कभी जिस कोर्ट में खुद सुनाए न्यायिक फैसले, वहीं कठघरे में खड़ी दिखीं गिरिबाला सिंह; चेहरे पर नजर आई लाचारी
पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को बहू त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में भोपाल कोर्ट में पेश किया गया। सीबीआई ने दोन ...और पढ़ें

सीबीआई की हिरासत में गिरिबाला सिंह (मध्य में)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, भोपाल। वक्त का पहिया जब घूमता है, तो अर्श से फर्श पर आने में देर नहीं लगती। कुछ ऐसा ही मंजर शुक्रवार को भोपाल जिला न्यायालय में देखने को मिला। साल 2021 से 2023 के बीच, पूरे 19 महीनों तक जिस अदालत की प्रशासनिक कमान और रखरखाव का जिम्मा संभालने वाली सर्वोच्च न्यायिक अधिकारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह थीं, आज वह खुद कोर्ट के कठघरे में एक लाचार आरोपित की तरह खड़ी थीं।
63 वर्षीय सेवानिवृत्त न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके (निलंबित) अधिवक्ता बेटे समर्थ सिंह को सीबीआई ने उनकी बहू त्विषा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी शोभना भाल्वे के न्यायालय में पेश किया। कोर्ट ने दोनों मुख्य आरोपितों को पांच-पांच दिनों की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया है।
अदालत परिसर में बदला रहा माहौल
शुक्रवार दोपहर करीब 12:38 बजे जब गिरिबाला सिंह को कोर्ट परिसर लाया गया, तो नीचे से लेकर ऊपर तक हर वकील और कर्मचारी की जुबान पर एक ही चर्चा थी, वो आ गईं। कभी रौब और गरिमा के साथ अदालत की अगुआई करने वाली पूर्व जज के चेहरे पर आज सिर्फ बेबसी और लाचारी के भाव थे।
उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था, मानो वह खामोशी से कह रही हों, मुझे इस कोर्ट में नहीं, बल्कि इसके बाहर ही पेश कर लेते...। सालों तक उनके साथ काम करने वाले कई वकीलों की आंखें भी इस दृश्य को देखकर हेरान थी। सहकर्मियों के दिलों में एक ही टीस थी कि वक्त इंसान को क्या दिन दिखवा देता है, कुछ कहा नहीं जा सकता।
खबरें और भी
बयानों में विरोधाभास, आमने-सामने होगी पूछताछ
सीबीआई ने कोर्ट में पुलिस रिमांड का आवेदन पेश करते हुए कहा कि दोनों आरोपित जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। मां और बेटे के बयानों में भारी विरोधाभास है, इसलिए सच्चाई सामने लाने के लिए दोनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करना जरूरी है। बचाव पक्ष द्वारा रिमांड का विशेष विरोध न किए जाने पर अदालत ने पांच दिन की रिमांड मंजूर कर ली।
शुरुआत से ही देश और प्रदेश में चर्चा का विषय रहे इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए ही जांच सीबीआई को सौंपी गई है। अब देखना यह है कि कानून की रक्षक रहीं पूर्व जज और उनके बेटे से पूछताछ में इस संदिग्ध मौत के क्या राज बाहर आते हैं।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।