विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'मैं इसे बिल्कुल नहीं मानता', SIR विवाद पर पृथ्वीराज चव्हाण ने खारिज की राज ठाकरे की चुनाव बहिष्कार की अपील

Published: Mon, 05 Oct 2026 02:04 AM (IST)

महाराष्ट्र में एसआईआर और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है, जिसमें राज ठाकरे की ...और पढ़ें

चव्हाण ने राज ठाकरे की बहिष्कार अपील ठुकराई

चव्हाण ने राज ठाकरे की बहिष्कार अपील ठुकराई

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र में एसआईआर और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे के चुनावों को बहिष्कार करने की अपील पर कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने असहमित जताई है।

चव्हाण ने स्पष्ट किया कि चुनाव में भाग लेना एक लोकतांत्रिक अधिकार है और बहिष्कार करना सही रणनीति नहीं है।

ठाकरे बंधुओं का विराट गर्जना मोर्चा

रविवार को MNS प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई में संयुक्त विराट गर्जना मोर्चा का नेतृ्त्व किया। इस विरोध मार्च में कांग्रेस और NCP (शरद पवार) के नेता भी शामिल है।

मोर्चे के जरिए ठाकरे बंधुओं ने SIR प्रक्रिया को तुरंत रद्द करने और आगामी चुनावों में ईवीएम की जगह बैलेट पेपर प्रणाली वापस लाने की मांग की।

राज ठाकरे ने लगाए आरोप

राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों के दौरान 40 से 60 लाख फर्जी मतदाता जोड़े गए थे, और अब SIR प्रक्रिया के नाम पर लगभग दो करोड़ वैध मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने सवाल उठाया कि बिना किसी आपातकालीन स्थिति के यह विशेष संशोधन क्यों लागू किया जा रहा है। वहीं, उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयुक्तों की चयन समिति से मुख्य न्यायाधीश को हटाए जाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए।

'वोट नहीं, चुनाव की चोरी है'

हालांकि चव्हाण ने राज ठाकरे की चुनाव बहिष्कार की मांग को खारिज कर दिया, लेकिन उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर अपना पक्ष रखा। चव्हाण ने 2024 के चुनावों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कई डुप्लिकेट नाम शामिल थे, जिन्होंने एक से अधिक बार मतदान किया।

चव्हाण ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस का समर्थन करने वाले कई अल्पसंख्यक और गरीब मतदाताओं को जानबूझकर उनके वोटिंग अधिकारों से वंचित कर दिया गया। उन्होंने इस स्थिति को वोट की चोरी नहीं, बल्कि पूरे चुनाव की चोरी बताया।