विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

32 साल पुराने ठाणे-नासिक हाईवे हादसे में ऐतिहासिक फैसला, पीड़ित परिवार को मिलेगा 33.6 करोड़ का मुआवजा

Updated: Fri, 28 Aug 2026 09:14 AM (IST)

मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने 1994 के ठाणे-नासिक हाईवे हादसे में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ...और पढ़ें

ट्रिब्यूनल ने 32 साल पुराने मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

ट्रिब्यूनल ने 32 साल पुराने मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)

HighLights

  1. ट्रिब्यूनल ने 32 साल पुराने मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया

  2. पीड़ित परिवार को 33.6 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलेगा

  3. ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को भुगतान का निर्देश दिया गया

डिजिटल डेस्क, मुंबई। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) ने देश में अब तक के सबसे बड़े एक्सीडेंटल मुआवजों में से एक देने का ऐतिहासिक आदेश दिया है। दरअसल, ट्रिब्यूनल ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को दुबई में रहने वाली एक भारतीय इंटीरियर डिजाइनर के पीड़ित परिवार को ब्याज सहित 33.6 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है।

32 साल पुराना मामला

यह मामला आज से करीब 32 साल पुराना है। जब 3 जुलाई 1994 को ठाणे-नासिक हाईवे पर हुई दो गाड़ियों की आमने-सामने की भीषण टक्कर में इंटीरियर डिजाइनर महिला की मौत हो गई थी। अब बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर ट्रिब्यूनल ने मुआवजे की राशि का पुनर्निर्धारण किया है।

ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने किया था दोनों गाड़ियों का बीमा

3 जुलाई 1994 को हुए इस हादसे में शामिल दोनों वाहनों का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के पास था। ट्रिब्यूनल ने इंश्योरेंस कंपनी को यह मुआवज़ा राशि कविता सावलानी के 76 वर्षीय पति सुरेश सावलानी और उनके दोनों बच्चों (जिनकी उम्र अब 47 और 46 वर्ष है) को भुगतान करने का निर्देश दिया है।

1994 में दायर की थी याचिका

गौरतलब है कि इस दुर्घटना के बाद पीड़ित के परिवार ने 23 दिसंबर 1994 को ही एक्सीडेंटल क्लेम याचिका दायर कर दी थी। याचिका में कहा गया था कि हादसा दोनों गाड़ियों के ड्राइवरों की लापरवाही से हुआ था और उसमें यात्री के रूप में सवार कविता की कोई गलती नहीं थी।

जून 2003 में जब मूल ट्रिब्यूनल ने 5.5 करोड़ रुपये का मुआवजा तय किया था, तब ओरिएंटल इंश्योरेंस और सावलानी परिवार दोनों ने इस फैसले के खिलाफ अदालत का रुख किया था।