा रही है।
-डा. समीता राजौरा, मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक, मप्र वन
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