क्लास 9वीं की छात्र प्रिया कुमारी ने जीता बाल वैज्ञानिक पुरस्कार, अब जापान में जाकर करेंगी पढ़ाई
बिहार सुपौल की रहने वाली प्रिया कुमारी ने 12वीं राष्ट्रीय स्तरीय प्रदर्शनी एवं परियोजना प्रतियोगिता में बाल वैज्ञानिक पुरस्कार जीता ...और पढ़ें
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स्कूली छात्रों के लिए तैयार किया किफायती बैग।
करियर डेस्क, नई दिल्ली। बिहार सुपौल जिले की रहने वाली कक्षा 9वीं की छात्रा प्रिया कुमारी ने स्कूली छात्रों के लिए एक ऐसा किफायती बैग तैयार किया है। जिसे खोलकर उस पर बैठा जा सकता है और पढ़ाई पूरी होने के बाद उसे आसानी से बैग में रखा भी जा सकता है। अपनी इस प्रतिभा को उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित 12वीं राष्ट्रीय स्तरीय प्रदर्शनी एवं परियोजना प्रतियोगिता (NLEPC 2026) में पेश किया।
इस प्रतियोगिता में हजारों बाल वैज्ञानिकों ने भाग लिया था। जिसमें उन्हें कृषि, पर्यावरण और दैनिक जीवन से जुड़ी समस्याओं को आसान नवाचारों के माध्यम से प्रस्तुत करना था। इस प्रतियोगिता में कुल 62 बाल वैज्ञानिक को सम्मानित किया गया, जिसमें बिहार की प्रिया कुमारी भी शामिल है।
शिक्षित परिवार में जन्म
बिहार सुपौल जिले की रहने वाली प्रिया कुमारी एक बेहद ही शिक्षित परिवार से आती हैं। वह कक्षा 9वीं की छात्र हैं। प्रिया कुमारी के पिता शिवशंकर मंडल प्राथमिक विद्यालय चौहट्टा में एक सरकारी शिक्षक और उनकी मां भी एक शिक्षिका हैं।
छात्रों के लिए तैयार किया अनोखा बैग
गांव के कई सरकारी स्कूलों में छात्रों के बैठने के लिए बेंच की सुविधा नहीं होती है। जिसके कारण उन्हें दैनिक जीवन में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। छात्रों की इसी परेशानी को सुलझाने के लिए प्रिया ने एक बेहद ही किफायती बैग तैयार किया है। इस बैग को उन्होंने 'कारपेट विद स्कूल बैग' नाम दिया है। इस बैग की खासियत यह है कि इसमें एक दरी जुड़ी हुई है, जिसे खोलकर आसानी से बैठा जा सकता है और बाद में मोड़कर वापस बैग में रखा भी जा सकता है। यह एक वाटरप्रूफ बैग है। इस बैग को बनाने के लिए छात्रों की स्वच्छता का भी ध्यान रखा गया है।
जापान में जाकर करेंगी पढ़ाई
बिहार की प्रिया कुमारी को उनकी रचनात्मकता एवं नवाचार के लिए बाल राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उनके इस प्रोजेक्ट के जरिये उन्हें अब जापान जाकर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बारीकियों को सीखने का अवसर मिलेगा। प्रिया कुमारी के लिए यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। उनकी इस सफलता से परिवार और गांव में खुशी का माहौल है।
