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BRICS की आड़ में चीनी सामान और AI की एंट्री? चिनफिंग के '5-पॉइंट प्लान' को लेकर भारत सतर्क

Published: Mon, 14 Sep 2026 05:56 AM (IST)Updated: Mon, 14 Sep 2026 08:16 AM (IST)

BRICS सम्मेलन में शी चिनफिंग द्वारा एकीकृत बाजार और ओपन-सोर्स AI प्लेटफॉर्म के प्रस्ताव पर भारत सतर्क है। भारत को ...और पढ़ें

शी चिनफिंग के ओपन-सोर्स AI और 'एकीकृत बाजार' के प्रस्ताव से भारत सतर्क (फोटो-PTI)

शी चिनफिंग के ओपन-सोर्स AI और 'एकीकृत बाजार' के प्रस्ताव से भारत सतर्क (फोटो-PTI)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा BRICS सम्मेलन के समापन सत्र में एकीकृत बाजार बनाने और ओपन-सोर्स AI प्लेटफॉर्म विकसित करने का प्रस्ताव दिया गया है।

आगामी BRICS सम्मेलन की अध्यक्षता चीन को मिलने वाली है, जिसे देखते हुए माना जा रहा है कि शी चिनफिंग इन मुद्दों को अगले साल के मुख्य एजेंडे में शामिल करने की कोशिश करेंगे।

हालांकि, चीन की इस पहल को लेकर भारतीय नीति निर्माता और विशेषज्ञ काफी सतर्क हैं और इस प्रस्ताव से भारत में किसी खास उत्साह की उम्मीद नहीं है।

भारतीय बाजारों और तकनीक के लिए खतरा

BRICS ने लंबे समय से खुद को एक मुक्त व्यापार क्षेत्र बनने से दूर रखा है। यदि टैरिफ घटाकर बाजारों को एकीकृत किया जाता है, तो इससे सुरक्षात्मक उपायों के बिना भारतीय बाजार चीनी सामानों और कंपनियों के लिए खुल जाएंगे। इससे भारत के घरेलू उद्योग और स्वदेशी तकनीकों के विकास को बड़ा नुकसान पहुंचने का खतरा है।

भारत ने हमेशा चीनी निवेशों पर सख्त निगरानी रखी है और उद्योग जगत के दबाव के बावजूद सुरक्षा नियमों में कोई ढील नहीं दी है।

चीनी उत्पादों से अपने बाजारों को बचाने की यह चिंता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि जापान, यूरोप और अमेरिका जैसे देश भी चीन पर अपनी निर्भरता कम करने में जुटे हैं।

RCEP से दूरी और FTAs पर भारत का जोर

नवंबर 2019 में भारत ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP ) समझौते से खुद को अलग कर लिया था, क्योंकि इसमें चीन का वर्चस्व था और भारत को चीनी सामानों की बाढ़ का डर था।

इसके बाद से भारत ने अपनी व्यापार नीति बदलते हुए ऑस्ट्रेलिया, यूएई, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और EFTA देशों के साथ कई मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, ताकि आयात के स्रोतों में विविधता लाई जा सके।

चीनी AI और LLM मॉडल पर भारत को आपत्ति

चिनफिंग ने अपने पांच सूत्रीय एक्शन प्लान में चीन के लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) और AI तकनीकों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह चीनी तकनीकों के जरिए दूसरे देशों में घुसपैठ की एक कोशिश हो सकती है। भारत पहले से ही सुरक्षा कारणों से कई चीनी ऐप्स को बैन कर चुका है और चीन निर्मित कैमरों व उपकरणों के इस्तेमाल को लेकर भी कड़ा रुख अपनाए हुए है।

ऐसे में चीनी AI प्लेटफॉर्म के प्रस्ताव को भारत के लिए एक बड़े रेड फ्लैग खतरे की घंटी के रूप में देखा जा रहा है।