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Success Story: 18 से ज्यादा परीक्षा में असफल, ट्रेन में रोकर फाडे़ पेपर; ड्राइवर का बेटा बना IPS

Updated: Wed, 26 Aug 2026 09:45 AM (IST)

मध्य प्रदेश के चंदेरी में रहने वाले विवेक यादव ने 5वें प्रयास में UPSC की परीक्षा क्रैक कर 487वीं रैंक ...और पढ़ें

Success Story: यहां पढ़ें विवेक यादव की सक्सेस स्टोरी।

Success Story: यहां पढ़ें विवेक यादव की सक्सेस स्टोरी।

HighLights

  1. यूपीएससी की परीक्षा में हासिल की 487वीं रैंक।

  2. 5वें प्रयास में हासिल की सफलता।

करियर डेस्क, नई दिल्ली। अगर आपके अंदर अपने सपनों को पूरा करने की जिद और लगन हैं, तो विषम परिस्थितियां भी आपको सपनों को पूरा करने से रोक नहीं सकती हैं। इसी का जीता जागता उदाहरण है एक गरीब ड्राइवर के बेटे विवेक यादव। विवेक यादव ने UPSC की परीक्षा में 487वीं रैंक हासिल की है। उन्हें यह मुकाम इतनी आसानी से नहीं मिला है।

यूपीएससी की परीक्षा में सफलता पाने से पहले उन्हें 18 बार अन्य परीक्षाओं में निराशा हाथ लगी। लेकिन बावजूद उन्होंने कभी भी हताश होकर अपने सपनों से समझौता नहीं किया। ऐसे में विवेक यादव की कहानी आज उन तमाम युवाओं के लिए एक प्रेरणा की मिसाल है, जो परीक्षा में बार-बार मिलने वाली असफलताओं से हार कर अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं।

डीयू से किया ग्रेजुएशन

विवेक यादव ने अपनी शुरुआती शिक्षा चंदेरी के सरस्वती विद्या मंदिर से पूरी की है। इसके बाद वह दिल्ली आ गए और दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से उन्होंने हिस्ट्री ऑनर्स में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया डीयू से ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने इग्नु से इतिहास में मास्टर की डिग्री पूरी की।

20 परीक्षाओं में मिली असफलता

यूपीएससी क्रैक करने वाले विवेक यादव को यूपीएससी की सिविल सर्विस परीक्षा में सफलता इतनी आसानी से नहीं मिली है। यह उनका 5वां अटेम्प्ट था। तीन साल तक यूपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा में असफलता और 2 बार सी-सैट में फेल होने के बाद वह बुरी तरह टूट गए थे। हालांकि यूपीएससी की तैयारी करना उनका प्लान-बी था। इससे पहले वह किसी ऐसी नौकरी की तलाश में थे, जिससे परिवार की आर्थिक परेशानी दूर हो जाएं। इसके लिए उन्होंने तकरीबन 20 परीक्षाएं दी, जिसमें पटवारी, MPPSC, UPPSC और दिल्ली कॉन्स्टेबल सहित उन्हें सभी परीक्षाओं में सिर्फ निराशा ही हाथ लगी।

ट्यूशन पढ़ाकर उठाया अपना खर्चा

विवेक यादव एक बेहद ही गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता नवलसिंह यादव नगर पालिका में CMO के ड्राइवर के रूप में कार्यरत हैं। इसके साथ ही उनकी मां सिलाई करके परिवार का पालन-पोषण करती है। साथ ही वह आंगनवाड़ी में सहायिता के तौर पर भी कार्यरत हैं। बता दें, परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद भी उनके माता-पिता ने विवेक की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। हालांकि विवेक इन विषम परिस्थितियों में परिवार पर बोझ नहीं बनना चाहते थे। इसलिए दिल्ली आने के बाद उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई का खर्चा खुद उठाया।

ट्रेन में रोए और फाड़कर फेंकें पेपर

प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार असफलता मिलने के बाद विवेक काफी ज्यादा हताश हो गए थे। उनके जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब वह ट्रेन में बैठकर रोने लगे और निराश होकर रोते हुए अपने सभी पेपर को फाड़कर फेंक दिए। खुद को असफलता से घिरा देखने के बाद उन्होंने स्वयं को संभाला और अपनी कमियों पर काम किया। साथ ही वह दिल्ली छोड़कर अपने घर वापस आ गए और अपने माता-पिता के साथ रहकर पूरी मेहनत और लगन से परीक्षा की तैयारी की। हालांकि इस बार उन्हें सफला मिली और उन्होंने UPSC 2024 के फाइनल रिजल्ट में 487वीं रैंक हासिल की। परीक्षा में कई असफलताओं के बाद उन्होंने यह साबित कर दिया कि निरंतर प्रयास से बड़ी से बड़ी चुनौतियों को पार किया जा सकता है।