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    BRICS कृषि मंत्रियों का इंदौर से दुनिया को संदेश: ‘युद्ध नहीं, समन्वय’ से मजबूत होगी वैश्विक खाद्य सुरक्षा

    Updated: Fri, 12 Jun 2026 10:56 PM (IST)

    इंदौर में ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक शुरू हुई, जिसमें वैश्विक खाद्य सुरक्षा और किसानों की समृद्धि पर चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ...और पढ़ें

    इंदौर में आयोजित ब्रिक्स समूह देशों के कृषि मंत्रियों की बैठक में भारत सहित आठ देशों के 14 कृषि मंत्री हुए शामिल।

    इंदौर में आयोजित ब्रिक्स समूह देशों के कृषि मंत्रियों की बैठक में भारत सहित आठ देशों के 14 कृषि मंत्री हुए शामिल।

    HighLights

    1. इंदौर में ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक का शुभारंभ।

    2. वैश्विक खाद्य सुरक्षा, किसान समृद्धि पर गहन चर्चा हुई।

    3. छोटे किसानों को सशक्त बनाने पर केंद्रीय मंत्री का जोर।

    डिजिटल डेस्क, इंदौर। इंदौर में शुक्रवार को ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक का शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ 10 आमंत्रित देशों के 20 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का केंद्र बिंदु वैश्विक खाद्य सुरक्षा, किसानों की समृद्धि और कृषि क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग रहा।

    उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि दुनिया की खाद्य सुरक्षा का भविष्य छोटे और सीमांत किसानों की मजबूती पर निर्भर है। जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव और बाजार की अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों के बीच ब्रिक्स देशों के लिए साझा समाधान तलाशना समय की आवश्यकता है।

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    उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 87 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं। ऐसे किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना समावेशी विकास और कृषि प्रगति की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता और सुरक्षा प्रदान की जा रही है।

    कृषि साझेदारी के लिए भारत का शांति संदेश

    शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत हमेशा शांति, सहयोग और साझेदारी का समर्थक रहा है। प्रधानमंत्री का मंत्र ‘युद्ध नहीं, शांति; संघर्ष नहीं, समन्वय’ केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक कृषि सहयोग के लिए भी मार्गदर्शक सिद्धांत बन सकता है।

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    उन्होंने कहा कि कृषि केवल खाद्यान्न उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है। भारत की लगभग 43 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि क्षेत्र पर निर्भर है। ऐसे में किसानों को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सलाह और टिकाऊ खेती की पद्धतियों से जोड़ना आवश्यक है।

    प्राकृतिक खेती और तकनीक पर जोर

    केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश से शुरू किए गए देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ के माध्यम से किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी और कृषि सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। इससे प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है, साथ ही खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने में मदद मिल रही है।

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    उन्होंने विश्वास जताया कि ब्रिक्स देशों के बीच अनुभवों, तकनीक और नीतिगत सहयोग का आदान-प्रदान वैश्विक कृषि क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा।

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    बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर भी उपस्थित रहे।

    शनिवार को जारी होगा ‘इंदौर डिक्लेरेशन‘

    ब्रिक्स सम्मेलन के आखिरी दिन शनिवार को ‘इंदौर डिक्लेरेशन‘जारी होगा। इसमें ब्रिक्स समूह देशों के वैश्विक कृषि, खाद्य सुरक्षा और किसानों के अधिकार, तकनीक के उपयोग जैसे मुद्दों पर अहम निर्णय लिए जाएंगे।