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    तात्या टोपे की चिट्ठी से लेकर रामचरितमानस की उर्दू पांडुलिपि तक: MP में 10 लाख से ज्यादा ऐतिहासिक धरोहरों को डिजिटल रूप में सहेजा

    Updated: Tue, 26 May 2026 11:09 PM (IST)

    मध्य प्रदेश में ज्ञान भारतम मिशन के तहत 10 लाख से अधिक ऐतिहासिक पांडुलिपियों और दस्तावेजों को डिजिटल किया गया है। इनमें रामचरितमानस की दुर्लभ उर्दू पा ...और पढ़ें

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    ऐतिहासिक दस्तावेजों का डिजिटल संरक्षण (AI Generated Image)

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    राज्य ब्यूरो, भोपाल। सांस्कृतिक धरोहरों को संजोने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर प्रारंभ किए गए ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत मध्य प्रदेश में विभिन्न संग्रहालयों और आम लोगों के पास उपलब्ध 10 लाख से अधिक पांडुलिपियों-पत्रों, फोटो और दस्तावेज को पोर्टल में अपलोड किया गया है।

    चित्रकूट में मिली रामचरितमानस की दुर्लभ पांडुलिपियां

    चित्रकूट स्थित तुलसी शोध संस्थान में रामचरितमानस की उर्दू, पाली और संस्कृत में अनूदित लगभग 500 पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं। इनमें से करीब 30 पांडुलिपियों के कालखंड का आकलन किया जा चुका है, जबकि शेष पर अध्ययन जारी है।

    1857 के संग्राम से जुड़े दस्तावेज भी आए सामने

    इसी तरह से मध्य प्रदेश पुरातत्व अभिलेखागार में वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी पांडुलिपियां मिली हैं। इनमें अधिकतर बुंदेली बोली में लिखी हैं। कुछ तो फट गई हैं। इनमें अधिकतर वे हैं, जो रियासतों ने विलय के बाद सरकार को उपलब्ध कराई थीं। राज्य पुरातत्व विभाग के अखिलेखागार में यह पांडुलिपियां रखी हैं, जिनके डिजिटाइजेशन का काम चल रहा है।

    तात्या टोपे का दुर्लभ पत्र

    इन्हीं में से 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के समय तात्या टोपे द्वारा लिखी गई वह चिट्ठी भी शामिल है, जिसमें उन्होंने बुंदेलखंड की विभिन्न रियासतों के सूबेदार, सरदारों को लिखकर कहा था कि वह अंग्रेजो से लड़ने के लिए जो रणनीति बनाएंगे वह उन्हें स्वीकार होगी।

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    रानी लक्ष्मीबाई की पाती भी मिली

    संग्राम से जुड़े करीब डेढ़ सौ दस्तावेज हैं। इसमें झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का भी एक पत्र है जो उन्होंने टीकमगढ़ की रानी लड़ई दुलैया को लिखा था। इसमें कहा था, ''आप मेरी बड़ी बहन जैसी हैं। एकता बनाए रखने का आग्रह करती हूं। आपसी फूट के प्रति सचेत करती हूं।''

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    लोगों से भी मांगा जा रहा सहयोग

    राज्य पुरातत्व संचालनालय एवं अभिलेखागार की संयुक्त संचालक डॉ. मनीषा शर्मा ने बताया कि एप पर सर्वाधिक पांडुलिपियां अपलोड करने के मामले में राजस्थान, गुजरात के बाद तीसरे पर पर मध्य प्रदेश है। प्रधानमंत्री के आह्वान पर आम लोग भी अपने पास उपलब्ध पांडुलिपियां उपलब्ध करा रहे हैं। इन पांडुलिपियों में एक लाख 53 हजार ऐसी भी हैं, जो वर्ष 2004 के पहले केंद्र सरकार ने प्रदेश में एक सर्वे के दौरान संग्रहित स्थलों से खोजी थीं।

    आम व्यक्ति या संस्थाओं को उनके पास उपलब्ध पांडुलिपियां सौंपने के लिए आगे आना चाहिए। सौंपने के बाद स्कैन कर मूल प्रति वापस कर दी जाएगी। पोर्टल में उपलब्ध हो जाने के बाद मिशन के अंतर्गत आम लोगों को पढ़ने के लिए उपलब्ध कराया जा सकेगा।
    - मदन कुमार नागरगोजे, आयुक्त, पुरातत्व विभाग।