राजस्थान की रिद्धि चौहान का कमाल, 17 साल की उम्र में 300 US नेवी कैडेट्स को कर रहीं लीड, कमीशंड ऑफिसर बनना लक्ष्य
राजस्थान की रिद्धि चौहान ने 17 साल की उम्र में 300 US नेवी कैडेट्स को लीड करने का कारनामा किया है। उनके माता-पिता का नाम दिलीप एवं रुचिका चौहान है। ...और पढ़ें

Riddhi Chauhan: 17 वर्ष की उम्र में बनीं बटालियन कमांडिंग ऑफिसर।
HighLights
17 साल की उम्र में रिद्धि ने हासिल किया खास मुकाम।
300 US नेवी कैडेट्स को लीड करने का बनाया कारनामा।
करियर डेस्क, नई दिल्ली। 17 साल की उम्र वाले बच्चे सुबह जब स्कूल जाने की तैयारी में लगे होते हैं तब उस समय भारतीय मूल की छात्रा रिद्धि चौहान ड्रिल फील्ड पर होती हैं और लगभग 300 यूएस कैडेट्स की सुबह की प्रैक्टिस को लीड कर रही होती हैं। आगे चलकर इस भारतीय-अमेरिकी छात्रा का सपना यूनाइटेड स्टेट्स नेवी में कमीशंड ऑफिसर बनने का है। ANI के मुताबिक इसके लिए रिद्धि का एडमिशन नेवल एकेडमी प्रिपरेटरी स्कूल में भी हो गया है जो उनके सपने की ओर एक और कदम है।
कैसा रहा सफर
रिद्धि ने अपना कॉन्फिडेंस और लीडरशिप स्किल्स बेहतर करने के लिए फ्रेशमैन के तौर पर NJROTC प्रोग्राम जॉइन किया। इसके साथ ही उन्होंने कई लीडरशिप रोल- जैसे एकेडमिक कमांडर, STEM कमांडर, प्लाटून लीडर और इंस्पेक्शन कमांडर निभाए जिसके बाद अब वे बटालियन कमांडिंग ऑफिसर बन गई हैं। इस समय वे सुबह 7 बजे स्कूल पहुंचकर बटालियन की डेली गतिविधियों को संभालती हैं और ट्रेनिंग सेशन की देखरेख करने के साथ ही जूनियर कैडेट्स को गाइड करने का काम करती हैं।
नेशनल एकेडमिक एग्जाम में यूनिट को दिलाया पहला स्थान
रिद्धि ने एकेडमिक कमांडर के तौर पर लगातार दो साल तक अपने स्कूल की टीम को 'लीडरशिप एंड एकेडमिक बाउल' के दूसरे राउंड के लिए क्वालिफाई करने में मदद की। इसके अलावा एक नेशनल एकेडमिक एग्जाम में यूनिट को पहला स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने बटालियन के पहले 'सी-पर्च' (SeaPerch) अंडरवॉटर रोबोट को बनाने में भी लीडरशिप की, जिससे कैडेट्स को रोबोटिक्स और इंजीनियरिंग का प्रैक्टिकल अनुभव मिला।
बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था से लीडरशिप और महंत स्वामी महाराज से सीखी विनम्रता
रिद्धि का कहना है उनको महंत स्वामी महाराज से विनम्रता, दया और निस्वार्थ सेवा की सीख की प्रेरणा मिली। इसके अलावा BAPS स्वामीनारायण संस्था से जुड़ने से उन्होंने लीडरशिप शैली को आकार देने और निखारने के गुर सीखे।
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केवल 17 साल की उम्र में ही उनका यह शॉर्ट करियर युवाओं को सीख दे रहा है कि लगन, अनुशासन और कड़ी मेहनत से युवा अपने लक्ष्य को अवश्य हासिल कर सकते हैं।