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'आपकी हिम्मत कैसे हुई', CJP प्रोटेस्ट को लेकर ग्रेटर नोएडा मजिस्ट्रेट ने भेजा छात्र को नोटिस; CJI सूर्यकांत भड़के

Published: Wed, 09 Sep 2026 12:05 PM (IST)Updated: Wed, 09 Sep 2026 12:46 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के मजिस्ट्रेट को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले एक छात्र को नोटिस भेजने पर कड़ी फटकार लगाई है।

CJI सूर्यकांत ने ग्रेटर नोएडा मजिस्ट्रेट को लगाई फटकार (जागरण)

CJI सूर्यकांत ने ग्रेटर नोएडा मजिस्ट्रेट को लगाई फटकार (जागरण)

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा मजिस्ट्रेट को लगाई फटकार।

  2. CJP प्रोटेस्ट में छात्र को नोटिस भेजने का मामला।

  3. CJI सूर्यकांत ने कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रस्तावित प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने वाले दूसरे साल के लॉ स्टूडेंट को शांति बनाए रखने का नोटिस भेजा था। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए ग्रेटर नोएडा मजिस्ट्रेट को फटकार लगाई है।

हालांकि ग्रेटर नोएडा मजिस्ट्रेट ने नोटिस वापस ले लिया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है, क्योंकि 1 सितंबर के देशव्यापी निर्देश में छात्रों के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाई गई थी।

मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए CJI ने कहा, 'कोई मजिस्ट्रेट नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे कर सकता है? हमने साफ कर दिया था कि किसी भी छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। कोई भी मजिस्ट्रेट उस आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता।'

CJI सूर्यकांत ने पूछे सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार, 9 सितंबर को ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने CJP प्रोसेस्ट में शामिल होने के लिए प्रचार करने वाले एक छात्र के खिलाफ 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' की धारा 130 के तहत जारी नोटिस पर सवाल उठाए।

कोर्ट ने पूछा कि एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने यह नोटिस कैसे जारी किया, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने छात्र विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी FIR को रद कर दिया था और CJP विरोध प्रदर्शनों को लेकर किसी भी छात्र के खिलाफ भविष्य में कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने पर रोक लगा दी थी।

यह मामला सीनियर एडवोकेट विश्वजीत भट्टाचार्य द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के ध्यान में मौखिक रूप से लाया गया।

एडवोकेट विश्वजीत भट्टाचार्य ने कहा, 'नोएडा पुलिस की जानकारी पर ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने दूसरे वर्ष के छात्र को नोटिस जारी किया था, इसे लागू किया जाने वाला था, बाद में प्रेस में खबर आई कि इसे वापस ले लिया गया है।'

वकील ने आगे कहा, 'यह भारत के छात्रों के साथ एक प्रयोग है। यह प्रथम दृष्टया अदालत की अवमानना है। नोएडा और यूपी के अधिकारी छात्रों के मन में डर का माहौल नहीं बना सकते।'

नोटिस वापस लेने के बाद भी बवाल क्यों?

जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने पूछा कि अगर नोटिस वापस ले लिया गया है, तो अब कार्रवाई का क्या आधार बचा है। वकील ने जवाब दिया कि एक बार अवमानना हो जाने पर, सिर्फ नोटिस वापस लेने से उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

वकील ने कहा, 'यह इस अदालत की गरिमा की अवमानना है। यह देश की सर्वोच्च अदालत है, जो हमारे लोकतंत्र की अदालत चला रही है।'

CJI ने वकील से कहा कि वे एक याचिका के जरिए नोटिस को रिकॉर्ड पर लाएं और कहा कि कोर्ट संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगेगा।

क्या है मामला?

ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट III की अदालत ने अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126/135 के तहत नोटिस जारी किया।

यह कार्रवाई पुलिस की उस रिपोर्ट के बाद की गई जिसमें आरोप लगाया गया था कि वह दूसरे छात्रों को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए उकसा रहे थे।

4 सितंबर, 2026 के नोटिस के अनुसार, पुलिस ने आरोप लगाया कि त्रिपाठी यूनिवर्सिटी के छात्रों के बीच सरकार विरोधी और गुमराह करने वाली बातें फैला रहे थे और उन्हें उकसा रहे थे और उन्हें CJP के प्रस्तावित धरने में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे।

वहीं सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि जब छात्रों के ऊपर किसी भी दंडात्मक कार्रवाई के लिए मना किया गया था, तो ग्रेटर नोएडा मजिस्ट्रेट कैसे नोटिस जारी कर सकते हैं।

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