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    UCC लागू करने वाला तीसरा राज्य बना असम, विधानसभा में विधेयक पास

    Updated: Wed, 27 May 2026 04:46 PM (IST)

    असम विधानसभा ने बुधवार को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पारित कर दिया है। यह विधेयक विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों के लिए धर्म की परवाह ...और पढ़ें

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    UCC लागू करने वाला तीसरा राज्य बना असम। (पीटीआई)

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। असम विधानसभा ने बुधवार को UCC विधेयक पारित कर दिया। इस विधेयक का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशन को नियंत्रित करने के लिए धर्म की परवाह किए बिना एक समान कानूनी ढांचा स्थापित करना है, जबकि विपक्ष ने मांग की थी कि इसे प्रवर समिति के पास भेजा जाए।

    इस प्रस्तावित कानून के पारित होने के साथ ही, असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद समान नागरिक संहिता विधेयक पारित करने वाला तीसरा राज्य बन गया है। गोवा में भी एक समान नागरिक कानून लागू है, जो पूर्ववर्ती पुर्तगाली औपनिवेशिक काल से चला आ रहा है।

    'समान नागरिक संहिता, असम, 2026 विधेयक' पर दिन भर चली चर्चा के बाद, अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे पारित कराने के लिए सदन में पेश करने को कहा।

    दास ने विपक्ष की उस मांग को खारिज कर दिया जिसमें विधेयक को व्यापक विचार-विमर्श के लिए एक प्रवर समिति के पास भेजने की बात कही गई थी। इसके विरोध में विपक्षी सदस्य सदन के वेल में आ गए और विधेयक पारित होने तक लगातार नारेबाजी करते रहे।

    विधानसभा में ध्वनि मत से पारित हुआ विधेयक

    सत्ता पक्ष के सदस्यों द्वारा लगातार 'भारत माता की जय' और 'जय श्री राम' के नारे लगाए जाने के बीच, अध्यक्ष ने विधेयक ध्वनि मत से पारित करने के लिए सदन के समक्ष रखा।

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    सत्ता पक्ष के सदस्यों द्वारा विधेयक के पक्ष में मतदान किए जाने के बाद, अध्यक्ष ने घोषणा की, "मैं घोषणा करता हूं कि विधेयक पारित हो गया है।" विधेयक पारित होते ही, सदन जोरदार तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इसका स्वागत किया गया।

    धर्म की परवाह किए बिना सबसे के लिए समान कानून

    यह विधेयक विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे विभिन्न व्यक्तिगत मामलों पर, धर्म की परवाह किए बिना, कानूनों का एक समान सेट लागू करने के उद्देश्य से, असम सरकार ने सोमवार को समान नागरिक संहिता पर एक विधेयक पेश किया था। इस विधेयक में बहुविवाद पर प्रतिबंध लगाने और लिव-इन संबंधों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने का प्रस्ताव किया गया है।

    अनुसूचित जनजाति पर लागू नहीं होगा कानून

    हालांकि, विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह कानून असम में रहने वाले किसी भी अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति पर लागू नहीं होगा। विधेयक में कई दंडात्मक उपायों का प्रस्ताव किया गया है, जिसमें द्विविवाह या बहुविवाह के लिए सात साल कर की कैद और लिव-इन रिलेशन का रजिस्ट्रेशन न कराने पर तीन महीने तक की जेल की सजा शामिल है।

    (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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